नहीं रहे संयुक्त राष्ट्र के पूर्व महासचिव और नोबेल विजेता कोफी अन्नान, जानिए उनके बारे में

नई दिल्ली। संयुक्‍त राष्‍ट्र संघ (UN) के पूर्व महासचिव कोफी अन्‍नान का शनिवार को 80 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। बीमारी की वजह से उनकी मृत्यु हुई है। इसकी जानकारी उनके परिवार और उनके फाउंडेशन की ओर से दी गई है। कोफी अन्नान 1 जनवरी 1997 से 31 दिसम्बर 2006 तक लगातार दो कार्यकाल के लिये संयुक्त राष्ट्र के महासचिव रहे। उन्‍हें उनके कार्यों के लिए साल 2001 में नोबल के शांति पुरस्‍कार से भी सम्‍मानित किया गया था। वो कोफी अन्नान फाउंडेशन के संस्थापक और चेयरमैन थे। साथ ही नेल्सन मंडेला की ओर से स्थापित एक अंतर्राष्ट्रीय संगठन 'द एल्डर' के भी चेयरमैन थे।

कोफी अन्नान का प्रारंभिक जीवन

कोफी अन्नान का प्रारंभिक जीवन

कोफी अन्नान का जन्म 8 अप्रैल 1938 में घाना के कुमासी नामक शहर में हुआ। शुरूआती शिक्षा के बाद 1957 में अन्नान फोर्ड फाउंडेशन की छात्रवृत्ति पर अमेरिका गए। वहां 1958 से 1961 तक उन्होंने मिनेसोटा राज्य के मैकलेस्टर कॉलेज में अर्थशास्त्र की पढ़ाई की। इस दौरान अन्नान ने "अंतरराष्ट्रीय संबंध" में जिनेवा के ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज से डिग्री ली। 1971-1972 में एमआईटी से मैनेजमेंट में एमएस की डिग्री प्राप्त की। अन्नान को अंग्रेजी, फ्रेंच के अलावा दूसरी अफ्रीकी भाषाओं की अच्छी जानकारी थी।

1962 में संयुक्त राष्ट्र की संस्था विश्व स्वास्थ्य संगठन से जुड़े

1962 में संयुक्त राष्ट्र की संस्था विश्व स्वास्थ्य संगठन से जुड़े

कोफी अन्नान ने 1962 में संयुक्त राष्ट्र की संस्था विश्व स्वास्थ्य संगठन के लिए एक बजट अधिकारी के रूप में काम शुरू किया। वे विश्व स्वास्थ्य संगठन के साथ 1965 तक रहे। 1965 से 1972 तक उन्होंने इथियोपिया की राजधानी अद्दीस अबाबा में संयुक्त राष्ट्र की इकॉनोमिक कमिशन फॉर अफ्रीका के लिये काम किया। वो अगस्त 1972 से मई 1974 तक जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र के लिये प्रशासनिक प्रबंधन अधिकारी के तौर पर कार्य किया। 1973 की अरब-इजराइल में युद्ध के बाद मई 1974 से नवंबर 1974 तक वो मिस्र में शांति अभियान में संयुक्त राष्ट्र की ओर से कार्यरत असैनिक कर्मचारियों के मुख्य अधिकारी (चीफ पर्सनल ऑफिसर) के पद पर कार्य किया। उसके बाद उन्होंने संयुक्त राष्ट्र छोड़ दिया और घाना लौट गए। 1974 से 1976 तक वह घाना में पर्यटन के निदेशक के रूप में काम किया।

दो कार्यकाल के लिये संयुक्त राष्ट्र के महासचिव रहे

दो कार्यकाल के लिये संयुक्त राष्ट्र के महासचिव रहे

1976 में अन्नान संयुक्त राष्ट्र में कार्य करने के लिए जिनेवा लौटे। 1980 में संयुक्त राष्ट्र के शरणार्थी उच्चायोग के उपनिदेशक नियुक्त हुए। 1984 में वह संयुक्त राष्ट्र के बजट विभाग के अध्यक्ष के रूप में न्यूयॉर्क वापस आ गए थे। 1987 में उन्हें संयुक्त राष्ट्र के मानव संसाधन विभाग और 1990 में बजट एवं योजना विभाग का सहायक महासचिव नियुक्त किया गया। मार्च 1992 से फरवरी 1993 तक वो शांति अभियानों के सहायक महासचिव रहे। मार्च 1993 में उन्हें संयुक्त राष्ट्र का अवर महासचिव नियुक्त किया गया और दिसम्बर 1996 तक इस पद पर कार्यरत रहे।

2001 में दिया गया नोबल का शांति पुरस्‍कार

2001 में दिया गया नोबल का शांति पुरस्‍कार

कोफी अन्नान 1 जनवरी 1997 से 31 दिसम्बर 2006 तक लगातार दो कार्यकाल के लिये संयुक्त राष्ट्र के महासचिव रहे। उन्होंने 1997 में संयुक्त राष्ट्र के विभिन्न संगठनों में सामंजस्य बढ़ाने के लिये संयुक्त राष्ट्र विकास समूह की स्थापना की। उन्‍हें उनके कार्यों के लिए साल 2001 में नोबल के शांति पुरस्‍कार से भी सम्‍मानित किया गया था। वो समय-समय पर विभिन्न मुद्दों को उठाते रहे। संयुक्त राष्ट्र के पूर्व महासचिव कोफी अन्नान ने सीरिया संकट का राजनीतिक समाधान निकालने के साल 2012 में राष्ट्रपति बशर अल-असद से मुलाकात की थी। अक्टूबर 2017 में उन्होंने रोहिंग्या मुस्लिम शरणार्थियों को लेकर आवाज बुलंद की। उन्होंने म्यांमार से कहा था कि वह पिछले दो महीने से घर छोड़ने वाले लगभग पांच लाख सुरक्षा के साथ उनकी घर वापसी की व्यवस्था सुनिश्चित करे ताकि वे शिविरों में नहीं जायें। शरणार्थी संकट पर एक आयोग की अध्यक्षता करने वाले कोफी अन्नान ने कहा कि म्यांमार सरकार को ऐसी स्थिति बनानी चाहिए जिससे शरणार्थी गरिमा और सुरक्षा की भावना के साथ अपने घरों को लौट सकें।

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