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G7 में भारत को शामिल करने और चीन को किनारे करने पर रूस नाराज

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वॉशिंगटन। भारत और रूस पिछले छह दशक से ज्‍यादा समय से रणनीतिक साझीदार, मगर अब लगता है यह समीकरण बदलने लगा है। रूस अब चीन के करीब हो रहा है। अमेरिकी राष्‍ट्रपकित डोनाल्‍ड ट्रंप की तरफ से जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फोन पर जी7 में शामिल होने का न्‍यौता मिला तब से रूस का चेहरा उतर गया है। पीएम मोदी ने ट्रंप का यह प्रस्‍ताव स्‍वीकार कर लिया है। रूस इस बात से नाराज है कि चीन को अलग-थलग किया जा रहा है। वैसे इस संगठन में भारत के अलावा ऑस्‍ट्रेलिया, साउथ कोरिया और रूस को भी शामिल करने का प्रस्‍ताव दिया गया है।

यह भी पढ़ें-G7 में भारत को शामिल करने की बात पर चीन का BP बढ़ायह भी पढ़ें-G7 में भारत को शामिल करने की बात पर चीन का BP बढ़ा

अमेरिका है इस समय G7 का मुखिया

अमेरिका है इस समय G7 का मुखिया

अमेरिका इस समय जी7 का मुखिया है और उसके इस प्रस्‍ताव पर चीन पहले ही तमतमाया हुआ है। चीन जो पहले ही कोरोना वायरस महामारी की वजह से अंतरराष्‍ट्रीय समुदाय के निशाने पर है, उसने इस प्रस्‍ताव पर अपनी नाराजगी जाहिर कर दी है। चीन के विदेश मंत्रालय की तरफ से कहा गया है कि उसके खिलाफ यह घेराबंदी पूरी तरह से असफल रहने वाली है। यह बात और भी दिलचस्‍प है कि रूस को दिए गए न्‍यौते से चीन खुश नहीं है मगर चीन को अलग-थलग करने पर रूस बेहद निराश है।

'चीन के बिना लक्ष्‍यों को हासिल कर पाना असंभव'

'चीन के बिना लक्ष्‍यों को हासिल कर पाना असंभव'

रूस की विदेश मंत्रालय की प्रवक्‍ता मारिया जाखारखोवा ने कहा, 'जी7 के विस्‍तार का आइडिया सही दिशा में उठाया गया कदम है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वह सही प्रदर्शन करने वाला ही हो। चीन को शामिल किए बिना वैश्विक पहल से जुड़े गंभीर लक्ष्‍यों को हासिल कर पाना बिल्‍कुल ही असंभव है।' यह भी कहा जा रहा है कि ट्रंप की तरफ से रूस को जी7 में शामिल होने लिए जो प्रस्‍ताव दिया है, उससे चीन काफी परेशान है। हाल ही में चीन ने मॉस्‍को से काफी करीबी संबंध बना लिए हैं। अब उसका मानना है कि अमेरिका ऐसा करके रूस को उससे दूर ले जाना चाहता है।

साल 2014 में रूस को किया गया था बाहर

साल 2014 में रूस को किया गया था बाहर

रूस साल 2014 तक जी7 का सदस्‍य था और तब इस संगठन को जी8 के तौर पर जाना जाता था। लेकिन उसी वर्ष रूस की सेना क्रीमिया में दाखिल हुई और इसके बाद तत्‍कालीन अमेरिकी राष्‍ट्रपति बराक ओबामा ने रूस को बाहर कर दिया था। यहीं से रूस, चीन के करीब होता गया। राष्‍ट्रपति ब्‍लादीमिर पुतिन के प्रवक्‍ता का कहना है कि अभी तक उनके पास प्रस्‍ताव की पूरी जानकारी नहीं है और उन्‍हें यह भी नहीं मालूम है कि यह आधिकारिक ऐलान है या नहीं। वहीं कनाडा और यूनाइटेड किंगडम ने रूस को शामिल करने का विरोध किया है। कनाडा के पीएम जस्टिन ट्रूडो ने साफ कर दिया है कि जी7 में रूस की वापसी को उनका समर्थन नहीं है।

क्‍या है G7 और इसका मकसद

क्‍या है G7 और इसका मकसद

जी7 उन सात देशों का संगठन है जिनकी अर्थव्‍यवस्‍थाएं विकसित हैं। इस संगठन में अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम (यूके), फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान और कनाडा जैसे देश शामिल हैं। हर वर्ष इस संगठन में शामिल देशों के मुखिया वैश्विक मुद्दों, जिससें जलवायु परिवर्तन, सुरक्षा और अर्थव्‍यवस्‍था शामिल हैं, पर चर्चा के लिए इकट्ठा होते हैं। पिछले वर्ष फ्रांस के प्रधानमंत्री इमैनुएल मैंक्रों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जी7 में शामिल होने के लिए विशेष तौर पर इनवाइट किया था। पीएम मोदी ने अगस्‍त 2019 में हुए जी7 सम्‍मेलन में फ्रांस के बियारिट्ज में शिरकत की थी।

English summary
Russia is upset as US isolating China while discussing G7.
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