भारत से बैर, घटिया चीनी हथियार खरीदने पर मजबूर पाकिस्तान, कैसे फंस गई है बाजवा ही सेना?
पाकिस्तान को पता है कि चीन से आने वाले हथियार की क्वालिटी काफी संदिग्ध है, लिहाजा पाकिस्तान की दिलचस्पी पश्चिमी हथियारों को लेकर बना हुआ है।
Pakistan between us and China: चीन और अमेरिका के बीच संतुलन बनाते बनाते पाकिस्तान अब दोनों ही देशों के बीच फंस गया है और इसका गंभीर खामियाजा भी उसे भुगतना पड़ रहा है। पाकिस्तान की सेना इन दिनों अजीब दुविधा से गुजर रही है और इसे ना चाहते हुए भी घटिया चीनी हथियार खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। पाकिस्तान की सेना को ज्यादातर हथियार अमेरिका से मिले हुए हैं, लिहाजा जब वो चीन के घटिया हथियार देखते हैं, तो वो अपना माधा पीटने लगते हैं। बीते कुछ सालों में पाकिस्तान ने भारी संख्या में फाइटर जेट्स, ड्रोन्स, रडार और आर्टिलरी का आयात ना चाहते हुए भी चीन से किया है, लेकिन पाकिस्तान सेना को चीनी हथियारों पर अभी भी विश्वास नहीं हो रहा है।

चीनी हथियार खरीदती पाकिस्तान की सेना
कराची में पिछले दिनों 11वीं नेशनल डिफेंस एग्जबिशन एंड सेमिनार(आईडीईएएस) का आयोजन किया गया था, जिसमें सात चीनी रक्षा कंपनियों ने 50 से ज्यादा देशों के प्रतिनिधियों के सामने एडवांस हथियार दिखाए। प्रदर्शित किए गए एडवांस चीनी हथियारों में विंग लूंग ड्रोन, सीएच-सीरीज ड्रोन, मल्टी-रोल ड्रोन, वाई-9ई ट्रांसपोर्ट प्लेन, एलवाई-70 एयर डिफेंस सिस्टम, वीटी-4 मुख्य युद्धक टैंक (एमबीटी), एसआर5 शामिल थे। ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इन हथियारों के अलावा चीनी कंपनियों ने कराची में मल्टीपल लॉन्च रॉकेट सिस्टम (MLRS), YLC-2E मल्टी-रोल रडार, कमांड इंफॉर्मेशन सिस्टम और एक इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर डिफेंस सिस्टम की भी प्रदर्शनी लगाई। लेकिन, पाकिस्तान पहले से ही चीनी हथियारों का एक बड़ा खरीददार बन चुका है।

भारत को ध्यान में रखकर हथियार बनाता चीन
ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक, चीन ने पाकिस्तान को VT-4 MBT, SH-15 ऑटोमेटिक हॉवित्जर, टाइप 054 A/P फ्रिगेट, JF-17 और J-10C फाइटर जेट और ZDK-03 अर्ली वार्निंग फाइटर जेट्स जैसे हथियार बेचे हैं और ग्लोबल टाइम्स ने अज्ञात पाकिस्तानी चीनी अधिकारियों के हवाले से दावा किया है, कि वो चीनी हथियारों को पाकर खुश हैं और पाकिस्तानी अधिकारियों ने चीनी हथियारों को दुर्लभ बताया है। वहीं, चीन ने पाकिस्तान के साथ रक्षा संबंध को काफी अहम बताया है। वहीं, चीन लगातार पाकिस्तान पर और हथियार खरीदने के लिए भी अलग अलग रास्तों के जरिए दबाव बनाता है।

चीन के दबाव में पाकिस्तान
चीनी सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है, कि चीनी हखियारों ने पाकिस्तान की नेशनल सिक्योरिटी को बढ़ाया है। वहीं, एक्सपर्ट्स ये भी मानते हैं, कि जिन हथियारों को चीन पाकिस्तान को बेचता है, वो खास तौर पर भारत को ध्यान में रखकर बनाए गये हैं और हिमालय में लड़ाई लड़ने के लिए उन्हें डिजाइन किया गया है, जहां हाल के वर्षों में घातक हिंसा देखी गई है। इसके अलावा, चीन अपने बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) की रक्षा के लिए पाकिस्तान को और भी हथियार बेचने की कोशिश कर राह है, जिसमें दो पक्षों के बीच का 60 अरब डॉलर का सीपीईसी प्रोजेक्ट और फारस की खाड़ी और हॉर्न ऑफ अफ्रीका की तरफ से समुद्री डकैती का खतरा शामिल है।

पाकिस्तान को पता है, चीनी हथियार हैं घटिया
सबसे दिलचस्प बात ये है, कि पाकिस्तान को पता है कि चीन से आने वाले हथियार की क्वालिटी काफी संदिग्ध है, लिहाजा पाकिस्तान की दिलचस्पी पश्चिमी हथियारों को लेकर बना हुआ है, जिसमें 1980 के दशक का अमेरिका में बना एफ-16 फाइटर जेट्स भी शामिल हैं, जो अभी भी भारत के खिलाफ इस्तेमाल करने के लिए पाकिस्तान के पास मौजूद सबसे शक्तिशाली हथियार है। वहीं, पिछले कुछ सालों में पाकिस्तान ने चीन से चार फ्रिगेट खरीदे थे, जिसका नाम उसने जुल्फिकार रखा था। लेकिन, ऑपरेशन के दौरान पता चला, कि ये चारों चीनी फ्रिगेट काफी घटिया क्वालिटी के हैं और उसके इलेक्ट्रॉनिक्स और इंजन बार बार खराब हो रहे हैं। इसके साथ ही इन फ्रिगेट का हथियार सिस्टम भी खराब हो गया। लेकिन, अब पाकिस्तान की नौसेना इन्ही खराब क्वालिटी के जहाजों को संचालित करने के लिए तैयार है। इसके अलावा इसी साल अप्रैल में आई एक रिपोर्ट में कहा गया था, कि पाकिस्तान ने चीन से जो टैंक, रडार और एयर डिफेंस सिस्टम खरीदे हैं, उनको लेकर पाकिस्तानी सेना गहरे अविश्वास में है। कई चीनी टैंक ट्रेनिंग के दौरान काम नहीं कर रहे थे और कई टैंक डिलीवरी के बाद फेल हो गये।

अमेरिका के साथ भी रिश्ता रखने को मजबूर
चीन से मिलने वाले खराब क्वालिटी के हथियारों ने पाकिस्तान को अमेरिका के साथ भी रिश्ता बनाकर रखने के लिए मजबूर किया है। शीत युद्ध के समय पाकिस्तान ने काफी आसानी से अमेरिका को अपना पार्टनर बना रखा था, क्योंकि भारत और रूस के बीच रिश्ते काफी मजबूत थे और भारत को लगातार रूसी हथियारों की आपूर्ति की जाती थी। लेकिन, धीरे धीरे वैश्विक राजनीति में परिवर्तन आया और 1990 के दशक में परमाणु प्रसार की चिंताओं के बात अमेरिका ने पाकिस्तान को हथियारों की सप्लाई में कमी करनी शुरू कर दी और फिर हथियारों की बिक्री को सस्पेंड कर दिया। हालांकि, बाद में अमेरिका में हुए आतंकी हमलों के बाद अमेरिका ने अपनी नीति में थोड़ा परिवर्तन किया और पाकिस्तान को हथियारों की सप्लाई फिर से शुरू कर दी। वहीं, अब चीन को काउंटर करने के लिए अमेरिका पाकिस्तान के साथ भी अपने संबंधों को बनाए रखना चाहता है, लिहाजा पाकिस्तान अमेरिका की इस 'मजबूरी' का फायदा उठाकर अमेरिकी हथियार तो खरीद सकता है, लेकिन दिक्कत ये है, कि आर्थिक संकट में फंसा पाकिस्तान क्या महंगे अमेरिकी हथियार खरीद पाएगा? इसी साल अमेरिका ने पाकिस्तान को एफ-16 हथियारों की मरम्मत के लिए 450 मिलियन डॉलर का पैकेज दिया है, जो अमेरिका की नीति में फिर से आए बदलाव का संकेत है।












Click it and Unblock the Notifications