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रमज़ान पर टीवी शो ने पार की मज़ाक की हदें, लेखक से ज़बरदस्ती बुलवाया 'अल्लाह-ओ-अकबर'

By नसरीन कमाल - बीबीसी मॉनिटरिंग

रमज़ान के महीने में उत्तरी अफ़्रीकी टीवी चैनल की ओर से किए जा रहे 'प्रैंक' विवादों में आ गए हैं. सीमाएं लांघने के लिए इनकी आलोचना की जा रही है.

अल्जीरिया में हाल ही में एक कार्यक्रम में एक कम्युनिस्ट लेखक को यह कहकर मूर्ख बनाया गया कि उन्हें नास्तिकता और जासूसी के आरोप में गिरफ़्तार किया जा रहा है.

75 साल के रशीद बूजेद्रा को फ़र्ज़ी पुलिस अफ़सरों ने 'अल्लाह-ओ-अकबर' और इस्लामी विश्वास की दो गवाहियां बोलने पर मजबूर किया.

कार्यक्रम 'वी गॉट यू' को बाद में ज़बरदस्त आलोचना के बाद उसका प्रसारण रोक दिया गया.

इस्लाम के पवित्र माने जाने वाले इस महीने में शाम को इफ़्तार के दौरान रोज़ादारों को आकर्षित करने के लिए ख़ास कार्यक्रम बनाए जा रहे हैं. इस बीच 'प्रैंक कार्यक्रमों' की लोकप्रियता तेज़ी से बढ़ी है, लेकिन हदें पार करने के लिए उनकी आलोचना भी हुई है.

फ़र्ज़ी चरमपंथी हमला

मिस्र के अभिनेता रमेज़ गलाल ने प्रैंक करने में माहिर एक बड़े टीवी चेहरे के तौर पर ख़ुद को स्थापित किया है.

उन्होंने कुछ हस्तियों को ये कहते हुए मूर्ख बनाया कि वे सब एक डूबते जहाज़ पर सवार हैं, जिसके आस-पास शरीर के कटे अंग तैर रहे हैं और एक शार्क उस ओर बढ़ रही है.

एक और शो में, पीड़ितों को 'मिस्र के एक प्राचीन मकबरे' में बंद कर दिया गया, जिसमें चमगादड़ और कीड़े थे और जहां एक मुर्दा उठकर चलने लगा.

2013 में रमेज़ के ही कार्यक्रम 'द फॉक्स ऑफ द डेज़र्ट' में, कुछ हस्तियों को यक़ीन दिला दिया गया कि वे जिस बस में सफ़र कर रहे हैं, उस पर चरमपंथियों ने कब्ज़ा कर लिया है.

पढ़ें: रमज़ान में फ़ातिमा की बिकनी फ़ोटो पर बवाल

फ़र्ज़ी चरमपंथियों ने ड्राइवर की गोली मारकर हत्या करने का ढोंग किया और बाकी लोगों के हाथ बांधकर उनकी आंखों पर पट्टी बांध दी.

ये एपिसोड ऐसे समय में प्रसारित किया गया था जब मिस्र में चरमपंथी घटनाएं तेज़ी से बढ़ रही थीं.

जबकि रमेज़ गलाल इस विवाद का लुत्फ़ लेते रहे. अपने शो के ट्रेलर में उन्होंने स्वीकार किया कि उन्होंने अपने दोस्तों और साथी एक्टरों को 'टॉर्चर' किया क्योंकि वह उनसे प्यार करते हैं.

यह भी हो सकता है कि सिर्फ़ दर्शकों को मूर्ख बनाया गया हो. पैनी निगाह वाले कुछ दर्शक ऐसे सबूतों की ओर इशारा करते हैं जिनके मुताबिक, हस्तियां भी ऐसे प्रैंक में शामिल होती हैं. कुछ हस्तियों ने इसकी पुष्टि भी की है.

पढ़ें: रहमतों का महीना है रमज़ान

बुज़ुर्ग से भूकंप का मज़ाक

ट्यूनिशिया का 'द अर्थक्वेक' कार्यक्रम भी विवादों में रहा है, जिसमें मेहमानों को यह बताकर मूर्ख बनाया जाता है कि वह भूकंप के तेज़ झटकों का सामना कर रहे हैं.

एक एपिसोड में एक बुज़ुर्ग धार्मिक नेता ने 'भूकंप' के बावजूद प्रार्थना जारी रखने पर ज़ोर दिया. मेहमानों की उम्र और सेहत का ख़्याल न रखते हुए उन्हें डराने के लिए इस शो की सोशल मीडिया पर ख़ूब आलोचना हुई.

अल्जीरिया के शो 'वी गॉट यू' पर भी ऐसे आरोप लगे. लेखक बूजेद्रा के एपिसोड के बाद एक अल्जीरियाई लेखक ने कहा, 'यक़ीन नहीं होता कि एक मशहूर लेखक को उनकी उम्र और शोहरत की परवाह किए बना इस तरह मज़ाक का पात्र बनाया गया.'

क्षेत्र की धार्मिक नेताओं ने हाल ही में लोगों को किसी भी मक़सद से डराने के ख़िलाफ़ फ़तवे जारी किए हैं.

रमज़ान के महीने में ऐसे कार्यक्रमों की संख्या बढ़ाने को धार्मिक प्रतिबद्धता से भटकाव के तौर पर भी देखा जा रहा है और इसलिए भी इसकी आलोचना की जा रही है.

पढ़ें: रमज़ान या रमदान!

रेटिंग की होड़

मिस्र के मीडिया जानकार यासिर अब्द-अल-अज़ीज़ ने बीबीसी को बताया कि टीवी प्रैंक्स वाले कार्यक्रमों के बढ़ने से प्रोडक्शन कंपनियां दर्शकों को रिझाने और विज्ञापनों को आकर्षित करने के लिए अपनी हदें बढ़ाने पर मजबूर हो रही हैं.

लेकिन एक लोकप्रिय शो 'द शॉक' इस नई प्रवृत्ति के उलट, डराने वाले प्रैंक्स के बजाय अब भी पारंपरिक प्रैंक्स दिखा रहा है.

इफ़्तार
Getty Images
इफ़्तार

यह शो कुछ अरब देशों में प्रसारित किया जाता है, जिसमें फ़र्ज़ी स्थितियों में पति का पत्नी को डांटना, शिक्षक का अपमान करता छात्र या ठंड में ठिठुरता, राहगीरों से कोट मांगने वाला बेसहारा बच्चा जैसे प्रैंक दिखाए जाते हैं.

इस शो को लोग पसंद कर रहे हैं. वे देख पाए कि रोज़मर्रा की इन नाटकीय स्थितियों पर अजनबी कैसी प्रतिक्रिया देते हैं.

ट्विटर यूज़र नूर-उलदीन लिखते हैं, 'ये फ़र्ज़ी होने के बावजूद, 'द शॉक' आपमें इंसान को जगाता है और अपने नज़रिये पर दोबारा सोचने पर मजबूर करता है.'

BBC Hindi
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English summary
From shipwrecks to terror attacks to an air disaster involving Paris Hilton, it seems that almost nothing is off-limits for the prank shows that have become a staple of North African TV during the Islamic fasting month of Ramadan.
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