157 खास उपहार और ऐतिहासिक उपलब्धियों के साथ पीएम मोदी लौटे देश...जानिए क्या हुआ हासिल?

पीएम मोदी के अमेरिका दौरे को बेहद खास अंदाज में डिजाइन किया गया था। कंपनियों के सीईओ, अमेरिका की उपराष्ट्रति से मुलाकात, राष्ट्रपति बाइडेन से मुलाकात, क्वाड की मीटिंग और फिर UNGA में संबोधन...

वॉशिंगटन, सितंबर 26: भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का तीन दिनों का ऐतिहासिक अमेरिका दौरा खत्म हो गया है और तीन दिवसीय यात्रा खत्म कर पीएम मोदी वापस भारत आ गये हैं। पीएम मोदी ने अमेरिका यात्रा खत्म करते समय अपने दौरे को भारत-अमेरिका संबंधों के लिए 'उत्पादक द्विपक्षीय और बहुपक्षीय जुड़ाव' कहा है। पीएम मोदी ने विश्वास जताया है कि भारत और अमेरिका के बीच संबंध और ज्यादा मजबूत होंगे।

कैसा रहा मोदी का अमेरिका दौरा?

कैसा रहा मोदी का अमेरिका दौरा?

पीएम मोदी ने अमेरिका के पांच टॉप कंपनियों के सीईओ से मुलाकात की है, जिसमें सबसे अहम था हथियार बनाने वाली कंपनी जनरल एटॉमिक्स के सीईओ से मिलना। सूत्रों के मुताबिक, खबर है कि अमेरिकी सरकार के इशारे के बाद ही जनरल एटॉमिक्स कंपनी के सीईओ ने पीएम मोदी से मुलाकात की है और बताया जा रहा है कि ये कंपनी भारत की डिफेंस कंपनी के साथ मिलकर भारत में ड्रोन का निर्माण कर सकती है। ये ड्रोन अमेरिकी टेक्नोलॉजी पर आधारित काफी उन्नत टेक्नोलॉजी की ड्रोन होगी, जिसका निशाना 'पिन प्वाइंट' होता है। इसके अलावा ब्लैकस्टोन कंपनी के सीईओ से मुलाकात भी काफी अहम मानी जा रही है। ब्लैकस्टोन कंपनी विदेशों में निवेश करने के लिए जानी जाती है और अगर ये कंपनी भारत में निवेश करती है, तो इससे भारत को काफी ज्यादा फायदा होगा। लिहाजा बिजनेस के पैमाने पर पीएम मोदी का ये दौरा सफल माना जाएगा।

द्विपक्षीय और बहुपक्षीय संबंध

द्विपक्षीय और बहुपक्षीय संबंध

अमेरिका दौरे के दौरान पीएम मोदी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 76वें सत्र को संबोधित किया, पहली व्यक्तिगत क्वाड शिखर बैठक में भाग लिया और अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन, अमेरिकी उपराष्ट्रपति कमला हैरिस और उनके ऑस्ट्रेलियाई और जापानी समकक्षों-स्कॉट मॉरिसन और योशिहिदे सुगा के साथ द्विपक्षीय और बहुपक्षीय बातचीत की है। इन मुलाकातों को अगर कूटनीतिक कसौटियों पर देखें, तो भारत के लिए ये काफी अहम साबित होने वाला है। चीन और ऑस्ट्रेलिया के बीच का तनाव काफी ज्यादा बढ़ चुका है और इंडो-पैसिफिक में भारत और ऑस्ट्रेलिया की दोस्ती भारत के लिए काफी फायदेमंद साबित होने वाली है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा कि प्रधान मंत्री की अमेरिकी यात्रा "ऐतिहासिक" थी।

व्यापार क्षेत्र में अहम मुलाकात

व्यापार क्षेत्र में अहम मुलाकात

कोरोनावायरस महामारी के प्रकोप के बाद से अमेरिका की अपनी पहली यात्रा के दौरान, पीएम मोदी ने गुरुवार को ड्रोन से लेकर 5G, सेमीकंडक्टर और सोलर तक के प्रमुख क्षेत्रों के पांच शीर्ष अमेरिकी कॉर्पोरेट नेताओं से मुलाकात करके अपनी व्यस्तताओं की शुरुआत की और उन्हें अपने निवेश को बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया। इन कंपनियों को पीएम मोदी ने भारत में विशाल अवसरों के बारे में बताया है। पीएम मोदी से मुलाकात करने वाले सीईओ में दो भारतीय अमेरिकी थे। एडोब के सीईओ शांतनु नारायण और जनरल एटॉमिक्स से विवेक लाल भी भारतीय अमेरिकन हैं। उन्होंने क्वालकॉम के क्रिस्टियानो ई आमोन, फर्स्ट सोलर के मार्क विडमार और ब्लैकस्टोन के स्टीफन ए श्वार्जमैन से भी मुलाकात की।

मोदी-कमला हैरिस मुलाकात

मोदी-कमला हैरिस मुलाकात

प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के साथ अपनी बहुप्रतीक्षित द्विपक्षीय बैठक से एक दिन पहले गुरुवार को व्हाइट हाउस में अमेरिकी उपराष्ट्रपति कमला हैरिस के साथ अपनी पहली व्यक्तिगत बैठक की। मोदी ने हैरिस की "प्रेरणा के स्रोत" के रूप में प्रशंसा की और उन्हें भारत आने का निमंत्रण दिया। अमेरिका की उपराष्ट्रपति बनने वाली भारतीय मूल की पहली महिला बनकर इतिहास रचने के बाद हैरिस के साथ पीएम मोदी की यह पहली व्यक्तिगत मुलाकात थी। हैरिस ने पाकिस्तान से यह सुनिश्चित करने के लिए कहा, कि वो अपनी धरती से संचालित आतंकवादी समूहों के खिलाफ कार्रवाई करे और वे संयुक्त राज्य अमेरिका और भारत दोनों की सुरक्षा को खतरा न दें। वहीं कमला हैरिस ने आतंकवाद के लिए इस्लामाबाद के समर्थन की बारीकी से निगरानी करने की आवश्यकता को रेखांकित किया।

मोदी बाइडेन मुलाकात

मोदी बाइडेन मुलाकात

शुक्रवार को प्रधान मंत्री मोदी का व्हाइट हाउस में जो बाइडेन ने गर्मजोशी से स्वागत किया। दोनों नेताओं के बीच करीब 45 मिनट तक द्विपक्षीय बैठक चली और इस दौरान दोनों नेताओं ने प्राथमिक मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की है। जिसमें कोरोनोवायरस महामारी का मुकाबला करना, जलवायु परिवर्तन, आर्थिक सहयोग और भारत-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता सुनिश्चित करना शामिल है। बाइडेन ने कहा कि दोनों देशों के बीच संबंध मजबूत और करीबी हुए हैं। बाइडेन ने कहा कि, पीएम मोदी ने चार टी प्रतिभाओं, प्रौद्योगिकी, व्यापार और ट्रस्टीशिप के आधार पर बढ़ते संबंधों के लिए 10 साल का रोड मैप तैयार किया।

क्वाड की बैठक

क्वाड की बैठक

शुक्रवार को पीएम मोदी ने क्वाड समिट के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के नेताओं के राष्ट्राध्यक्षों के साथ एक बैठक में भाग लिया और हिंद-प्रशांत क्षेत्र के अलावा और दुनिया की शांति और समृद्धि सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम करने का संकल्प लिया। राष्ट्रपति बाइडेन ने कहा कि चारों लोकतांत्रिक देश कोविड-19 से लेकर जलवायु तक की साझा चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए एक साथ आए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि क्वाड समूह में लोकतांत्रिक देश साझेदार हैं, जो विश्व विचार साझा करते हैं और भविष्य के लिए एक समान दृष्टिकोण रखते हैं।

संयुक्त राष्ट्र में संबोधन

संयुक्त राष्ट्र में संबोधन

शनिवार को पीएम मोदी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र को संबोधित किया और "प्रतिगामी सोच" वाले देशों के बारे में आगाह किया जो आतंकवाद को "राजनीतिक उपकरण" के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने यह सुनिश्चित करने के प्रयासों का आह्वान किया कि कोई भी देश "अपने स्वार्थों" के लिए अफगानिस्तान में "नाजुक स्थिति" का लाभ न उठाए। उन्होंने किसी काउंटी का नाम नहीं लिया, लेकिन वह साफ तौर पर पाकिस्तान की ओर इशारा कर रहे थे. उन्होंने भारत के लोकतंत्र की ताकत को रेखांकित किया और कहा कि भारत में लोकतांत्रिक व्यवस्था की बदौलत ही एक चाय वाले को लगातार दो बार प्रधानमंत्री बनने का मौका मिला है।

पीएम मोदी को खास 157 उपहार

पीएम मोदी को खास 157 उपहार

अमेरिका से भारतीय प्रधानमंत्री 157 खास उपहारों के साथ भारत आ रहे हैं। ये 157 उपहार दरअसल, प्राचीन कलाकृतियां और प्राचीन वस्तुएं हैं, जो सालों पहले भारत से तस्करी के जरिए अमेरिका ले जाया गया। पीएम मोदी को अमेरिका दौरे के दौरान अमेरिका के राष्ट्रपति ने इन खास 157 कलाकृतियों को सौंपा, जिसके लिए पीएम मोदी ने अमेरिका और अमेरिकी राष्ट्रपति को धन्यवाद किया है। प्रधानमंत्री कार्यालय ने कहा है कि इनमें से ज्यादातर कलाकृतियों 11वीं से लेकर 14वीं शताब्दी के बीच की हैं, जिन्हें तस्करी कर अमेरिका ले जाया गया था। पीएमओ की आधिकारिक बयान के अनुसार, लगभग आधी कलाकृतियां सांस्कृतिक हैं, और बाकी हिंदू धर्म, बौद्ध धर्म और जैन धर्म से संबंधित मूर्तियां हैं। जिसमें 10 वीं सीई के बलुआ पत्थर में रेवंता का डेढ़ मीटर का बेस रिलीफ पैनल शामिल है। 8.5 सेंटीमीटर ऊंची और 12वीं शताब्दी में बनी नटराज की मूर्ति शामिल है।

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