इमरान खान के कहने पर राष्ट्रपति फिर तोड़ेंगे संविधान? पाकिस्तान में कभी भी कर सकते हैं चुनाव का ऐलान

Pakistan News: सामान्यत: लोकतांत्रिक देशों में ये देखा जाता है, कि चुनाव आयोग देश में चुनाव की तारीखों की घोषणा करता है, लेकिन चूंकी पाकिस्तान एक बनाना रिपब्लिक है, लिहाजा वहां की राजनीति में कुछ भी हो सकता है। पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स ने सूत्रों के हवाले से कहा है, कि राष्ट्रपति आरिफ अल्वी, किसी भी वक्त पाकिस्तान में चुनाव की तारीखों का ऐलान कर सकते हैं।

ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक,अंदरूनी सूत्रों ने सोमवार को बताया है, कि राष्ट्रपति डॉ आरिफ अल्वी "किसी भी समय" आम चुनाव की तारीख की घोषणा कर सकते हैं, जिससे देश में एक और संवैधानिक संकट की चिंता बढ़ गई है।

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राष्ट्रपति करेंगे चुनाव की घोषणा!

पाकिस्तान के राष्ट्रपति के रूप में आरिफ अल्वी का पांच साल का कार्यकाल शुक्रवार को समाप्त हो गया है, जिसके बाद इस बात पर अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं, कि वह अपनी भूमिका में कैसे बने रहेंगे। संविधान के मुताबिक, आरिफ अल्वी नए राज्य प्रमुख के चुनाव तक राष्ट्रपति बने रह सकते हैं।

घड़ी की टिक टिक के साथ, पर्यवेक्षक राष्ट्रपति के अंतिम कदम का इंतजार कर रहे हैं, जिन्होंने कभी-कभी राजनीतिक घटनाओं पर टिप्पणी करने और राजनीतिक संघर्ष में मध्यस्थता करने के साथ-साथ संवैधानिक समय सीमा के भीतर चुनाव के लिए दबाव डालने के लिए अपने कार्यालय का उपयोग करने की कोशिश की है।

सूत्रों से पता चला है, कि राष्ट्रपति चुनाव की तारीख की घोषणा करने पर "अड़े हुए" हैं। उन्होंने कहा कि अगर यही स्थिति बनी रही तो देश एक और संवैधानिक संकट में फंस सकता है।

अंदरूनी सूत्रों ने कहा है, कि आरिफ अल्वी की कानूनी टीम के साथ-साथ पाकिस्तान के अटॉर्नी जनरल ने उन्हें स्पष्ट रूप से सूचित किया है, कि चुनाव अधिनियम में संशोधन के बाद, अब उनके पास चुनाव की तारीखों की घोषणा करने का अधिकार नहीं है।

रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रपति आरिफ अल्वी और कानून मंत्री ने चुनाव पर विचार-विमर्श किया है।

इससे पहले पाकिस्तान के कार्यवाहक संघीय कानून एवं न्याय मंत्री अहमद इरफान असलम ने राष्ट्रपति से मुलाकात की थी। राष्ट्रपति भवन के एक बयान में कहा गया है, कि बैठक में उन्होंने देश में आम चुनावों पर विचार-विमर्श किया है।

सरकारी अधिकारी और राष्ट्रपति के बीच बैठक आम चुनावों के संबंध में चल रहे परामर्श का हिस्सा थी। राष्ट्रपति ने टिप्पणी की, "अच्छे इरादों के साथ परामर्श प्रक्रिया जारी रखना देश में लोकतंत्र के लिए उपयोगी साबित होगा।"

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इमरान खान की पार्टी ने की है अपील

इस बीच, पूर्व सत्तारूढ़ पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) ने एक पत्र में राष्ट्रपति से जल्द से जल्द चुनाव की तारीख की घोषणा करने का आग्रह किया है।

पीटीआई सचिव उमर अयूब खान ने पत्र में आग्रह किया है, कि "इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ पाकिस्तान, 1973 के संविधान के अनुच्छेद 48(5) के तहत, जब राष्ट्रपति नेशनल असेंबली को भंग करते हैं, तो उन्हें आम चुनाव कराने के लिए संसद को भंग करने की तारीख से 90 दिनों के भीतर की तारीख नियुक्त करनी होती है।"

शहबाज की पार्टी ने कहा- गद्दी छोड़ें

इस बीच, पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) की केंद्रीय सूचना सचिव मरियम औरंगजेब ने राष्ट्रपति से अपना कार्यकाल पूरा होने के तुरंत बाद ऐवान-ए-सद्र को खाली करने का आग्रह किया है।

उन्होंने कहा, कि "अपना बैग पैक करें और पीटीआई सचिवालय चले जाएं, क्योंकि आपकी इच्छा सिर्फ आर्थिक और राजनीतिक उथल-पुथल करना ही नहीं, बल्कि देश में संवैधानिक संकट डालने की भी है।"

पार्टी के उप महासचिव अताउल्लाह तरार ने कहा, कि जब भी देश प्रगति के संकेत दिखाता है, पीटीआई इसे अस्थिर करने की कोशिश करती है।

हालांकि, नए राष्ट्रपति के चुनाव के लिए नेशनल असेंबली और चार प्रांतीय विधानसभाओं के गठन की आवश्यकता होती है, जो आगामी आम चुनावों के बाद ही हो सकता है।

बिलावल भी शहबाज पर भड़के

दूसरी तरफ, बिलावल भुट्टो भी अपने पूर्व सहयोगी पार्टी, शहबाज शरीफ की पार्टी पर भड़के हुए हैं और बिलावल भुट्टो ने कहा है, कि 'कुछ पार्टी नहीं चाहती है, कि देश में जल्द चुनाव हों।' बिलावल भुट्टो का ये निशाना सीधे तौर पर शहबाज शरीफ और उनकी पार्टी की तरफ था।

चुनाव की तारीख की घोषणा को लेकर चल रही अटकलों के बीच कार्यवाहक प्रधानमंत्री अनवर-उल-हक काकर ने सोमवार को कहा कि राष्ट्रपति को ऐसा करने का अधिकार नहीं है और पाकिस्तान चुनाव आयोग (ईसीपी) इस संबंध में निर्णय करेगा।

कक्कड़ ने एक निजी टेलीविजन को दिए साक्षात्कार में कहा कि संसद ने एक कानून पारित किया है जिसके अनुसार ईसीपी को नए चुनावों की तारीख की घोषणा करने की शक्ति है। लेकिन, पाकिस्तानी एक्सपर्ट्स का कहना है, कि अगर राष्ट्रपति चुनावी तारीखों का ऐलान करते हैं, तो देश में एक बार फिर से घमासान मच जाएगा। जबकि, कई एक्सपर्ट्स का कहना है, कि शहबाज शरीफ अभी भी चुनाव करवाने करे मूड में नहीं हैं, क्योंकि उनके दिल में अभी भी इमरान खान का डर भरा हुआ है।

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