पाकिस्तान ने की थी सऊदी अरब-UAE को बदनाम करने की कोशिश, खुलासे के बाद हड़कंप
पाकिस्तान ने सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात को बदनाम करने की कोशिश थी और पाकिस्तान के निशाने पर प्रिंस सलमान थे।
तेल अवीव, नवंबर 17: पाकिस्तान को छोड़कर भारत का साथ देने वाले सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के खिलाफ पाकिस्तान ने 'झूठी जानकारी' फैलाकर इन दोनों देशों को बदनाम करने की कोशिश की है। ताजा खुलासा हुआ है कि, पिछले दिनों भारत में असम में अतिक्रमण हटाने को लेकर जो हिंसा हुई थी, उसको लेकर भी पाकिस्तान ने भारत के साथ साथ सऊदी अरब और यूएई के खिलाफ दुष्प्रचार अभियान चलाया था। रिपोर्ट में सबसे सनसनीखेज खुलासा ये हुआ है कि, निशाने पर सीधे तौर पर सऊदी प्रिंस सलमान थे और इस खुलासे के बाद सनसनी फैल गई है और माना जा रहा है कि, सऊदी अरब पाकिस्तान के खिलाफ बड़ी कार्रवाई कर सकता है।

सऊदी और यूएई के खिलाफ कैंपेन
डिस इंफो लैब की नई रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि पाकिस्तान ने सीधे तौर पर सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के खिलाफ कैम्पेनिंग की है, जिन्होंने इसी महीने पाकिस्तान को 4 अरब डॉलर की मदद की है। इटली के सलाहकार और जियो स्ट्रैटजी विशेषज्ञ सर्जियो रेस्टेली ने टाइम्स ऑफ इजरायल में लिखे गये एक लेख में खुलासा किया है कि, पाकिस्तान ने आश्चर्यजनक तौर पर सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के खिलाफ भारी दुष्प्रचार किया है और उन देशों को बदनाम करने की कोशिश की है, जिनकी वजह से पाकिस्तान का पेट भरता है।

भारतीय उत्पादों के बहिष्कार का ट्रेंड
टाइम्स ऑफ इजरायल की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले महीने ट्विटर पर एक मेड इन इंडिया उत्पादों का बहिष्कार करने का एक ट्रेंड चलाया गया था, जिसमें ज्यादातर ट्वीट्स अरबी में किए गये थे और कुछ ट्वीट्स अंग्रेजी में भी किए गये थे। ट्वीटर पर ये ट्रेंड बहुत हद तक तब्लीगी जमात की घटना के बाद 2019 में #IslamophobiaInIndia की तरह था, जिसमें भी अरबी भाषा में ट्वीट किए थे और ये दिखाने की कोशिश की गई थी, कि अरब देशों में भारत के खिलाफ गुस्सा पनप रहा है। रिपोर्ट लिखने वाले सर्जियो रेस्टेली ने लिखा है कि, ये अभियान उस वक्त चलाया गया है, जब अरब देश मजहबी बदलाव के दौर से गुजर रहा है और सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात ऐसे फैसले ले रहे हैं, जिनसे देश में कट्टरपंथ को खत्म किया जा सके। रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि, पाकिस्तान के अंदर से इस तरह के ट्रेंड इस तरह से चलाए गये हैं, ताकि ये महसूस हो, कि ये ट्रेंड अरब देशों से भारत के खिलाफ चलाए जा रहे हैं।

पाकिस्तान का नया गठजोड़
रिपोर्ट के मुताबिक, इस्लामोफोबिया के नाम पर पाकिस्तान एक नया ब्लॉक तैयार करने की कोशिश कर रहा है, जिसमें उसके साथ कतर और तुर्की हैं और ये तीनों देश मुस्लिम ब्रदरहुड के नाम पर कतर को इस्लामिक कट्टरपंथियों के लिए नया अड्डा बनाने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं, जो देश इनके खिलाफ हैं, उन देशों में मजहबी उन्माद भरने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि वो देश दबाव में आकर इनकी बात मानने को तैयार हो जाए। रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि, तालिबान ने अपनी अंतरिम सरकार के उद्घाटन समारोह के लिए कतर, तुर्की और पाकिस्तान को क्यों आमंत्रित किया था, जबकि तालिबान ने बड़े मुस्लिम देश सऊदी अरब और यूएई को क्यों छोड़ दिया, जिन्होंने 1996 में अफगानिस्तान में बनी तालिबान की सरकार का समर्थन किया था।

सऊदी अरब-यूएई असली निशाना
रिपोर्ट में लेखक ने डिस इंफो लैब की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा है कि, पाकिस्तान द्वारा चलाए जा रहे इस ट्रेंड में भारत सिर्फ एक एंगल है, बल्कि असली निशाना सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात हैं और इस अभियान का एकमात्र मकसद भारत नहीं है। कतर-तुर्की-पाकिस्तान गठबंधन पिछले कुछ समय से सऊदी अरब और यूएई को निशाना बना रहा है। इस्लामिक दुनिया के नेता होने के उनके 'अधिकार' पर सवाल उठा रहा है। लेखक के अनुसार, मुख्य उद्देश्य तुर्की के नेता एर्दोगन के लिए उम्मा के सही नेता के रूप में मार्ग प्रशस्त करने के लिए क्राउन प्रिंस को बदनाम करना है। इसके अलावा, डिस इंफो की रिपोर्ट बताती है कि, इस आर्थिक बहिष्कार के लिए अकेले भारत को लक्षित नहीं किया गया था, बल्कि इस अभियान में फ्रांस को भी निशाना बनाया गया था और फ्रांसीसी सामानों के बहिष्कार की भी अपील की गई थी।

2018 से पाकिस्तान कर रहा प्रोपेगेंडा
समाचार एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, डिसइंफो लैब की रिपोर्ट के आधार पर टाइम्स ऑफ इजरायल में लिखे गये लेख में रेस्टेली ने कहा है कि, "यह प्रोपेगेंडा 2018 में शुरू किया गया था, और तब से मुस्लिम ब्रदरहुड के लिए इस तरह के दुष्प्रचार अभियान को धीरे-धीरे गति देने के उद्देश्य से शुरू करना एक वार्षिक कार्यक्रम बन गया है।" रिपोर्ट के मुताबिक, इस तरह के अभियान को शुरू करने वाले कई ज्यातातर ट्विटर हैंडल पाकिस्तान और तुर्की से चलाए जाते हैं, ताकि मुस्लिम ब्रदरहुड के नाम पर जनता को एक कर सके और सऊदी अरब क्राउन प्रिंस पर दबाव बनाया जा सके।

दुष्प्रचार के खिलाफ ध्यान देने की जरूरत
रिपोर्ट में अलर्ट जारी करते हुए कहा है कि, ये खिलाड़ी आतंकवाद, कट्टरपंथ और इस्लामवाद को हथियार बनाकर लोगों को उकसाने का काम करते रहेंगे, लिहाजा भारत, इजराइल, यूएई और सऊदी अरब जैसे देशों को अब दुष्प्रचार का मुकाबला करने और अपनी अर्थव्यवस्थाओं की रक्षा करने के लिए क्षमता विकसित करने की जरूरत है, ताकि इन देशों के मंसूबे को धाराशाई किया जा सके।












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