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कोरोना वायरस, वैक्सीन और खून के थक्कों पर आई ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की पहली रिपोर्ट, उठे चिंताजनक सवाल

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लंदन, अप्रैल 16: कोरोनो वायरस की वजह से शरीर में खून के थक्के बनने की आशंका, वैक्सीन लेने के बाद बनने वाले खून के थक्के बनने के संभावना से कम है। यानि, इंसानों के शरीर में कोरोना वायरस की वजह से खून के थक्के ज्यादा बन रहे हैं, और वैक्सीन लेने के बाद कोरोना वायरस की वजह से खून के थक्के बनने की सभावना कम हो जाती है। लेकिन, रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि कोरोना वायरस संक्रमण के खिलाफ लगने वाली वैक्सीन की वजह से इंसानी शरीर में बनने वाला खून का थक्का कोरोना वायरस से भी ज्यादा खतरनाक है। लंदन में ऑक्सफोर्ड वैज्ञानिकों द्वारा की गई रिसर्च के मुताबिक कोरोना वायरस वैक्सीन लेने के बाद किसी इंसान में बनने वाला खून का थक्का साधारण परिस्थितियों में कोविड पॉजिटिव किसी इंसान में बनने वाले खून के थक्के बनने की संभावना कई गुना ज्यादा बढ़ जाता है। रिपोर्ट के मुताबिक कोरोना वायरस से खून के थक्के बनने की संभावना सौ गुना ज्यादा है, जबकि वैक्सीन लेने के बाद खून के थक्के बनने की संभावना सिर्फ 10 गुना ज्यादा है।

खतरनाक है खून का थक्का

खतरनाक है खून का थक्का

गुरुवार को ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में वैत्रानिकों द्वारा पब्लिश की गई रिसर्च रिपोर्ट में बताया गया है कि वैक्सीन लेने के बाद किसी इंसान में जो खून का थक्का बन रहा है, वो साधारण नहीं है, बल्कि ये काफी खतरनाक साबित हो रहा है। रिसर्च के मुताबिक इस असाधारण खून के धक्के को Venous Thrombos thrombosis यानि सीवीटी कहा जाता है। ये कोरोना वायरस से संक्रमित इंसानों में काफी ज्यादा बनने लगा है, खासकर 30 साल उम्र वाले युवाओं में 30 फीसदी ज्यादा खून का थक्का बन रहा है। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट के मुताबिक कोरोना वायरस वैक्सीन लेने के बाद खून का थक्का बनने की संभावना 8 से 10 गुना ज्यादा ज्यादा है। दरअसल, एस्ट्राजेनेका वैक्सीन को लेकर खून का थक्का बनने के बाद ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी ने इसको लेकर रिसर्च किया है, जिसमें वैज्ञानिकों को कई बातें पता चली हैं।

खून के थक्के पर रिसर्च जारी

खून के थक्के पर रिसर्च जारी

दरअसल, एस्ट्राजेनेका वैक्सीन की खुराक लेने के बाद कई रिपोर्ट्स ऐसी आई हैं, जिसमें कहा गया है कि वैक्सीन लेने के बाद भी कई लोगों के शरीर में खून का थक्का बन रहा है, जिसके बाद ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी इस मामले को लेकर काफी गहरा रिसर्च कर रहा है। हालांकि, एस्ट्राजेनेका वैक्सीन को फिलहाल मेकिडल वर्ल्ड ने लोगों के लिए सुरक्षित बताया है। डॉक्टर्स और वैज्ञानिकों ने करीब 5 लाख से ज्यादा कोरोना पॉजिटिव हो चुके और वैक्सीन ले चुके लोगों को लेकर स्टडी की है, जिसमें वैक्सीन लेने के बाद 2 हफ्ते में इंसानों के शरीर में वैक्सीन का क्या असर होता है, इसको लेकर रिसर्च की गई है। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटीके प्रोफेसर और ट्रांसलेशन न्यूरोबॉयोलॉजी ग्रुप के सह-लेखक पॉल हैरिसन ने कहा है कि ‘कोरोना वैक्सीन की वजह से खून के थक्के बनने की बात काफी चिंताजनक है, लेकिन एक सवाल अभी भी बना हुआ है कि कोरोना संक्रमण से ठीक हो चुके लोगों में खून के थक्के बनने से कितना खतरा है और ये थक्का आखिर क्यों बन रहा है?'

रिसर्च में क्या निकला?

रिसर्च में क्या निकला?

प्रोफेसर पॉल हैरिसन ने कहा है कि ‘अगर हम कोरोना वायरस वैक्सीन से होने वाले लाभ और हानि की बात करें तो अभी तक की रिसर्च में हम दो तथ्यों तक पहुंचे हैं। पहली बात ये कि कोरोना वायरस की वजह से भी खून का थक्के बन रहा है, दूसरी बात ये कि कोरोना वायरस वैक्सीन लेने के बाद कोरोना होने का खतरा और ज्यादा बढ़ रहा है और ये खतरा 30 साल की उम्र से कम लोगों में भी बढ़ गया है। जिसको लेकर बेहद ध्यान देने की जरूरत है'। पिछले दो हफ्तों में ऑक्सफोर्ड मेडिकल कॉलेज के डॉ. पॉल हैरिसन और उनकी टीम ने पाया है कि खून के थक्के वाले मरीजों की तादाद काफी ज्यादा बढ़ गई है, जिसको लेकर अब रिसर्च किया जा रहा है कि आखिर वैक्सीन लेने के बाद खून के थक्के बनने का खतरा ज्यादा हो गया है या फिर ये थक्के कोरोना वायरस से ही बन रहे हैं।

किस वैक्सीन से कितना खतरा?

किस वैक्सीन से कितना खतरा?

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने अलग अलग वैक्सीन लेने के बाद बनने वाले खून के थक्कों को लेकर रिसर्च की है। इस रिसर्च में 5 लाख से ज्यादा मरीजों के सैंपल की जांच की गई है। जिसमें पाया गया है कि 10 लाख लोगों में वैक्सीन लेने के बाद 39 लोगों में खून के थक्के बन रहे हैं। वहीं, फाइजर की एमआरएनए वैक्सीन लेने के बाद हर 10 लाख लोगों में 4 लोगों में खून का थक्का बन रहा है, वहीं ऑक्सफोर्ड एस्ट्राजेनेका वैक्सीन की पहली खुराक लेने के बाद हर 10 लाख लोगों में 5 लोगों में खून का थक्का बन रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक फाइजर की एमआरएनए वैक्सीन लेने के बाद कोरोना वायरस से थक्का बनने का खतरा करीब 10 गुना ज्यादा बढ़ जाता है, वहीं ऑक्सफोर् एस्ट्राजेनेका वैक्सीन लेने के बाद कोरोना वायरस की वजह से बनने वाला खून का थक्का बनने का खतरा करीब 8 गुना ज्यादा बढ़ जाता है।

स्‍टडी में किया गया दावा: दूसरी खुराक के छह महीने बाद Moderna की कोरोना वैक्‍सीन 90% प्रभावीस्‍टडी में किया गया दावा: दूसरी खुराक के छह महीने बाद Moderna की कोरोना वैक्‍सीन 90% प्रभावी

English summary
The possibility of blood clots from the corona virus is more than likely the blood clots that form after taking the vaccine.
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