हजारों स्टूडेंट्स ने हिला डाला है हांगकांग और दुनिया को
हांगकांग। पिछले कुछ दिनों से एशिया के विकसित देश हांगकांग की सड़कों पर हजारों छात्रों ने एक युद्ध छेड़ा हुआ है। 'ऑक्यूपाई सेंट्रल,'यह नाम है उस विरोध प्रदर्शन का जिसने न सिर्फ चीन बल्कि पूरी दुनिया को हैरान कर डाला है।
हैरानी की बात है कि जिस विरोध प्रदर्शन के लिए हिंसा न होने देने की बात कही गई थी आज उस विरोध प्रदर्शन में पुलिस की ओर से हो रही कार्रवाई ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया है।

सड़कों पर अनदेखा नजारा
हांग कांग को हमेशा से ही एक शांत देश माना जाता है लेकिन पिछले दिनों से यहां पर एक अजीब सी अशांति छाई हुई है।

अब नहीं होगी बातचीत
शनिवार को शांति एक उम्मीद नजर आई लेकिन हांगकांग के लोकतंत्र समर्थक प्रदर्शनकारियों ने चुनाव सुधारों पर सरकार के साथ प्रस्तावित बातचीत रद्द कर दी।

चुनाव सुधारों के लिए हो रहा है विरोध
हांग कांग में 28 सितंबर से शुरू हुए इस प्रदर्शन की वजह है चीन से हांगकांग के चीफ इलेक्शन एग्जिक्यूटिव के चुनाव के लिए जनमत संग्रह को मंजूरी देना और चुनावों में सुधार करना।

जान की रक्षा की अपील
हांगकांग फेडरेशन ऑफ स्टूडेंट्स ने एक बयान में कहा, 'सरकार मांग कर रही है कि सड़कें खाली की जाए। हम हांगकांग के लोगों से अपील करते हैं कि वे हमारी स्थिति की रक्षा के लिए आगे आएं और लड़ाई को उसके अंजाम तक पहुंचाएं।'

चीन की परेशानी में इजाफा
चीन को समझ नहीं आ रहा है कि आखिर किस तरह से इस विरोध प्रदर्शन को रोककर स्थिति को शांत कराया जाए।

छात्रों पर पुलिस का लाठीचार्ज
इस विरोध प्रदर्शन की शुरुआत अंहिसा के संदेश के साथ हुई थी लेकिन पुलिस की ओर से हुए लाठीचार्ज ने इसे हिंसक रंग दे डाला है।

1997 में ब्रिटेन से अलग हुआ हांगकांग
ब्रिटिश उपनिवेश रहे हांगकांग पर 1997 में चीन ने नियंत्रण कायम कर लिया था। उसके बाद से यह प्रदर्शन बीजिंग की सत्ता को सबसे बड़ी चुनौती है।












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