'भारत पाकिस्तान के साथ 'शांति नहीं' की नीति पर काम कर रहा है', PAK राष्ट्रपति का बड़ा आरोप
जब भारत ने कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने की घोषणा की, उसके बाद भारत और पाकिस्तान के बीच के संबंध काफी खराब हो गये और बौखलाए हुए पाकिस्तान ने भारत के साथ सभी तरह के द्विपक्षीय व्यापार को सस्पेंड कर दिया।
Pakistan News: पाकिस्तान की लाख कोशिशों के बाद भी भारत तब तक दोस्ती के लिए हाथ बढ़ाने को तैयार नहीं है, जब तक पाकिस्तान आतंकवाद के रास्ते पर चलना बंद नहीं कर दे और मोदी सरकार ने इस नीति को और सख्त कर दिया है, लिहाजा पाकिस्तान काफी झल्लाया हुआ रहता है। अब पाकिस्तान के राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने गुरुवार को भारत पर उनके देश पाकिस्तान के साथ सहयोग की अनदेखी कर 'शांति नहीं' रखने की नीति का पालन करने का आरोप लगाया है।

पाकिस्तानी राष्ट्रपति ने क्या कहा?
पाकिस्तान के राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि, "पाकिस्तान अपने सभी मोर्चों पर समाधान निकालने की कोशिश कर रहा है, और खेद है कि भारत पाकिस्तान के साथ दोस्ती और सहयोग की तरफ बढ़ने की कोशिश नहीं कर रहा है। पाकिस्तानी राष्ट्रपति ने कहा कि, "भारत की ये पॉलिसी पाकिस्तान के साथ शांति कायम करने की नहीं है।" हालांकि, भारत कई बार कह चुका है, कि "भारत ने कहा है कि वह आतंकवाद, शत्रुता और हिंसा से मुक्त वातावरण में पाकिस्तान के साथ सामान्य पड़ोसी संबंध चाहता है"। आपको बता दें कि, भारत और पाकिस्तान के बीच संबंध अक्सर कश्मीर मुद्दे और पाकिस्तान से आने वाले सीमा पार आतंकवाद को लेकर तनावपूर्ण रहे हैं। हालांकि, जब भारत ने कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने की घोषणा की, उसके बाद भारत और पाकिस्तान के बीच के संबंध काफी खराब हो गये और बौखलाए हुए पाकिस्तान ने भारत के साथ सभी तरह के द्विपक्षीय व्यापार को सस्पेंड कर दिया। हालांकि, बाद में जाकर पाकिस्तान ने कई बार व्यापार बहाली की कोशिश की है, लेकिन वो ऐसा करने में कामयाब नहीं हो पाया है। भारत के फैसले पर पाकिस्तान ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी, और पाकिस्तान ने भारत के साथ राजनयिक संबंधों को कम करते हुए भारतीय दूत को निष्कासित कर दिया था।

अपनी नीति पर स्पष्ट है भारत
भारत ने बार-बार पाकिस्तान से कहा है, कि जम्मू और कश्मीर "हमेशा के लिए (भारत का) था, है और अभिन्न अंग बना रहेगा।" वहीं, अपने संबोधन में आरिफ अल्वी ने कहा कि, अंतरराष्ट्रीय कूटनीति संघर्षों को रोकने की कोशिश में एक प्रमुख उपकरण हो सकती है, और उन्होंने उभरते हुए देशों को वीटो अधिकार देने के विचार का विरोध किया। उनका मकदस भारत की वीटो हासिल करने की प्रक्रिया का विरोध करना था। इसके साथ ही उन्होंने वैश्विक व्यवस्था नियम और नीति आधारित बनाने का आह्वान किया, ताकि अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा विनाशकारी परिणाम तक ना पहुंचे। इसके साथ ही पाकिस्तानी राष्ट्रपति ने कहा कि, परमाणु अप्रसार एक अच्छी अवधारणा है, लेकिन उन्होंने सवाल करते हुए पूछा कि, "जिम्मेदार देश अपने परमाणु जखीरे को कम या खत्म क्यों नहीं करते"। उन्होंने कहा कि शस्त्र नियंत्रण का नेतृत्व बड़ी शक्तियों द्वारा किया जाना चाहिए।












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