भारत बोस्टन और लॉस एंजिल्स में नए वाणिज्य दूतावास खोलेगा: प्रधानमंत्री मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा की है कि भारत अमेरिका के दो प्रमुख शहरों, बोस्टन और लॉस एंजिल्स, में नए वाणिज्य दूतावास खोलेगा। यह कदम वहां बढ़ते भारतीय-अमेरिकी समुदाय की पुरानी मांग को पूरा करने के लिए उठाया गया है।
बोस्टन को अमेरिका की शिक्षा और फार्मा राजधानी माना जाता है, जबकि लॉस एंजिल्स हॉलीवुड का घर है और आगामी ग्रीष्मकालीन ओलंपिक की मेजबानी भी करेगा। लॉस एंजिल्स के पूर्व मेयर एरिक गार्सेटी वर्तमान में भारत में अमेरिकी राजदूत हैं।

पीएम मोदी की घोषणा
न्यूयॉर्क के नासाउ वेटरन्स कोलिज़ीयम में भारतीय अमेरिकियों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "पिछले साल मैंने सिएटल में एक नया वाणिज्य दूतावास खोलने की घोषणा की थी, जो अब काम करना शुरू कर चुका है। मैंने आप सभी से सुझाव मांगे थे, और आपके सुझावों की समीक्षा के बाद, हमने बोस्टन और लॉस एंजिल्स में वाणिज्य दूतावास खोलने का फैसला किया है।"
भारत के अन्य वाणिज्य दूतावास
वर्तमान में, भारत के न्यूयॉर्क, अटलांटा, शिकागो, ह्यूस्टन, सैन फ्रांसिस्को और सिएटल में वाणिज्य दूतावास हैं। इसके अलावा, भारत का दूतावास वाशिंगटन डीसी में स्थित है और संयुक्त राष्ट्र में भारत का स्थायी मिशन न्यूयॉर्क शहर में है।
लॉस एंजिल्स के निवासियों की प्रतिक्रिया
लॉस एंजिल्स के निवासियों ने इस घोषणा का स्वागत किया। वहां के प्रमुख भारतीय-अमेरिकी व्यापारियों और नेताओं ने प्रधानमंत्री मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर के प्रति आभार जताया। लॉस एंजिल्स स्थित कंसल्टिंग फर्म Amritt Inc. के CEO गुंजन बागला, जिन्होंने इस प्रयास का नेतृत्व किया था, ने कहा, "हमने इस मुद्दे पर 3,600 से अधिक हस्ताक्षर एकत्र किए और प्रधानमंत्री कार्यालय को पत्र भेजे।"
बागला ने यह भी बताया कि लॉस एंजिल्स और लॉन्ग बीच के बंदरगाह अमेरिका के लगभग 40% विदेशी व्यापार को संभालते हैं, और एक स्थानीय महावाणिज्यदूत की उपस्थिति से व्यापार और सांस्कृतिक संबंध और मजबूत होंगे। उन्होंने यह भी कहा कि इससे उन भारतीय अमेरिकियों को भी राहत मिलेगी, जिन्हें भारत की आपातकालीन यात्रा के लिए सैन फ्रांसिस्को नहीं जाना पड़ेगा।
प्रधानमंत्री मोदी की यह घोषणा भारतीय-अमेरिकी समुदाय और अमेरिकी व्यापार जगत के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे दोनों देशों के बीच व्यापार और सांस्कृतिक संबंधों में मजबूती आएगी, और भारतीय प्रवासियों की समस्याओं का समाधान आसान होगा।












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