यूक्रेन पर महाप्रलय का खतरा, रूस ने सबसे बड़े बांध नोवा कखोवका को उड़ाया, पुतिन का विनाशकारी हमला!

रूस ने पिछले साल 24 फरवरी को यूक्रेन पर हमला किया था और 15 महीने बीत जाने के बाद भी युद्ध का नतीजा नहीं निकला है। वहीं, यूक्रेन का इन्फ्रास्ट्रक्चर तबाह हो चुका है।

Russia destroy nova kakhovka dam

Russia destroy Nova Kakhovka Dam: यूक्रेन ने मंगलवार को रूसी सेना पर दक्षिणी यूक्रेन के सबसे बड़े नोवा कखोवका बांध को उड़ाने का आरोप लगाया है, जिसके बाद यूक्रेन पर महाप्रलय का खतरा मंडरा रहा है।

हालांकि, ये बांध रूस के ही नियंत्रण वाले हिस्से में स्थिति है, लेकिन इस बांध के टूटने के बाद अब यूक्रेन के पानी में डूबने का खतरा मंडरा रहा है। वहीं, बांध के ध्वस्त होने के बाद निप्रो नदी के क्षेत्र वाले निवासियों को इलाका खाली करने के लिए कहा गया है।

माना जा रहा है, कि बांध टूटने के बाद नीचे वाले इलाके में भीषण बाढ़ आ सकती है, जिसकी चेतावनी भी जारी कर दी गई है।

यूक्रेनी आंतरिक मंत्रालय ने निप्रो नदी के दाहिने किनारे पर 10 गांवों के निवासियों और खेरसॉन शहर के कुछ हिस्सों में रहने वाले लोगों को अपना जरूरी सामान, दस्तावेज और पालतू जानवरों को साथ लेकर फौरन पूरा इलाका खाली करने की चेतावनी जारी की है।

आपको बता दें, कि पिछले साल अक्टूबर में यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की ने नोवा कखोवका बांध के उड़ाने की आशंका जताई थी और कहा था, कि रूस इस बांध को उड़ाने की कोशिश में है।

ये बांध रूस के ही नियंत्रण वाले क्षेत्र खेरसॉन में स्थिति है, जहां के मेयर को रूस ने नियुक्त किया है और उस मेयर ने बांध उड़ाने की घटना को आतंकवादी कृत्य करार दिया है।

नोवा कखोवका बांध को उड़ाया

नोवा कखोवका बांध को साल 1956 में तैयार किया गया था, जिससे पनबिजली तैयार की जाती है। वहीं, यूक्रेन ने कहा है, कि इस बांध में फिलहाल 18 क्यूबिक किलोमीटर पानी है।

खेरसॉन रीजनल मिलिट्री एडमिनिस्ट्रेशन के प्रमुख ऑलेक्ज़ेंडर प्रोकुडिन ने सुबह 7 बजे से पहले टेलीग्राम पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में कहा, कि "रूसी सेना ने आतंक का एक और कृत्य किया है" और चेतावनी दी, कि पानी पांच घंटे के भीतर "गंभीर स्तर" तक पहुंच जाएगा।

नोवा कखोवका बांध, यूक्रेन की सबसे बड़ी निप्रो नदी पर बिजली उत्पादन के लिए बनाया गया था, जो खेरसॉन शहर से करीब 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

सबसे खतरनाक बात ये है, कि यूक्रेन के दक्षिण में Zaporizhzhia परमाणु ऊर्जा संयंत्र, जिस पर एक वर्ष से अधिक समय से रूसी सेना का कब्जा है, वो अपने न्यूक्लियर रिएक्टरों को ठंडा करने के लिए इसी बांध के पानी का इस्तेमाल करता है।

राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने बांध पर किए गये हमले के बाद एक तत्काल बैठक बुलाया है, जिसमें देश की राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा परिषद को तलब किया है। इस परिषद के सचिव ओलेक्सी डेनिलोव ने फेसबुक पर इसकी पुष्टि की है।

वहीं, यूक्रेनी सशस्त्र बलों के दक्षिणी सैन्य कमान ने फेसबुक पर कहा, कि बांध को रूसी सैनिकों ने उड़ा दिया है। वहीं, नुकसान के पैमाने, जल स्तर में बदलाव और बाढ़ के खतरे वाले क्षेत्रों का मूल्यांकन किया जा रहा है।

रूस ने बांध उड़ाने पर क्या कहा?

रूस ने अब तक आधिकारिक रूप से इस घटना पर कोई टिप्पणी नहीं की है, जबकि यूक्रेन ने पिछले साल बार-बार चेतावनी दी थी, कि रूस बांध को उड़ाने का प्रयास कर सकता है, ताकि यूक्रेनी बलों को देश के दक्षिण में क्षेत्र को पुनः प्राप्त करने से रोकने की कोशिश की जा सके।

रूस पर बांध उड़ाने का आरोप उस वक्त लगा है, जब यूक्रेन ने रूस के खिलाफ जवाबी कार्रवाई की घोषणा कर रखी है। वहीं, बांध के टूटने से आसपास के क्षेत्रों में पानी की गंभीर किल्लत हो सकती है और यूक्रेन के लिए आगे की लड़ाई लड़ना काफी मुश्किल हो जाएगा।

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    इसके अलावा, बांध के टूटने के बाद यूक्रेन गंभीर बिजली संकट में फंस सकता है। रूस पहले ही यूक्रेन के कई बिजली संयंत्रों को तबाह कर चुका है और अब बांध को भी उड़ा दिया गया है।

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