भारत छोड़ो: एक नायक जो खलनायक बन गया
भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान 1942 में कांग्रेस रेडियो कुल अस्सी दिन चल पाया. मध्य अगस्त से क़रीब मध्य नवंबर तक.
इस अवधि में उसने देश को संघर्ष के कई नायक दिए. लेकिन नरीमन अबराबाद प्रिंटर का क़िस्सा कुछ और था. अगर यह अस्सी दिन सलीक़े से गुज़र गए होते तो वह कांग्रेस रेडियो का सबसे बड़ा नायक होता, खलनायक नहीं.
नौ अगस्त, 1942 को प्रिंटर ने न केवल कांग्रेस रेडियो का ट्रांसमीटर बनाया बल्कि एक पारसी महिला के साथ मिलकर उसका पहला प्रसारण भी किया. तकनीकी रूप से दक्ष प्रिंटर को कांग्रेस रेडियो के प्रयोग की ज़रूरत और संभावनाएं अच्छी तरह पता थीं. उसकी नज़र, यक़ीनन, संभावनाओं पर अधिक थी.
ख़ुफ़िया कांग्रेस रेडियो की अनकही दास्तान
पाकिस्तान में हिन्दुओं को लेकर क्या सोचते थे जिन्ना?
कांग्रेस रेडियो
लेकिन अवैध तरीक़े से रेडियो प्रसारण के ख़तरे भी थे. ख़ासकर इसलिए कि उस समय दूसरा विश्वयुद्ध चल रहा था. प्रिंटर इससे भी वाकिफ़ था.
अंग्रेज़ हुक्मरानों को आशंका थी कि कांग्रेस रेडियो के पीछे 'पंचमांगी' (फ़िफ्थ कॉलमिस्ट) ताक़तों का हाथ हो सकता है. उनका मानना था कि पांच दिन में रेडियो बनाकर चला देना जर्मन या जापानी तकनीकी सहयोग के बिना संभव नहीं हो सकता. जांच हुई तो यह आशंका निर्मूल पाई गई. रिपोर्ट में इसे 'शुद्ध देसी' प्रयास कहा गया.
नरीमन प्रिंटर के जीवन के शुरूआती दिनों में इस बात के संकेत मिलते हैं कि आख़िर 'शुद्ध देसी' कांग्रेस रेडियो के प्रयोग का नायक 'अजीत विला' से गिरफ़्तारी के बाद बदल कैसे गया? उषा मेहता का कहना था, 'प्रिंटर बदला नहीं, एकदम बदल गया था. पैराडाइज़ बंगले पर आख़िरी छापे के समय पुलिसवालों के साथ वह ग़द्दार भी था.'
#70YearsofPartition: क्या अंग्रेजों का अत्याचार भूल गए भारतीय?
बंटवारे की त्रासदी से जुड़ा आम आदमी का सामान
रावलपिंडी की पैदाइश
प्रिंटर और कांग्रेस रेडियो के दूसरे किरदारों की गिरफ़्तारी के बाद पुलिस ने अदालत में अपनी जांच रिपोर्ट पेश की. 'होम फ़ाइल' के दस्तावेज़ों में इन सब पात्रों का पूरा ब्योरा दर्ज है. उसी में दर्ज है प्रिंटर में आए बदलाव की कहानी.
प्रिंटर का जन्म रावलपिंडी ज़िले की मरी तहसील में हुआ था. पीर पंजाल के उस पहाड़ी क्षेत्र की आबादी अधिक नहीं थी. उद्योग-धंधे नहीं थे. सैलानियों के भरोसे जिंदगी चलती थी. प्रिंटर के अब्बू सिलाई मशीन के अच्छे मैकेनिक थे. शहर में नाम था पर पैसे इतने नहीं मिलते थे कि ज़िंदगी ठीक से बसर हो सके.
बचपन में अपने घर में प्रिंटर ने तनाव देखा था. बेहतर संभावनाओं के लिए अब्बू का लाहौर जाना उसमें शामिल था. लेकिन पिता लाहौर गए तो कभी नहीं लौटे. वहीं बस गए. प्रिंटर अम्मी के साथ मरी में रह गया. ग़रीबी के उन दिनों की छाप उस पर गहरी थी. उसने यही माना कि ज़िंदगी सांस लेने से नहीं, पैसे से चलती है.
'न भारत में, न पाकिस्तान में...'
'गुरु की मस्जिद' जिसकी रखवाली करते हैं सिख
अगला पड़ाव मुंबई
अब्बू से मदद की उम्मीद में अम्मी को मरी में छोड़कर प्रिंटर लाहौर आया. ढाई साल के संघर्ष के बाद उसने महसूस किया कि वहां रहकर वह पैसे नहीं कमा सकता. अम्मी को सुख नहीं दे सकता जिससे पिता ने उसे वंचित किया था. अब्बू रावलपिंडी लौटने को तैयार नहीं थे. लाहौर में उन्होंने अपनी दुनिया बसा ली थी.
उस दौर के किसी कल्पनाशील युवक की तरह प्रिंटर का अगला पड़ाव बंबई था. बंबई में उसने कई तरह के काम किए. पैसे कमाए और मां को मरी से बुला लिया. किराए के घर में ज़िंदगी ठीक चल रही थी पर प्रिंटर संतुष्ट नहीं था. उसकी दिलचस्पी रेडियो में बढ़ी.
प्रिंटर ने 'तन्ना रेडियो' में रिकॉर्डिंग और संगीत सीखा और वहीं से जाना कि सरकारी नियंत्रण में होने की वजह से भारत में इसका प्रशिक्षण संभव नहीं है. उसके लिए लंदन जाना होगा.
अब्दुल क़यूम ख़ान क्यों पाकिस्तान नहीं जाना चाहते?
बंटे एक साथ, पाक की आज़ादी पहले कैसे
दूसरा विश्व युद्ध
अब तक प्रिंटर के पास पैसे की क़िल्लत पहले जैसी नहीं थी. मां नहीं चाहती थी कि वह विलायत जाए पर प्रिंटर ने दोनों की बेहतरी के हवाले से उसे समझा दिया. वह अपने एक दोस्त मिर्ज़ा के साथ 1936 में लंदन चला गया. उसे 'ब्रिटानिया इंस्टीट्यूट ऑफ़ वायरलेस टेक्नोलॉजी' में दाख़िला मिल गया.
पढ़ाई पूरी करके 1937 के अंत में वह बंबई लौट आया. भायकुला इलाक़े में नया संस्थान बनाया- बॉम्बे टेक्निकल इंस्टीट्यूट. लंदन से वापसी के पहले उसने रेडियो सिखाने के लिए ट्रांसमीटर लगाने का लाइसेंस मांगा था, जो उसे मिल गया.
'बॉम्बे टेक्निकल इंस्टीट्यूट' बनने में करीब सवा साल लगा. ट्रांसमीटर लग गया. दाखिले हो गए. पढ़ाई शुरू होने को थी कि दूसरा विश्वयुद्ध हो गया. इसकी गाज बहुतों पर गिरी, प्रिंटर पर भी. ब्रितानी हुकूमत ने तमाम तरह की पाबंदियां आयद कीं. सारे रेडियो लाइसेंस ज़ब्त करना उसमें शामिल था.
क्रिकेटर जो भारत और पाक दोनों ओर से खेला
विभाजन में अलीगढ़ यूनिवर्सिटी कैसे बची?
प्रसारण की शुरुआत
स्थानीय स्तर पर पुलिस थाने से मिली चिट्ठी में लिखा था- 'रेडियो लाइसेंसधारी सभी लोग अपने ट्रांसमीटर नष्ट कर दें और उन्हें नज़दीक के थाने में जमा करा दिया जाए.'
प्रिंटर के ट्रांसमीटर से तब तक एक दिन भी प्रसारण नहीं हुआ था. सही पता लगाना मुश्किल था कि ट्रांसमीटर बना भी या नहीं. हालांकि प्रिंटर ने उसका पुकार नाम 'वी यू टू एफ़ यू' रखा था, इसी गफ़लत का फ़ायदा उठाकर उसने ट्रांसमीटर नष्ट तो किया पर थाने में जमा नहीं किया. गराज में डाल दिया.
बाबूभाई खाखड़ और विट्ठल झवेरी के कहने पर प्रिंटर ने नौ अगस्त, 1942 को यही ट्रांसमीटर गराज से निकाला. झाड़-पोंछकर ठीक किया. नए पुरज़े जोड़े. पांच दिन बाद 14 अगस्त को उसी से प्रसारण हुआ- 'यह कांग्रेस रेडियो है. 42.34 मीटर बैंड्स पर आप हमें भारत में किसी स्थान से सुन रहे हैं.'
जब सफ़िया ने सरहद पार से देखा अपना घर
मुस्लिम लड़की और हिंदू लड़के की अधूरी प्रेम कहानी
-
Gold Rate Today: सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट! ₹2990 सस्ता हुआ गोल्ड, 15 मार्च को क्या है 22K-18K का भाव -
PNG New Rule: घर में पाइपलाइन गैस और LPG दोनों हैं तो सावधान! तुरंत करें ये काम, सरकार का नया आदेश लागू -
'खुले में कपड़े बदलना, पता नहीं कौन देख रहा', बॉलीवुड की दिग्गज एक्ट्रेस का बड़ा खुलासा, झेली ऐसी परेशानी -
Silver Rate Today: ईरान जंग के बीच चांदी 11,000 सस्ती, अब इतने का मिल रहा है 100 ग्राम, फटाफट चेक करें लेटेस्ट -
'सबको माफ करते हुए जाओ,' बेड पर पड़े हरीश राणा ने आखिरी बार झपकाईं पलकें, सामने आया अंतिम विदाई का VIDEO -
Delhi Weather: मार्च की गर्मी में दिल्ली में अचानक बारिश क्यों? IMD ने बताया असली कारण, आगे कैसा रहेगा मौसम? -
भारतीय क्रिकेटर ने गुपचुप कर ली शादी, किसी को नहीं हुई कानो-कान खबर, कौन हैं खूबसूरत वाइफ? -
BAN vs PAK: पाकिस्तान-बांग्लादेश के बीच फाइनल मैच आज, बिना पैसे खर्च किए घर बैठे फ्री में देख सकेंगे LIVE -
Delhi Weather Update: दिल्ली में बरसे बादल, लोगों को मिली गर्मी से राहत, जानें अगले 24 घंटे कैसा रहेगा मौसम? -
आज का मेष राशिफल 15 मार्च 2026: अटके काम बनेंगे पर खर्चों का रखें ख्याल -
Bengal Opinion Poll 2026: बंगाल का अगला CM कौन? TMC या BJP किसको कितनी सीटें? नए ओपिनियन पोल ने बढ़ाया सस्पेंस -
Papamochani Ekadashi 2026 Effect: इन 4 राशियों की एकादशी पर चमकी किस्मत, मिलेगा सच्चा प्यार, होगा धन लाभ












Click it and Unblock the Notifications