भारतीय रुपये से प्रतिबंधित संवेदनशील सामान खरीद रहा रूस? पश्चिम का एक और प्रोपेगेंडा या पुतिन की सीक्रेट डील?
India-Russia Defence News: लीक हुए दस्तावेजों और अज्ञात पश्चिमी अधिकारियों ने दावा किया है, कि रूस, भारत से संवेदनशील सामान खरीद रहा है। दावे में कहा गया है, कि रूस अपने हथियारों के जरूरी कलपुर्जों के निर्माण के लिए भारत में मैन्युफैक्चरिंग यूनिट ट्रांसफर करने पर गंभीरता से विचार कर रहा है।
दावे में ये भी कहा गया है, अक्टूबर 2022 में डिफेंस प्रोडक्शन के लिए जिम्मेदार रूस के उद्योग और व्यापार मंत्रालय ने सीक्रेट चैनलों के जरिए महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक्स पर लगभग 1 बिलियन डॉलर खर्च करने की योजना बनाई।

क्या भारत से संवेदनशील सामान खरीद रहा रूस?
यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद भारत ने भारी मात्रा में रूसी कच्चे तेल का आयात किया है, जिससे रूसी अर्थव्यवस्था को काफी मदद मिली है। और भारत ने कच्चा तेल खरीदने के लिए रूस को रुपये में पेमेंट किया है, क्योंकि रूस के साथ डॉलर में कारोबार करने पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। जिसकी वजह से रूसी बैंकों के पास भारतीय रुपये का विशाल भंडार जमा हो गया है।
रिपोर्ट्स में दावा किया गया है, कि रूस और भारतीय साझेदारों ने पश्चिमी प्रतिबंधों के निशाने पर डबल यूज वाली टेक्नोलॉजी का व्यापार किया है। इनोवियो वेंचर्स नामक एक भारतीय कंपनी ने रूस को लाखों डॉलर के इलेक्ट्रॉनिक्स की आपूर्ति की है।
चीन के बाद भारत, रूसी तेल का दूसरा सबसे बड़ा आयातक बन गया है। यह रूसी कच्चे तेल को परिष्कृत करता है और फिर पश्चिमी देशों में उसकी सप्लाई करता है। यह व्यापार गतिशीलता अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बीच, रूस का समर्थन करने में भारत की रणनीतिक भूमिका को उजागर करती है।
अमेरिका-भारत संबंधों पर प्रभाव
रूस और अमेरिका के बीच संतुलन बनाने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कोशिशों ने वाशिंगटन और नई दिल्ली के बीच संबंधों को तनावपूर्ण बना दिया है। अमेरिकी वाणिज्य विभाग ने रूस की सैन्य क्षमताओं को सीमित करने के लिए उसे उच्च तकनीक वाले उत्पादों के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिए हैं। इन तनावों के बावजूद, भारत, रूस से लगातार हथियारों की खरीददारी कर रहा है।
प्रतिबंधों के कारण रूस को जीवाश्म ईंधन निर्यात से प्रतिदिन 175 मिलियन डॉलर का नुकसान हो रहा है, साथ ही प्रमुख रूसी बैंकों को अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली से हटा दिया गया है। यह आर्थिक प्रभाव रूस के साथ भारत के चल रहे व्यापार के महत्व को उजागर करता है।

भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग
भारत रक्षा आपूर्ति के लिए रूस पर बहुत ज्यादा निर्भर है और 60 बिलियन डॉलर मूल्य के 65% भारतीय हथियार मास्को से आते हैं। हालांकि, अब भारत अपने हथियार स्रोतों में विविधता ला रहा है, लेकिन वह रूस के साथ संबंधों को पूरी तरह से खत्म नहीं कर सकता है, क्योंकि उसे चिंता है कि अलग-थलग मास्को, चीन के साथ संबंधों को मजबूत कर सकता है।
दोनों देश संयुक्त रूप से ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल का निर्माण कर रहे हैं और भारत में AK-203 राइफल बनाने की योजना बना रहे हैं। यह सहयोग भारत और रूस के बीच गहरे रक्षा सहयोग को उजागर करता है।
रूस ने इस बात में दिलचस्पी दिखाई है, कि भारतीय कंपनियां यूक्रेन संघर्ष के दौरान अमेरिका और यूरोपीय कंपनियों की तरफ से छोड़े गए व्यवसायों को अपने हाथ में ले लें। इस कदम से दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंध और मजबूत हो सकते हैं। वहीं, भारत अपनी घरेलू विनिर्माण क्षमताओं को बढ़ा रहा है, लेकिन भविष्य में भी उसे रूसी कलपुर्जों और रखरखाव सहायता की आवश्यकता होगी। यह निर्भरता सुनिश्चित करती है, कि वैश्विक भू-राजनीतिक बदलावों के बावजूद रूस के साथ भारत का रिश्ता महत्वपूर्ण बना रहेगा।
भारत, रूस और पश्चिमी देशों के बीच विकसित हो रही गतिशीलता वैश्विक राजनीति और व्यापार संबंधों को आकार दे रही है। जैसे-जैसे दोनों देश इन जटिलताओं से निपट रहे हैं, उनकी साझेदारी आपसी रणनीतिक हितों को संबोधित करने में महत्वपूर्ण बनी हुई है।
लेकिन, इन सबके बीच सवाल ये है, कि पश्चिमी देशों की रिपोर्ट में जो दावा किया गया है, कि रूस, भारत से संवेदनशील सामानों का आयात कर रहा है, वो सही हैं या भारत एक खिलाफ एक और प्रोपेगेंडा हैं?












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