धमकी के साथ अमेरिका ने भारत को ‘पुचकारा’, अधिकारी ने कहा- रूस पर बदले स्थिति तो देंगे हथियार

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन की ने कहा है कि, अमेरिका के जितने भी सहयोगी देश हैं, उनमें सिर्फ भारत का रूख ही यूक्रेन को लेकर ‘अस्थिर’ रहा है,

वॉशिंगटन, मार्च 23: यूक्रेन युद्ध में भारत यूनाइटेड नेशंस में कम से कम पांच बार 'न्यूट्रल' रह चुका है और भारत की तरफ से अभी तक रूस की आलोचना नहीं की गई है, जिसको लेकर पश्चिमी देश लगातार भारत पर दवाब बना रहे हैं और अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने तो यहां तक कह दिया, कि यूक्रेन युद्ध में भारत की भूमिका 'अस्थिर' रही है। वहीं, भारत के खिलाफ विदेशी मीडिया भी काफी आक्रामक है और जमकर लेख लिखे जा रहे हैं। लेकिन, अब अमेरिका की तरफ से भारत को सबसे बड़ा ऑफर दिया है।

भारत पर भारी दवाब

भारत पर भारी दवाब

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन की इस टिप्पणी के कुछ घंटे बाद कि अमेरिका के जितने भी सहयोगी देश हैं, उनमें सिर्फ भारत का रूख ही यूक्रेन को लेकर 'अस्थिर' रहा है, अमेरिका की तरफ से भारत को धमकी के साथ साथ बड़ा ऑफर दिया गया है। अमेरिका की शीर्ष अधिकारी ने कहा है कि, लोकतांत्रिक देशों को "एक साथ खड़े होने और अपनी स्थिति विकसित करने" की आवश्यकता है। राष्ट्रपति बाइडेन ने सोमवार को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के खिलाफ संयुक्त मोर्चे के लिए नाटो, यूरोपीय संघ और प्रमुख एशियाई भागीदारों सहित अमेरिका के नेतृत्व वाले गठबंधन की प्रशंसा करते हुए यह टिप्पणी की थी। लेकिन क्वाड में - जिसमें भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका शामिल हैं - सिर्फ भारत ने ही अभी तक रूस की निंदा नहीं की है, वहीं भारत ने रूसी तेल खरीदना भी जारी रखा है और संयुक्त राष्ट्र में मास्को की निंदा करने वाले वोटों से परहेज किया है। लिहाजा अमेरिका और पश्चिमी देश लगातार भारत पर प्रेशर बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

अमेरिका ने दिया भारत को बड़ा ऑफर

अमेरिका ने दिया भारत को बड़ा ऑफर

अमेरिकी विदेश विभाग की राजनीतिक मामलों की अंडर सेक्रेटरी विक्टोरिया नुलैंड ने चीन और रूस के 'गठबंधन' को भारत के खिलाफ बताया है और इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने हथियारों को लेकर भारत को बड़ा ऑफर दिया है। उन्होंने कहा है कि, अमेरिका भारत को रक्षा आपूर्ति के लिए रूस पर निर्भरता से दूर जाने में मदद करने के लिए तैयार है, लेकिन पहले भारत को रूस को लेकर अपनी स्थिति बदलनी होगी। आपको बता दें कि, भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर और भारतीय विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला की अमेरिकी अंडर सेक्रेटरी विक्टोरिया नुलैंड के साथ मुलाकात हुई है और बातचीत हुई है, जिसको लेकर विक्टोरिया नुलैंड ने कहा कि, बैठक में दोनों देशों के बीच व्यापक बातचीत हुई है और अमेरिका ने कहा है कि, भारत जो अभी रूसी हथियारों की वजह से रूस के खिलाफ जाने से परहेज कर रहा है, अमेरिका उस हथियारों को रिप्लेस करने के लिए तैयार है।

विक्टोरिया नुलैंड के ऑफर का मतलब

विक्टोरिया नुलैंड के ऑफर का मतलब

विक्टोरिया नुलैंड अमेरिका की काफी अनुभवी राजनयिक मानी जाती है और यूरोप और यूरेशियन मामलों के लिए सहायक विदेश मंत्री (2013-2017), अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता (2011-2013) और नाटो में अमेरिकी राजदूत (2005-2008) रह चुकी हैं। विक्टोरिया नुलैंड ही वो नेता हैं, जिन्होंने यूक्रेन संकट के बीच ऋण गारंटी की स्थापना के लिए प्वाइंट्स तैयार किए जिसमें 2014 में एक अरब अमेरिकी डॉलर की ऋण गारंटी और यूक्रेनी सैन्य और सीमा रक्षक को गैर-घातक सहायता के प्रावधान शामिल थे। यूक्रेन संकट पर विदेश विभाग के प्रमुख राजनयिक के रूप में कार्य करते हुए, नूलैंड ने यूरोपीय सहयोगियों को रूसी विस्तारवाद पर एक सख्त रुख अपनाने के लिए प्रेरित किया था और अब विक्टोरिया नुलैंड ने भारत को बड़ा ऑफर दिया है।

रूस-भारत संबंध पर बड़ा बयान

रूस-भारत संबंध पर बड़ा बयान

विक्टोरिया नुलैंड ने कहा कि, रूसी आक्रमण "शातिर और अमानवीय" है, और अस्पतालों और स्कूलों पर बमबारी की जा रही है। उन्होंने कहा कि, 'आप देख रहे हैं कि, चार हफ्तों में यह आक्रमण कितना शातिर, हिंसक और अमानवीय रहा है। प्रसूति अस्पतालों, अपार्टमेंट, इमारतों, अनाथालयों, स्कूलों, ओपेरा हाउसों पर हमले किए गये, जिससे पूरी दुनिया में आतंक फैला है। उन्होंने एनडीटीवी से बात करते हुए कहा कि, "मुझे लगता है कि भारत में भी रूसी हमले को लेकर विचार बदल रहे हैं और सोच में परिवर्तन हो रहा है, इसीलिए हमारा बात करना जरूरी है'।

भारत को दिया बड़ा ऑफर

भारत को दिया बड़ा ऑफर

अमेरिकी मंत्री ने कहा कि, 'जैसे जैसे भारत अपनी स्थिति में परिवर्तन लाता है, वैसे वैसे अमेरिका मदद की पेशकश करता रहेगा।' उन्होंने एनडीटीवी से बात करते हुए कहा कि, 'हम उस समय भारत और रूस के बीच ऐतिहासिक संबंधों और रक्षा संबंधों के बारे में जानते हैं जब अमेरिका उस तरह के संबंध रखने के लिए तैयार नहीं था। लेकिन अब समय बदल गया है। वे अमेरिका और यूरोपीय इच्छा के संदर्भ में बदल गए हैं। अब अमेरिका, भारत का मजबूत रक्षा और सुरक्षा साझेदार बन गया है। हम हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अधिक से अधिक काम एक साथ कर रहे हैं। लेकिन, क्रूरता के स्तर और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के उल्लंघन के संदर्भ को लेकर भी समय बदल गया है'।

‘भारत को हथियार देने क लिए तैयार’

‘भारत को हथियार देने क लिए तैयार’

विक्टोरिया नुलैंड ने कहा कि, भारतीय विदेश मंत्री और विदेश सचिव से मुलाकात के दौरान हमने कई और मुद्दों पर बात की है, जिसमें हमने भारत के लिए अन्य अवसरों को लेकर बात की है, जिसमें ये भी शामिल है, कि जब भारत को हथियारों की मदद की गई थी, उस वक्त सोवियत संघ ने मदद की थी, रूस ने नहीं।' उन्होंने कहा कि, 'हम हथियारों को लेकर यूक्रेन की मदद कर रहे हैं, यूक्रेन में सोवियत संघ के जमाने के हथियारों को अपने हथियार के साथ बदल रहे हैं और अगर भारत अपनी स्थिति में परिवर्तन लाता है, तो हम भारत के साथ भी सोवियत संघ के जमाने के हथियारों को अमेरिकी हथियारों के साथ बदलने के लिए तैयार हैं।'

रूसी तेल पर अमेरिका ने क्या कहा?

रूसी तेल पर अमेरिका ने क्या कहा?

अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि, 'भारत रूस से जितनी ऊर्जा खरीदता है, वो अपेक्षाकृत कम है, लेकिन हमने अपनी बातचीत में स्पष्ट किया है, कि हम इसे समझते हैं और ये कुछ ऐसा नहीं है, जिसे फौरन खत्म किया जा सकता है।' अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि, 'जब अमेरिका ने रूसी तेल पर प्रतिबंध लगाया था, तो वॉशिंगटन ने इस बात की उम्मीद नहीं की थी, कि उसके सभी लोकतांत्रिक भागीदार भी तुरंत रूस से तेल खरीदना बंद कर देंगे।' लेकिन, एनडीटीवी से बात करते हुए विक्टोरिया नुलैंड ने कहा कि, '... लेकिन हम जो करना चाहते हैं, वो समय के साथ ऊर्जा के वैकल्पित स्रोतों को खोजने के लिए मिलकर साथ काम करना है और यही हम भारत के साथ भी उम्मीद कर रहे हैं, चाहे वो सुरक्षा के संबंध में हो, या फिर ऊर्जा संबंध में... क्योंकि रूस ने साबित कर दिया है, कि वो अविश्वसनीय रूप से अंतर्राष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करने वाला देश है''।

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