PM मोदी ने आतंकवाद पर चीन-पाकिस्तान से की आमने-सामने बात, SCO समिट में पुतिन के सामने जिनपिंग को घेरा
Narendra Modi Speech in SCO Summit: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एससीओ की अध्यक्षता के दौरान आतंकवाद पर पाकिस्तान और चीन से आमने-सामने बात की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है, कि शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) पिछले 20 वर्षों में पूरे यूरेशिया क्षेत्र में शांति, समृद्धि और विकास के लिए एक महत्वपूर्ण मंच बनकर उभरा है। उन्होंने कहा कि भारत एससीओ को एक विस्तारित परिवार के रूप में देखता है।
एससीओ काउंसिल ऑफ स्टेट्स ऑफ हेड्स के 23वें शिखर सम्मेलन में अपने वर्चुअल संबोधन में, पीएम मोदी ने कहा, कि एससीओ देशों के युवाओं की प्रतिभा का दोहन करने के लिए यंग साइंटिस्ट कॉन्क्लेव, ऑथर्स कॉन्क्लेव, स्टार्टअप फोरम और यूथ काउंसिल जैसे कई नए मंच आयोजित किए गए हैं।

एससीओ शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी का संबोधन
प्रधानमंत्री मोदी ने एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान अपने संबोधन में सदस्य राष्ट्रों को संबोधित करते हुए कहा, कि 'आतंकवाद भले ही किसी भी रूप में क्यों ना हो, उसके खिलाफ मिलकर लड़ाई लड़नी ही होगी।' आपको बता दें, कि चीन ने पिछले दिनों यूनाइटेड नेशंस में बार बार पाकिस्तानी आतंकियों को बचाया है, लिहाजा माना जा रहा है, कि पीएम मोदी ने अपने संबोधन में पाकिस्तान के साथ साथ चीन से आतंकवाद पर आमने-सामने की बात की है।
एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भी मौजूद थे, जब पीएम मोदी आतंकवाद पर अपनी बात रख रहे थे। प्रधानमंत्री मोदी ने शिखर सम्मेलन में बोलते हुए दो टूक शब्दों में कहा, कि 'कुछ देश आतंकवाद को अपनी नीतियों की तरह इस्तेमाल करते हैं, आतंकवादियों को शरण देते हैं और एससीओ को ऐसे देशों की आलोचना करने में संकोच नहीं करना चाहिए।"
इस बैठक में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ साथ रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी मौजूद थे। इनके अलावा, वर्चुअल बैठक में ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रायसी, बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको, कजाकिस्तान के राष्ट्रपति कासिम-जोमार्ट टोकायेव और अन्य नेताओं ने एससीओ बैठक में भाग लिया है।
एससीओ में पीएम मोदी ने और क्या कहा?
पीएम मोदी ने कहा, कि भारत ने एससीओ के साथ अपने बहुआयामी सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का प्रयास किया है।
पीएम मोदी ने कहा, "हम एससीओ (शंघाई सहयोग संगठन) को न केवल एक विस्तारित पड़ोस के रूप में देखते हैं, बल्कि एक विस्तारित परिवार के रूप में देखते हैं। एससीओ के अध्यक्ष के रूप में, भारत ने हमारे बहुआयामी सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के प्रयास किए हैं।"
पीएम मोदी ने कहा कि सुरक्षा, आर्थिक विकास, कनेक्टिविटी, एकता, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के लिए सम्मान और पर्यावरण संरक्षण एससीओ के लिए भारत के दृष्टिकोण के स्तंभ हैं।
उन्होंने कहा, कि "भारत ने एससीओ के भीतर सहयोग के पांच स्तंभ स्थापित किए हैं, जो हैं स्टार्टअप और नवाचार, पारंपरिक चिकित्सा, युवा सशक्तिकरण, डिजिटल समावेशन और साझा बौद्ध विरासत।"
भारत की अध्यक्षता के दौरान, एससीओ व्यापक क्षेत्रों में अपने जुड़ाव और बातचीत की गहराई और तीव्रता में नए मील के पत्थर तक पहुंच गया है। 'SCO- SECURE' की भारत की अध्यक्षता का विषय है, जो साल 2018 में एससीओ क़िंगदाओ शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए संक्षिप्त भाषण से लिया गया है।
इसका मतलब है, S- से सुरक्षा, E से आर्थिक विकास, C से कनेक्टिविटी, U से एकता, R से संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के लिए सम्मान, E से पर्यावरण संरक्षण।
प्रधानमंत्री मोदी ने एससीओ सदस्य देशों के नेताओं को संबोधित करते हुए कहा, कि 'भारत और अफगानिस्तान के लोगों के बीच सदियों से सौहार्दपूर्ण संबंध रहे हैं और भारत ने अफगानिस्तान के विकास में पिछले दो दशकों में काफी योगदान किया है। भारत ने अफगानिस्तान में मानवीय संकट के दौरान मदद भेजी है और भारत उम्मीद करता है, कि अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल कट्टरता और आतंकवाद को प्रोत्साहित करने के लिए नहीं किया जाए।'












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