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रिसर्च में खुलासा: 5 गुना घटी सूर्य की चमक, पृथ्वी पर असर को लेकर वैज्ञानिकों ने दिया बड़ा अलर्ट

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नई दिल्ली। कोरोना वायरस का संक्रमण रोकने के लिए दुनिया के कई देशों में लागू लॉकडाउन के चलते पर्यावरण में अलग-अलग तरह के बदलाव देखने को मिल रहे हैं। हाल ही में ऐसी कई रिपोर्ट सामने आईं, जिनमें बताया गया है कि लॉकडाउन के कारण वायुमंडल और नदियों के जल की गुणवत्ता काफी हद तक सुधरी है। हालांकि विशेषज्ञों की राय इससे बिल्कुल अलग है और उनका कहना है कि लॉकडाउन से पर्यावरण में सुधार नहीं हुआ, बल्कि ये सब बहुत ही अस्थाई है। पर्यावरण में बदलाव के इन्हीं कयासों के बीच सूर्य की चमक को लेकर वैज्ञानिकों की एक बेहद चौंकाने वाली रिसर्च सामने आई है।

    Suraj की रोशनी पांच गुना तक हुई कम, Scientist हैरान, Research में जुटे | वनइंडिया हिंदी
    अन्य सितारों की तुलना में चमक परिवर्तनशीलता 5 गुना कम

    अन्य सितारों की तुलना में चमक परिवर्तनशीलता 5 गुना कम

    'साइंस मैगजीन' में प्रकाशित वैज्ञानिकों की इस रिसर्च में बताया गया है कि अंतरिक्ष में मौजदू अन्य तारों की तुलना में सूर्य की चमक और इसकी तीव्रता में बहुत कम परिवर्तन देखने को मिल रहा है। दरअसल वैज्ञानिकों ने पिछले सप्ताह 369 सितारों पर एक रिसर्च की थी। अपनी रिसर्च में इन वैज्ञानिकों ने सतह के तापमान, आकार और रोटेशन के आधार पर हर तारे की तुलना सूरज के साथ की। इस रिसर्च में वैज्ञानिकों के सामने जो निष्कर्ष निकला, वो बेहद चौंकाने वाला था। इसके मुताबिक, अन्य सितारों की तुलना में हमारे सूरज की चमक परिवर्तनशीलता औसतन पांच गुना कम पाई गई।

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    चमक में कैसे होता है बदलाव

    चमक में कैसे होता है बदलाव

    'साइंस मैगजीन' में इस रिपोर्ट को लिखने वाले मुख्य लेखक टिमो रेनहोल्ड हैं, जो जर्मनी के 'मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट फॉर सोलर सिस्टम रिसर्च' के एक बड़े खगोलशास्त्री हैं। टिमो रेनहोल्ड ने बताया, 'किसी तारे की चमक में यह बदलाव उसकी सतह पर मौजूद काले धब्बों (स्पॉट्स) के कारण होता है, जो उसके घूमने की वजह से बनते हैं। सतह पर मौजूद इन स्पॉट्स की संख्या से ही सौर गतिविधि का सीधा पता चलता है। हमारे सूर्य के समान पैरामीटर वाले इन तारों की चमक का 5 गुना ज्यादा परिवर्तनशील होना काफी आश्चर्यजनक है।'

    रिसर्च में शामिल था पिछले 400 साल का डेटा

    रिसर्च में शामिल था पिछले 400 साल का डेटा

    आपको बता दें कि सूर्य, जो मुख्य तौर पर हाइड्रोजन और हीलियम से बना है, एक औसत आकार का तारा है और इसका जन्म 4.5 अरब साल से भी पहले का है। हमारा सूर्य लगभग 1.4 मिलियन किलोमीटर के दायरे में फैला हुआ है और इसकी सतह का तापमान 5,500 डिग्री सेल्सियस है। अपनी रिसर्च में वैज्ञानिकों ने सूर्य की गतिविधि के पुराने रिकॉर्ड की तुलना इसके समान पैरामीटर वाले तारों के साइंटिफिक डेटा के साथ की। सूर्य की गतिविधि के इस रिकॉर्ड में सनस्पॉट का करीब 400 साल का डेटा शामिल था। इन रिकॉर्ड्स से वैज्ञानिकों को पता चला कि सूर्य अब तुलनात्मक रूप से अधिक सक्रिय नहीं रहा है।

    पृथ्वी पर पड़ेगा क्या असर

    पृथ्वी पर पड़ेगा क्या असर

    अपनी रिसर्च में वैज्ञानिकों ने बताया कि सनस्पॉट के कारण इससे संबंधित चुंबकीय गतिविधि बढ़ी है, जो पृथ्वी को प्रभावित करने वाली विद्युत चुंबकीय घटनाओं को जन्म दे सकती है। उदाहरण के तौर पर, सूर्य के वायुमंडल के बाहरी क्षेत्रों से प्लाज्मा की बड़ी रिलीज, जो आवेशित कणों का एक संग्रह है, उपग्रहों और संचार के दूसरे उपकरणों के लिए समस्या पैदा कर सकता है। इनके अलावा दूसरी विद्युत चुंबकीय गतिविधियां भी कई समस्याओं का कारण बन सकती हैं। हालांकि अन्य तारों की अपेक्षा सूर्य में बदलाव ना होना पृथ्वी पर जीवन के लिए एक अच्छी खबर हो सकती है।

    'एक बोरिंग तारे के साथ रहना बुरा विकल्प नहीं'

    'एक बोरिंग तारे के साथ रहना बुरा विकल्प नहीं'

    इस बारे में ज्यादा जानकारी देते हुए टिमो रेनहोल्ड ने बताया, 'सूर्य का बहुत ज्यादा सक्रिय होना पृथ्वी के भूविज्ञान और इसकी पुरातन जलवायु पर ज्यादा असर डाल सकता है। एक 'बहुत ज्यादा सक्रिय' तारा निश्चित रूप से ग्रह पर जीवन के लिए परिस्थितियों को बदल देगा, इसलिए किसी बहुत बोरिंग (उबाऊ) तारे के साथ रहना बुरा विकल्प नहीं है। इस रिसर्च में इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता कि संभव है कि सूर्य अभी एक शांत अवधि में हो और भविष्य में इसमें ज्यादा परिवर्तनशीलता देखने को मिले।' हालांकि, शोधकर्ताओं का कहना है कि इस बात के कोई संकेत नहीं हैं कि सौर गतिविधि किसी भी समय एकदम से बढ़ जाएगी।

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    English summary
    Research Reveals, Sun Activity Decreased By 5 Times Compared To Other Stars.
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