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'समलैंगिकों का स्वर्ग' है पाकिस्तान का कराची !

By मुबीन अज़हर, बीबीसी वर्ल्ड सर्विस, करा
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    समलैंगिकों का स्वर्ग है पाकिस्तान का कराची !

    पाकिस्तान कोई ऐसी जगह नहीं है, जहाँ लोग समलैंगिक संबंधों को लेकर उदारता दिखाएं. लेकिन कुछ लोगों का कहना है कि समलैंगिकों के लिए यह बेहतरीन जगह है. ये लोग बंदरगाह शहर कराची को 'समलैंगिक पुरुषों का स्वर्ग' बताते हैं.

    भूमिगत पार्टियां, दरगाहों पर सामूहिक सेक्स और विपरीत लिंग के व्यक्ति से केवल सुविधा के लिए शादी ऐसे कुछ आश्चर्य हैं, जिनकी पाकिस्तान में समलैंगिकों को पेशकश की जाती है. दिखावटी सामाजिक बंधनों के अंदर ही देश में समलैंगिक गतिविधियों में तेज़ी आई है.

    कराची के एक उच्चवर्गीय इलाक़े में रहने वाले 50 साल के दान्याल शहर में गे पार्टियाँ आयोजित करने के लिए अपने स्मार्टफ़ोन का इस्तेमाल करते हैं. वो बताते हैं, ''आज से क़रीब 12 साल पहले जब मैने इंटरनेट पर गे टाइप कर सर्च किया तो इससे मुझे इस शहर के एक समलैंगिक समूह के बारे में पता चला और मैंने उस समूह के 12 लोगों से संपर्क किया.''

    ऑनलाइन संपर्क
    वो कहते हैं, ''आजकल स्मार्टफ़ोन ऐप हैं जिसके ज़रिए आप किसी दूसरे समलैंगिक से ऑनलाइन जुड़ सकते हैं. पाकिस्तान में हज़ारों समलैंगिक पुरुष किसी भी समय ऑनलाइन रहते हैं.''

    वो कहते हैं, ''अगर आप सेक्स करना चाहते हैं तो यह समलैंगिक पुरुषों का स्वर्ग है. लेकिन अगर आप संबंध बनाना चाहते हैं तो शायद यह काम कठिन हो सकता है.''

    अगर आप सेक्स करना चाहते हैं तो यह समलैंगिक पुरुषों का स्वर्ग है. लेकिन अगर आप संबंध बनाना चाहते हैं तो यह अधिक कठिन काम हो सकता है
    कराची के एक समलैंगिक
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    अपनी यौन इच्छाओं को साझा करने के लिए इन गे पार्टियों का निमंत्रण किसी समलैंगिक के लिए दुर्लभ अवसर है. पाकिस्तान एक पितृसत्तात्मक समाज है. पाकिस्तानियों से उम्मीद की जाती है कि वे विपरीत लिंग के व्यक्ति से शादी करें. और अधिकतर पाकिस्तानी ऐसा करते भी हैं.

    शोधकर्ता क़ासिम इक़बाल कहते हैं कि इसका परिणाम संबंधों में बेइमानी और दोहरे जीवन के रूप में सामने आता है. वो कहते हैं, '' समलैंगिक पुरुष हर संभव कोशिश करते हैं कि आपस में कोई रिश्ता न बने, क्योंकि उन्हें पता है कि एक दिन उन्हें किसी महिला से शादी करनी होगी.''

    वो कहते हैं, ''शादी के बाद वे पत्नी के साथ अच्छा व्यहार करते हैं. लेकिन वे दूसरे पुरुषों के साथ सेक्स करना जारी रखते हैं.''

    हैरत की बात यह है कि कराची के सबसे व्यस्त दरगाह समेत कई सार्वजनिक जगहों पर भी समलैंगिक पुरूष सेक्स करते हैं. अब्दुल्ला शाह गाज़ी की दरगाह पर लोग आशीर्वाद लेने के लिए जाते हैं. यह कराची में घूमने फिरने के लिए सबसे लोकप्रिय जगहों में से एक है.

    हर गुरुवार को जब सूर्य अस्त हो रहा होता है तो पूरे शहर से पुरुष यहाँ जमा होते हैं. यहाँ पुरुष एक घेरा बनाते हैं. घेरे में केंद्र में जो पुरुष होता है, उसे घेरे में शामिल लोग छूते हैं. कुछ लोग इसे रहस्यमयी धार्मिक समारोह के रूप में देखते हैं. वहीं कुछ लोगों के लिए यह अस्पष्ट रूप से सामूहिक सेक्स है. इस तरह के व्यवहार को ज़ाहिर हैं पाकिस्तान के धार्मिक नेता कभी भी जायज़ नहीं क़रार दे सकते हैं.

    संबंधों का पाप
    अधिकांश पाकिस्तानी समलैंगिकता को पाप मानते हैं. पवित्र क़ुरान के हवाले से पैगंबर लूत की मिसाल देते हुए अधिकांश मौलवी कहते हैं कि ख़ुदा समलैंगिकता की निंदा करता हैं. वहीं कुछ विद्वान समलैंगिक पुरुषों के लिए शरिया क़ानून के आधार पर सज़ा देने की वकालत करते हैं.

    ये दरगाह कराची की उस जगह से काफ़ी दूर हैं जहाँ समलैंगिक सेक्स आसानी से उपलब्ध है. यहाँ से आप किसी मालिश वाले की सेवा ले सकते हैं, जो पाँच डॉलर में मालिश और कुछ 'अन्य सेवाएं' देता है.

    अहमद नाम के एक मालिश करने वाले बताते हैं, ''हम लोग पुलिस, सैन्य अधिकारियों और मंत्रियों तक को सेवा उपलब्ध कराते हैं.'' उनका कहना है कि दो पत्नियाँ और आठ बच्चे होने के बावजूद वे अबतक तीन हज़ार से भी अधिक लोगों के साथ सो चुके हैं.

    उनकी एक पत्नी सुमैरा नक़ाब पहनती हैं लेकिन उन्हें अपने पति के इस पेशे पर कोई आपत्ति नहीं है. वह कहती हैं, ''मैं उनके यौन संबंधों के बारे में जानती हूं. कोई बात नहीं. अगर वह काम नहीं करेंगे तो बच्चे खाएंगे कैसे? जब लोग उन्हें गाली देते हैं तो मुझे ग़ुस्सा आता है. ''

    क़ासिम इक़बाल कहते हैं, ''सुमैरा की सोच आश्चर्यजनक लग सकती है. लेकिन इसे समझना मुश्किल नहीं है.'' वो कहते हैं, '' पाकिस्तान के पुरुषों को महिला मित्र बनाने से हतोत्साहित किया जाता है. इसलिए अक्सर वे अपने पुरुष मित्रों या चचेरे-ममेरे भाइयों से ही पहली बार यौन संबंध बनाते हैं. परिवार के लोग अक्सर इसे जवानी की बात मानकर अनदेखा कर देते हैं. उनको लगता है कि पुरुष तो आख़िरकार पुरुष ही होते हैं.''

    परंपरा और आस्था
    इक़बाल कहते हैं, ''पुरुषों के बीच यौन संबंध को तबतक ही अनदेखा किया जाता है, जबतक की इससे किसी परंपरा या धार्मिक आस्था को चोट न पहुँचती हो. बाद में पुरूष किसी महिला से शादी कर लेते हैं और इसके बारे में कोई बात नहीं होती है.''

    पुरुषों के बीच यौन संबंध को तबतक ही अनदेखा किया जाता है, जबतक की इससे किसी परंपरा या धार्मिक आस्था को चोट न पहुँचती हो. बाद में लोग विपरीत लिंगी व्यक्ति से शादी कर लेते हैं और कुछ बोल नहीं पाते हैं
    कासिम इकबाल
    पाकिस्तान में समलैंगिक संबंध ग़ैर क़ानूनी है. ब्रितानी राज में इसे प्रकृति के विपरीत बताते हुए क़ानून बनाया गया था. 1980 के दशक में बने शरिया क़ानून में भी समलैंगिक संबंधों के लिए सज़ा का प्रावधान किया गया.

    लेकिन आमतौर पर इन क़ानूनो का शायद ही कभी पालन किया जाता है. इस तरह के ज़्यादातर मामले परिवार के अंदर ही सुलझा लिए जाते हैं.

    इक़बाल कहते हैं, ''एक बार दो लड़के एक खेत में सेक्स करते हुए पकड़े गए. इन लड़कों के परिवारों ने इस बात को छुपाने के लिए पुलिस को रिश्वत देने की पेशकश की. लेकिन जब पुलिस ने घूस लेने से इनकार कर दिया तो परिवार वालों ने पुलिस से एक ख़ास गुज़ारिश की. परिवार वाले चाहते थे कि अपने बयान में पुलिस उनके लड़के को 'एक्टिव' पार्टनर दिखाए न कि 'पैसिव' पार्टनर. क्योंकि परिवार वालों के मुताबिक़ उनके लड़के का पैसिव पार्टनर होने पारिवार के लिए और भी शर्मनाक था.''

    इक़बाल कहते हैं कि अधिकांश मामलों में आरोप वापस ले लिए जाते हैं. लेकिन परिवार के सदस्य लड़के पर शादी के लिए दबाव डालते हैं.

    शायद ही कभी ऐसा होता है कि परिवार वाले अपने लड़के को किसी दूसरे पुरूष के साथ लंबे समय के लिए समलैंगिक संबंध बनाने की इजाज़त देते हैं.

    अकबर और अली का ऐसा ही एक जोड़ा है.

    अकबर बताते हैं, ''अली का परिवार मातृसत्तात्मक है. उसकी दादी परिवार की मुखिया थीं. इसलिए मुझे पता था कि अगर मैंने उन्हें अपने पक्ष में कर लिया तो सब मेरे पक्ष में हो जाएंगे. यह बताने और समझाने के लिए कि मैं एक अच्छा इंसान हूं मुझे अधिक समय लगा. यह पहला और सबसे महत्वपूर्ण था. मैं एक अच्छा इंसान हूँ अली के परिवार को यह यक़ीन दिलाना बहुत ज़रूरी था.''

    वो बताते हैं, ''उन्होंने एक बार मुझे हाथ की कढ़ाई वाला एक सजावटी कपड़ा दिया, जिसे उन्होंने अपनी किशोरावस्था में बनाया था. उन्होंने कहा कि वे उसे इसलिए दे रही हैं क्योंकि वो जानती हैं कि मैं चीज़ों का अच्छे से ख़्याल रखता हूँ. यह एक तरह का इशारा था और बहुत ही निजी स्वीकृति थी.''

    परिवार की मदद
    परिवार की मदद से अकबर और अली ने अपना घर बसा लिया है. अकबर के अली की माँ के साथ बहुत अच्छे संबंध हैं.

    वो बताते हैं, ''वह आकर हमारे साथ रहती हैं. मुझे उनके साथ सीरियल देखना पसंद हैं. रात में वह अपने कमरे में सोने चली जाती हैं और हम अपने. दो पुरुष एक ही बिस्तर पर सो रहे हैं. वह पक्का यह जानती हैं कि हो क्या रहा है. हमें इस बारे में कभी चर्चा करने की ज़रूरत नहीं पड़ती.''

    हालांकि इस तरह की कहानियाँ आमतौर पर दुर्लभ हैं. लेकिन समलैंगिक महिलाओं का जीवन तो और भी कठिन है. तो आख़िर समलैंगिक महिलाएं कैसे अपनी ज़िंदगी गुज़ारती हैं.

    लाहौर की रहने वाली क़रीब 20 साल की बीना और फ़ातिमा समलैंगिक हैं और उन्होंने एक साथ रहने का एक नया तरीक़ा अपनाया है.

    बीना इसे सार्वजनिक रूप से स्वीकार नहीं करती हैं. लेकिन भविष्य को लेकर वह आशावान हैं. वह कहती हैं, ''मुझे लगता है कि एक दिन हमें शादी करने की सुविधा होगी. मैं कुछ समलैंगिक पुरूषों को जानती हूं. या फिर हो सकता है कि हमलोग मिलकर एक घर ख़रीद लें, एक हिस्से में वे रहें और दूसरे हिस्से में हमलोग.''

    फातिमा को लगता है कि यह समय की बात है कि लोग पाकिस्तान में समलैंगिक अधिकारों पर चर्चा करेंगे और लोग अपनी समलैंगिकता की घोषणा गर्व से करेंगे.

    वह कहती हैं, ''आप हमेशा एक कोठरी में नहीं रह सकते हैं, आपको बाहर आना ही होगा. यह होना ही है.''

    लेकिन बीना शायद उतनी आशावान नहीं हैं. वो कहती हैं कि अमरीका में समलैंगिक अधिकार तब मिेले जब महिलाओं को पहले से ही मूलभूत अधिकार थे.

    उनके अनुसार पाकिस्तान में तो फ़िलहाल ऐसे कोई आसार नहीं हैं. वो कहती हैं कि पाकिस्तान में जातीय हिंसा और आर्थिक स्थिति ज़्यादा बड़े मुद्दे हैं. लेकिन उन्हें इतना विश्वास है कि पाकिस्तान में कुछ निजी जगह ज़रूर हैं जहां लोग अपनी यौन प्राथमिकताओं के बारे में बातचीत कर सकते हैं.

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    BBC Hindi
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    English summary
    pakistans-karachi-is-paradise-of-homosexuals

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