पाकिस्तानी आतंकियों ने तालिबान से मिलाया हाथ, अफगानिस्तान सरकार की उलटी गिनती शुरू?.
नई दिल्ली, 11 जुलाई: लश्कर ए तैयबा और जैश एक मोहम्मद जैसे पाकिस्तानी आतंकी संगठनों ने भी अफगानिस्तान में खुलकर तालिबान लड़ाकों के साथ मिलकर लड़ना शुरू कर दिया है। जानकारी के मुताबिक अफगानिस्तान में सरकार के खिलाफ तबाही मचा रहे तालिबानी आतंकियों को पाकिस्तानी कैंपों में ट्रेनिंग भी दी जा रही है और खुद पाकिस्तानी सेना और पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई उनके साथ सक्रिय रूप से मिले हुए हैं। आज की स्थिति ये हो गई है कि अफगानिस्तान में सरकारी सुरक्षा बलों का करीब 20 फीसदी इलाकों पर ही नियंत्रण रह गया है और तालिबानी लड़ाके ज्यादातर अफगानिस्तान को अपने नियंत्रण में ले चुके हैं। खबरों के मुताबिक भारत ने भी कंधार में दूतावास से अपने कर्मचारियों को वापस बुलाना शुरू कर दिया है।

पाकिस्तानी आतंकी भी अफगानिस्तान में हुए सक्रिय
जानकारी के मुताबिक अफगानिस्तानी तालिबान का पाकिस्तानी आतंकी संगठनों के साथ हाथ मिलाना 2020 में अमेरिका के साथ हुए उसके शांति समझौते का खुल्लम-खुल्ला उल्लंघन है। खुफिया एजेंसियों की ओर से यह जानकारी तब सामने आ रही है, जब भारत समेत तमाम देश अफगानिस्तान में तालिबान के बढ़ते दबदबे को लेकर चिंतित हैं। यह जानकारी ऐसे वक्त में सामने आ रही है जब कई खुफिया एजेंसियों को आशंका है कि जल्द ही तालिबान अफगानिस्तानी सरकार से महत्वपूर्ण इलाकों की छीन सकता है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक भारत में कई बड़ी आतंकी घटनाओं को अंजाम दे चुके लश्कर ए तैयबा और जैश ए मोहम्मद जैसे आतंकी संगठन इस समय अफगानिस्तान के पूर्वी इलाके कुनार और नंगरहार प्रांतों और दक्षिण-पूर्वी प्रांतों हेलमंड और कंधार में सक्रिय हैं। ये सारे इलाके पाकिस्तानी सीमाओं से सटे हैं।

लश्कर और जैश ने की हैं नई भर्तियां
पाकिस्तानी आतंकियों की अफगानिस्तान में सक्रियता की जानकारी रखने वालों ने नाम नहीं बताने की शर्त पर कहा है कि इनके अलावा पाकिस्तान में सक्रिय दूसरे आतंकी संगठन,जैसे कि तहरीक ए तालिबान पाकिस्तान, लश्कर ए झंगवी, जमात उर अरहार, लश्कर ए इस्लाम और अल बदर के दहशतगर्द भी तालिबान के साथ अफगानिस्तान में देखे गए हैं। इन आतंकियों को गजनी, खोस्त और लोगार जैसे प्रांतों में भी देखा गया है। खुफिया एजेंसियों के मुताबिक अकेले इन इलाकों में लश्कर के 7,200 अनुमानित आतंकी मौजूद हैं। इस मामले की जानकारी रखने वाले एक शख्स ने बताया है कि 'लश्कर और जैश ने पूर्वी अफगानिस्तान में लड़ाई के लिए नई भर्तियां भी की हैं।' रिपोर्ट है कि अफगान तालिबान का मिलिट्री चीफ और तालिबान के पूर्व सरगना मुल्ला मोहम्मद उमर का बेटा मुल्लाह मोहम्मद याकूब इस सिलसिले में लश्कर और जैश के साथ लगातार संपर्क में है।

तालिबान को पाकिस्तानी सेना और आईएसआई की भी मदद
सबसे चौंकाने वाली जानकारी तो खुफिया एजेंसियों की ओर से यह आ रही है कि पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में स्थिति हैदराबाद में लश्कर के कैंप में सैकड़ों तालिबानी आतंकियों को ट्रेनिंग दी जा रही है। इससे भी बड़ी बात ये है कि इस ट्रेनिंग में खुद पाकिस्तानी सेना का भी सक्रिय सहयोग है। इसकी जानकारी रखने वाले शख्स ने कहा है कि 'लश्कर और जैश के आतंकियों को अफगानिस्तान में करीब 200 के ग्रुप में तैनात किया गया है, जिनमें से 5 से 8 सुसाइड बॉम्बर भी शामिल हैं। यह भी जानकारी है कि पाकिस्तानी खुफिया अधिकारी भी इस ग्रुप में शामिल हैं, जो कि उनका पुराना तिकड़म रहा है।'

अफगानिस्तान सरकार की उलटी गिनती शुरू?
पाकिस्तान की ओर से यह हरकत उस वक्त की जा रही है, जब कहा जा रहा है कि उसपर आतंकी संगठनों से मोहभंग करने के लिए फाइनेंशियल ऐक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) और पश्चिमी देशों की ओर से तलवार लटकी हुई है। अफगानिस्तान में आज की स्थिति ये है कि ब्लूमबर्ग की शनिवार की एक रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी सैनिकों के वहां से निकलने के बाद उसकी समर्थित सरकार की मुश्किल से देश के 20% से थोड़े ज्यादा इलाके पर ही नियंत्रण रह गया है। वहीं, 407 जिलों में से 204 पर तालिबान का कब्जा हो चुका है, जो कि मई की शुरुआत में 73 जिलों पर सीमित था। आज की तारीख में अफगानिस्तान सरकार के नियंत्रण में सिर्फ 74 जिले बच गए हैं और बाकियों में दोनों ओर से जबर्दस्त लड़ाई चल रही है।












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