तालिबान के ‘दोस्तों’ की पड़ताल के लिए अमेरिका में बिल पेश, पाकिस्तान को आया ग़ुस्सा
अफ़ग़ानिस्तान में अमेरिका के आतंकवाद निरोधी अभियान और उसकी जवाबदेही को लेकर अमेरिकी सीनेट में रिपब्लिकन पार्टी के 22 सीनेटर्स ने एक विधेयक पेश किया है.

सीनेट जिम रीश की अध्यक्षता में 'अफ़ग़ानिस्तान आतंकवाद निरोधी, निगरानी और जवाबदेही अधिनियम' पेश किया गया है.
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जिम रीश सीनेट फ़ॉरेन रिलेशंस कमिटी के रैंकिंग मेंबर हैं जो इस विधेयक को लेकर आए हैं.
https://twitter.com/SenateForeign/status/1442596359425564679
एक ओर जहाँ यह विधेयक बाइडन प्रशासन से अफ़ग़ानिस्तान से अमेरिकी फ़ौज को तेज़ी से निकालने के फ़ैसले का जवाब मांग रहा है. वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान की अफ़ग़ानिस्तान में भूमिका की भी जांच कराना चाहता है.
इस बिल में मांग की गई है कि अफ़ग़ानिस्तान के तालिबान में नियंत्रण से पहले और बाद में पाकिस्तान की भूमिका की जांच होनी चाहिए. इसके साथ ही पंजशीर घाटी में तालिबान के हमले को लेकर भी पाकिस्तान की जांच करने की मांग की गई है.
पाकिस्तान ने इस विधेयक पर कड़ी नाराज़गी ज़ाहिर की है. पाकिस्तान की मानवाधिकार मंत्री शिरीन मज़ारी ने कहा है कि पाकिस्तान को एक बार फिर 'आतंक के ख़िलाफ़ युद्ध' में अमेरिका का साथ देने की क़ीमत चुकानी होगी.
विधेयक में और क्या मांग की गई
प्रस्तावित विधेयक में मांग की गई है कि अफ़ग़ानिस्तान में अमेरिका के 20 साल लंबे अभियान के दौरान तालिबान का किसने समर्थन किया, अगस्त के मध्य में काबुल पर नियंत्रण करने में किसने मदद की और पंजशीर घाटी में हमला करने पर किसने समर्थन किया - इस पर एक विस्तृत रिपोर्ट पेश की जानी चाहिए.
प्रस्तावित विधेयक में विदेश मंत्री से मांग की गई है कि उनकी निगरानी में रक्षा मंत्री और नेशनल इंटेलिजेंस सब साथ मिलकर इस पर विस्तृत रिपोर्ट दें.
साथ ही यह भी मांग की गई है कि यह रिपोर्ट संबंधित समितियों के पास तक 'इस विधेयक के क़ानून बनने के कम से कम 180 दिनों तक और अधिकतम एक साल के अंदर तक पहुंच जानी चाहिए.'
इसमें वो पहली रिपोर्ट शामिल करने के लिए कहा गया है जो कि पाकिस्तान सरकार समेत स्टेट और नॉन स्टेट एक्टर्स के समर्थन का आंकलन करे जिसने 2001 से 2020 के बीच तालिबान को समर्थन दिया है.
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इस समर्थन में वित्तीय सहायता, ख़ुफ़िया सहायता, रसद और चिकित्सा सहायता, प्रशिक्षण, उपकरण, और सामरिक, संचालन या रणनीतिक दिशा जैसे बिंदुओं को शामिल किया गया है.
इसके साथ ही विधेयक में पंजशीर घाटी में तालिबान और उसके विरोधी गुट के बीच सितंबर 2021 में हुए संघर्ष में पाकिस्तान सरकार समेत उन स्टेट और नॉन-स्टेट एक्टर्स की भूमिका का आंकलन करने को कहा गया है जिसने तालिबान का समर्थन किया.
सीनेटर रीश ने अपने दफ़्तर से जारी बयान में कहा, "हम अफ़ग़ानिस्तान से बाइडन प्रशासन के बेढंग तरीक़े से वापसी के गंभीर प्रभावों को देख रहे हैं."
"हम अमेरिका के ख़िलाफ़ एक नए आतंकी ख़तरे का सामना कर रहे हैं और तालिबान ग़लत तरीक़े से संयुक्त राष्ट्र में मान्यता चाहते हैं. यहां तक कि वे अफ़ग़ान महिलाओं और लड़कियों के अधिकारों को दबा रहे हैं."
सीनेटर रीश ने कहा कि वो इस विधेयक को पेश करके गर्व महसूस कर रहे हैं जो अमेरिका की साख़ को दोबारा बनाने को लेकर बेहद ज़रूरी है.
उन्होंने कहा, "मुझे उम्मीद है कि कमिटी इसको जल्द देखेगी ताकि हम उनकी तुरंत मदद कर सकें जो पीछे छूट गए हैं और देर होने से पहले अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा हितों की सुरक्षा कर सकें."
प्रस्तावित विधेयक में अफ़ग़ानिस्तान में आतंकवाद, नशा तस्करी और मानवाधिकार उल्लंघनों को लेकर तालिबान और दूसरी इकाइयों पर प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है. इसमें तालिबान को समर्थन देने वाली विदेशी सरकारों पर भी प्रतिबंध लगाने को कहा गया है.
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पाकिस्तान ने जताई नाराज़गी
इस विधेयक पर पाकिस्तान की मानवाधिकार मंत्री शिरीन मज़ारी ने नाराज़गी ज़ाहिर करते हुए कहा है कि पाकिस्तान को 'आतंक के ख़िलाफ़ लड़ाई' में एक बार फिर अमेरिका का साथी बनने की भारी क़ीमत चुकानी पड़ेगी.
उन्होंने इसको लेकर कई ट्वीट किए हैं. एक ट्वीट में उन्होंने लिखा है, "20 सालों तक अमेरिका और नेटो शक्तिशाली आर्थिक और सैन्य रूप से मौजूद रहा अब जब बिना स्थाई शासन संरचना के वो अराजकता छोड़ गया है तो पाकिस्तान को इस नाकामी के लिए बलि का बकरा बनाया जा रहा है."
https://twitter.com/ShireenMazari1/status/1442853185748709388
अगले ट्वीट में मज़ारी ने कहा, "यह कभी भी हमारा युद्ध नहीं था. हमने 80,000 जानें गंवाईं, एक बर्बाद अर्थव्यवस्था पाई, हमारे अमेरिकी 'साथियों' ने 450 से अधिक ड्रोन हमले किए और हमारे आदिवासी क्षेत्रों और लोगों पर इन हमलों के विनाशकारी परिणाम सामने आए."
साथ ही उन्होंने अमेरिकी सीनेट से 'गंभीर आत्मनिरीक्षण' करने को कहा है.
पाकिस्तान की मानवाधिकार मंत्री ने एक और ट्वीट में कहा, "अब बहुत हो चुका. यह समय है कि अफ़ग़ानिस्तान में रहीं उन ताक़तों को अपनी नाकामियों को देखना चाहिए न कि पाकिस्तान को निशाना बनाना चाहिए जिसने एक सहयोगी होने पर भारी क़ीमत चुकाई है और युद्ध के दुष्परिणामों से पीड़ित रहा है जो कि उसका कभी था ही नहीं."
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