Pakistan News: पाकिस्तान ने अपनी सेना के लिए अमेरिका से मांगी खैरात, ट्रंप के फैसले को हटाने की मांग

डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान को धोखेबाज बताते हुए उसे दी जाने वाली सैन्य वित्तीय मदद को रोक दिया था, जिसे बाइडेन प्रशासन ने भी जारी रखा है। अब अमेरिका से पाकिस्तान को कई वित्तीय मदद नहीं मिलती है।

Pakistan US News

Pakistan US News: भीषण आर्थिक संकट में फंसे पाकिस्तान ने अमेरिका के सामने फिर से कटोरा फैला दिया है। पाकिस्तान ने चीन के बाद अब अमेरिका से भीख मांगी है और ट्रंप प्रशासन के उस फैसले को सस्पेंड करने की मांग की है, जो पाकिस्तान पर लगाया गया था।

पाकिस्तान ने गुरुवार को संयुक्त राज्य अमेरिका से ट्रम्प प्रशासन के निलंबित किए गए सैन्य वित्तपोषण और बिक्री को हटाने का आग्रह किया है। पाकिस्तान ने उस वक्त बाइडेन प्रशासन से ये मांग की है, जब अमेरिका के एक अधिकारी ने कहा था, कि क्षेत्र में पाकिस्तान के साथ अमेरिका के द्विपक्षीय संबंध के काफी महत्व हैं।

यानि, मतलब ये हुआ, कि चूंकी अमेरिकी अधिकारी ने कह दिया, कि पाकिस्तान के साथ अमेरिका के द्विपक्षीय संबंध के महत्व हैं, इसीलिए फौरन पाकिस्तान ने कह दिया, कि चलो इसी बात पर पैसे दे दो।

पाकिस्तान ने फैलाया कटोरा

अमेरिका में पाकिस्तान के दूत मसूद खान ने वाशिंगटन में एक सेमिनार में कहा, कि "यह महत्वपूर्ण है, कि अमेरिका-पाकिस्तान के लिए - विदेशी सैन्य वित्तपोषण और विदेशी सैन्य बिक्री को बहाल करे, जिसे पिछले प्रशासन द्वारा निलंबित कर दिया गया था।"

दक्षिण और मध्य एशिया के लिए अमेरिकी प्रधान उप सहायक विदेश मंत्री, एलिजाबेथ होर्स्ट ने, हालांकि, परेशान पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था के पुनर्निर्माण में मदद करने की आवश्यकता पर ध्यान केंद्रित किया और इस्लामाबाद से अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के साथ काम करने का आग्रह किया।

उन्होंने कहा, कि "पाकिस्तान और आईएमएफ जिन सुधारों पर सहमत हुए हैं, वे आसान नहीं हैं। लेकिन यह महत्वपूर्ण है, कि पाकिस्तान देश को मजबूत वित्तीय स्तर पर वापस लाने के लिए ये कदम उठाए, आगे कर्ज में गिरने से बचें और पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाएं।"

यानि, अमेरिकी अधिकारी ने पाकिस्तान के मुंह पर कह दिया, कि आईएमएफ की शर्तें गंभीर होकर पूरा कीजिए, अब खैरात नहीं मिलेगी।

पाकिस्तान हो चुका है बेनकाब

पाकिस्तान पिछले कई सालों से अफगानिस्तान में डबल गेम खेलता आया था और उसे लग रहा था, कि वो अमेरिका को बेवकूफ बना रहा है। लेकिन, अफगानिस्तान से अमेरिका की वापसी के बाद से, अमेरिका ने पाकिस्तान को भाव देना पूरी तरह से बंद कर दिया है।

इसके अलावा, चीन के साथ मिलकर पाकिस्तान, अमेरिकी हितों को भी नुकसान पहुंचा रहा है, लिहाजा अमेरिका में अब पाकिस्तान को 'धोखेबाज' के तौर पर देखा जाने लगा है, लिहाजा अमेरिका ने पाकिस्तान की मदद करनी पूरी तरह से बंद कर दी है। स्थिति ये है, कि बाइडेन के कार्यकाल के करीब ढाई साल हो चुके हैं, लेकिन अभी तक उन्होंने पाकिस्तान के प्रधानमंत्रियों से बात तक नहीं की है।

पाकिस्तान ने चीन और अमेरिका, दोनों नावों पर सवारी करने की कोशिश की, लेकिन इस चक्कर में वो दोनों शक्तियों के बीच पिसने लगा है और आईएमएफ की तरह से लगाए गये दर्जनों कठोर शर्तें इस बात का उदाहरण है।

हालांकि, शहबाज शरीफ ने प्रधानमंत्री बनने के बाद अमेरिका के साथ संबंधों को सुधारने की काफी कोशिश की है और विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो की एक मुलाकात अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन से भी हुई है, लेकिन अमेरिका से अभी तक पाकिस्तान को आर्थिक मदद को लेकर कोई आश्वासन नहीं मिला है।

फिर से जम्मू-कश्मीर का रोना रोया

हालांकि, भीख मांगते मांगते पाकिस्तान के राजदूत कश्मीर का रोना नहीं भूले और उन्होंने कश्मीर को लेकर अमेरिका से भारत और पाकिस्तान के बीच दखल देने की मांग की।

पाकिस्तानी राजदूत ने कहा, कि "हम भारत और पाकिस्तान के बीच अमेरिका के इंगेजमेंट को महत्व देते हैं, लेकिन इससे परे, अमेरिका जम्मू और कश्मीर विवाद को हल करने में मदद करने के लिए एक उत्प्रेरक के रूप में काम कर सकता है, जिसने इस क्षेत्र को युद्ध के कगार पर खड़ा कर दिया है।"

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