QUAD SUMMIT: सबसे महत्वपूर्ण और जान बचाने वाला फैसला, जॉनसन एंड जॉनसन कोविड वैक्सीन बनाएगा भारत

क्वाड समिट में अमेरिका द्वारा निर्मित जॉनसन एंड जॉनसन वैक्सीन पर बड़ा फैसला लिया गया है। भारत में जॉनसन एंड जॉनसन वैक्सीन का उत्पादन किया जाएगा।

नई दिल्ली/वाशिंगटन: क्वाड समिट के दौरान कोविड-19 से लड़ने के लिए क्वाड देशों ने सामूहिक संकल्प लिया है। इसके तहत भारत में जॉनसन एंड जॉनसन वैक्सीन बनाने का फैसला लिया गया है। जॉनसन एंड जॉनसन वैक्सीन का निर्माण अमेरिका में किया गया है। जिसे अब भारत में बनाया जाएगा। आपको बता दें कि पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा वैक्सीन का उत्पादन भारत में किया जाता है। जॉनसन एंड जॉनसन वैक्सीन की खासियत ये है कि इसका सिर्फ एक खुराक ही इस्तेमाल किया जाता है। लिहाजा इसके उत्पादन से लेकर डिस्ट्रीब्यूशन में कम खर्च आता है।

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    वैक्सीन को लेकर क्वाड का संकल्प

    क्वाड की बैठक के दौरान वैक्सीन को लेकर चारों देशों ने संकल्प लिया है। जिसके तहत भारत में वैक्सीन का उत्पादन किया जाएगा जबकि जापान और अमेरिका के द्वारा वैक्सीन प्रोजेक्ट को फाइनल किया जाएगा। वहीं, ऑस्ट्रेलिया पैसिफिक देशों और साउथ इस्ट एशिया में जॉनसन एंड जॉनसन वैक्सीन का डिस्ट्रीब्यूशन करेगा। क्वाड की समिट में जॉनसन एंड जॉनसन वैक्सीन का उत्पादन और डिस्ट्रीब्यूशन पर लिया गया ये सबसे महत्वपूर्ण फैसला माना जा रहा है।

    जॉनसन एंड जॉनसन वैक्सीन की खासियत

    अमेरिका की फुड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन विभाग ने जॉनसन एंड जॉनसन वैक्सीन को इमरजेंसी इस्तेमाल को मंजूरी दी थी। और FDA के वैज्ञानिकों के मुताबिक कोरोना के मध्यम और गंभीर बीमार वाले मरीजों पर जॉनसन एंड जॉनसन वैक्सीन 66 प्रतिशत तक प्रभावी है वहीं बेहद गंभीर कोरोना संक्रमण की स्थिति में ये वैक्सीन 85 प्रतिशत तक असर दिखाती है। FDA वैज्ञानिकों के मुताबिक जॉनसन एंड जॉनसन वैक्सीन पूरी तरह से सुरक्षित है और इसकी सबसे बड़ी खासियत ये है कि लोगों को इसका एक ही खुराक देने की जरूरत होगी। वहीं, जॉनसन एंड जॉनसन कंपनी ने अमेरिकी कांग्रेस को कहा है कि कंपनी मार्च के अंत तक अमेरिका में एक करोड़ वैक्सीन उत्पादन करेगी वहीं जून तक कंपनी 10 करोड़ खुराक अमेरिकी सरकार को दे देगी और साल के अंत तक कंपनी ने एक अरब वैक्सीन डोज के उत्पादन का लक्ष्य रखा है।

    कोरोना के नये स्ट्रेन पर कारगर

    जॉनसन एंड जॉनसन वैक्सीन को लेकर सबसे बड़ा सवाल ये था कि क्या ये वैक्सीन कोरोना वायरस के अलग अलग स्ट्रेन के खिलाफ भी प्रभावी है। जिसपर कंपनी की तरफ से कहा गया है कि दक्षिण अफ्रीकी स्ट्रेन के खिलाफ जॉनसन एंड जॉनसन वैक्सीन करीब 57 फीसदी से ज्यादा प्रभावी है। हालांकि ये आंकड़ा अमेरिका के लिहाज से कम था लेकिन फिर भी FDA की तरफ से इसलिए इसे मंजूरी दी गई क्योंकि अमेरिका में 50% का मिनिमन प्रभावी आंकड़ा सरकार की तरफ से रखा गया है। इस वैक्सीन की सबसे खास बात ये है कि जहां फाइजर और मॉडर्ना वैक्सीन की दो खुराक दिए जाने की जरूरत होती है वहीं जॉनसन एंड जॉनसन वैक्सीन का बस एक खुराक ही दिए जाने की जरूरत होती है।लिहाजा जॉनसन एंड जॉनसन वैक्सीन के प्रोडक्शन और डिस्ट्रीब्यूशन पर कम भार आएगा और वैक्सीन लगवाने वालों को भी परेशान नहीं होना पड़ेगा।

    वहीं जॉनसन एंड जॉनसन वैक्सीन की दूसरी सबसे बड़ी खास बात ये है कि इसे 3 महीनों तक नॉर्मल फ्रीज टेम्परेचर पर रखा जा सकता है लिहाजा इस वैक्सीन को कम संसाधन वाले इलाकों में भी सुरक्षित रखा जा सकता है।

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