Pakistan: शहबाज शरीफ ने PM मोदी को दी तीसरे कार्यकाल पर बधाई, एक लाइन के संदेश से सुधरेंगे संबंध?
Shehbaz Sharif congratulates PM Narendra Modi: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सोमवार को अपने भारतीय समकक्ष नरेंद्र मोदी को लगातार तीसरी बार भारत के प्रधानमंत्री चुने जाने पर बधाई दी है, लेकिन शहबाज शरीफ का बधाई संदेश सिर्फ एक लाइन का था।
शहबाज शरीफ ने नरेन्द्र मोदी को कुछ उसी अंदाज में बधाई दी है, जैसी बधाई नरेन्द्र मोदी ने शहबाज शरीफ के प्रधानमनंत्री चुने जाने के बाद दी थी, लिहाजा सवाल उठ रहे हैं, कि क्या भारत और पाकिस्तान के बीच फिलहाल संबंध सुधरने के कोई आसार नहीं है?

प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "भारत के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेने पर नरेन्द्र मोदी को बधाई।" प्रधानमंत्री मोदी के लिए उनका यह संदेश, चीन की पांच दिवसीय यात्रा के समापन के एक दिन बाद आया है, जहां उन्होंने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की और इस्लामाबाद में ज्यादा निवेश का अनुरोध किया है।
आपको बता दें, कि हाल ही में संपन्न हुए लोकसभा चुनावों में बीजेपी के नेतृत्व वाले गठबंधन ने 543 में से 293 सीटें हासिल की हैं। निचले सदन में बहुमत का आंकड़ा 272 है। और बीजेपी के साथ चुनाव लड़ने वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने मोदी को अपना नेता घोषित किया है। इसके बाद, रविवार को नरेंद्र मोदी ने भारत के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली है।
शहबाज शरीफ को भारत ने नहीं भेजा न्योता
भारत ने मालदीव, बांग्लादेश, श्रीलंका, भूटान, मॉरीशस और नेपाल जैसे पड़ोसी देशों के प्रमुखों को प्रधानमंत्री मोदी के शपथ ग्रहण में आमंत्रित किया था, लेकिन भारत ने इस भव्य समारोह के लिए शहबाज शरीफ को नहीं बुलाया, जिससे पता चलता है, कि पाकिस्तान को लेकर नरेन्द्र मोदी सरकार की विदेश नीति क्या होने वाली है।
पिछले हफ्ते की शुरुआत में जब एक रिपोर्टर ने पाकिस्तान विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मुमताज जहरा बलूच से पूछा था, कि पाकिस्तान ने प्रधानमंत्री मोदी को शुभकामनाएं क्यों नहीं दीं, तो उन्होंने कहा था, कि "चूंकि नई सरकार ने अभी तक आधिकारिक रूप से शपथ नहीं ली है, इसलिए भारतीय प्रधानमंत्री को बधाई देने के बारे में बात करना जल्दबाजी होगी।" उन्होंने कहा था, कि इस्लामाबाद भारत सहित अपने सभी पड़ोसियों के साथ सौहार्दपूर्ण और सहयोगात्मक संबंध चाहता है और बातचीत के जरिए विवादों को सुलझाना चाहता है।
आपको बता दें, कि 2014 में जब भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने भारत के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली थी, तो उस भव्य समारोह में पड़ोसी देशों के नेताओं ने भी हिस्सा लिया था, जिसमें तत्कालीन पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ भी शामिल थे।
हालांकि, इस बार माहौल बिल्कुल अलग है। जैसे ही प्रधानमंत्री पद के लिए मनोनीत मोदी को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का नेता घोषित किया गया, भारत ने अपनी 'पड़ोसी पहले' नीति और 'सागर' विजन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। भारतीय विदेश मंत्रालय ने मालदीव, बांग्लादेश, श्रीलंका, भूटान और नेपाल समेत कई दक्षिण-पूर्वी देशों को इस समारोह के लिए निमंत्रण भेजा, लेकिन उसने अपने निकटतम पड़ोसी पाकिस्तान को यह निमंत्रण नहीं भेजा।
भारत ने पाकिस्तान को फ्रेम से बाहर क्यों रखा?
यह बात ध्यान देने लायक बात है, कि भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्ते हमेशा से ही तनावपूर्ण रहे हैं, सिवाय कुछ मौकों के, जब दोनों देशों के नेता तनाव कम करने के लिए साथ बैठे थे।
इस बार भी, जब नई दिल्ली ने जब मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में जब दक्षिण एशियाई देशों के प्रमुखों को आमंत्रित किया गया, तो मौजूदा पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को निमंत्रण हीं भेजना, कूटनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया। नवाज के छोटे भाई शहबाज शरीफ को निमंत्रण सूची से बाहर रखना दोनों देशों के बीच चल रही कूटनीतिक ठंड को दर्शाता है।
लेकिन, कई मौकों पर भारत ने पाकिस्तान की तरफ रिश्ते सामान्य करने के लिए कदम बढ़ाएं हैं, लेकिन हर बार पाकिस्तान ने भारत को धोखा ही दिया है।
2015 में जब प्रधानमंत्री मोदी ने अपने तत्कालीन पाकिस्तानी समकक्ष नवाज से मिलने के लिए इस्लामाबाद का अचानक दौरा किया था, तो उम्मीद थी, कि द्विपक्षीय संबंधों में सुधार हो सकता है। लेकिन मोदी के पाकिस्तन दौरे के कुछ ही महीनों बाद, पाकिस्तानी आतंकवादियों ने भारतीय सेना के उरी शिविर बेस पर हमला कर दिया, जिसके बाद दोनों देशों के बीच फिर से तनाव पैदा हो गया और भारतीय सेना ने नियंत्रण रेखा के पार कई स्थानों पर सर्जिकल स्ट्राइक की।
फिलहाल स्थिति ये है, कि भारत और पाकिस्तान के बीच कारोबार बंद है और 2022 में, जब शहबाज शरीफ ने इमरान खान को संसद से बाहर किया था, उस वक्त भी उन्होंने अपने भारतीय समकक्ष से संपर्क नहीं किया था और ना ही पीएम मोदी ने ही शहबाज शरीफ से कोई संपर्क किया। लिहाजा, फिलहाल ये कहना मुश्किल है, कि मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में पाकिस्तान के साथ भारत के रिश्ते कैसे होंगे, लेकिन संभावना नहीं के बराबर है, कि दोनों देश बातचीत की तरफ आगे बढ़ेंगे।












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