पीएम बनते ही बड़े संकट में फंसे शहबाज शरीफ, देश में डीजल का स्टॉक खत्म, पाकिस्तान होगा ब्लैकऑउट?
पाकिस्तान के विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है, कि पाकिस्तान अब डीजल की सबसे बड़ी कमी का सामना कर रहा है।
इस्लामाबाद, अप्रैल 20: प्रधानमंत्री बनते ही शहबाज शरीफ के सामने सबसे बड़ी अग्निपरीक्षा आ गई है और पाकिस्तान बहुत बड़ी बिजली संकट में फंसने वाला है। पाकिस्तान के पास मौजूद डीजल का भंडार खत्म होने वाला है और देश में सिर्फ 18 दिनों का ही डीजल बचा हुआ है और सबसे बड़ी दिक्कत ये है, कि पाकिस्तान के पास तेल या कोयला खरीदने के लिए पैसे नहीं बचे हैं।
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बहुत बड़े संकट में फंसा पाकिस्तान
पाकिस्तान की सरकार ने घरों और उद्योगों की बिजली काटना शुरू कर दिया है, क्योंकि बिजली संयत्रों के पास बिजली उत्पादन के लिए डीजल का भंडार काफी कम हो गया है। नकदी की भीषण कमी से जूझ रहे पाकिस्तान के पास अपने बिजली संयंत्रों तक डीजल पहुंचाने के लिए पैसे नहीं हैं। वहीं, नकदी की कमी की वजह से पाकिस्तान ना ही प्राकृतिक गैस खरीदने के काबिल है और ना ही कोयला और ही डीजल।

प्रधानमंत्री को चेतावनी
पाकिस्तान के विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है, कि पाकिस्तान अब डीजल की सबसे बड़ी कमी का सामना कर रहा है। एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने बताया कि, अर्थशास्त्रियों और उद्योग के विशेषज्ञों ने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को चेतावनी दी है, कि देश को अगले महीने फसल कटाई के मौसम में डीजल की सबसे खराब कमी का सामना करना पड़ेगा, क्योंकि कोयले और प्राकृतिक गैस के स्टॉक गिर रहे हैं।

डीजल का स्टॉक हो रहा खत्म
पाकिस्तान सरकार के सूत्रों ने कहा कि, डीजल का स्टॉक तेजी से खत्म हो रहा है, क्योंकि देश के पास सिर्फ 18 दिनों की आपूर्ति ही बची हुई है। देश के सबसे बड़े तेल निर्यातक पाकिस्तान स्टेट ऑयल (पीएसओ) ने पहले निविदा जारी कर डीजल आयात करने का प्रयास किया था, लेकिन किसी भी व्यापारी ने इसमें भाग नहीं लिया। अब, रूस और यूक्रेन युद्ध के बाद वैश्विक बाजार में डीजल की भारी कमी के कारण पीएसओ ने 13 डॉलर की उच्चतम प्रीमियम दर पर एक डीजल कार्गो की व्यवस्था की है।

सरकारी अधिकारी घबराए
रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान की स्थिति देखकर पाकिस्तान सरकार के वरिष्ठ अधिकारी घबराए हुए हैं, क्योंकि आखिरी बार जब पाकिस्तानी इसी तरह के संकट में फंसा था, तो इमरान खान की मदद करने से चीन ने भी इनकार कर दिया था और उस वक्त सऊदी अरब ने पाकिस्तान की मदद की थी। लेकिन, पाकिस्तान ने सऊदी अरब का पैसा अभी तक नहीं लौटाया है, लिहाजा सवाल ये है, कि अब शहबाज शरीफ किस देश के सामने कटोरा लेकर जाएंगे। सूत्रों ने द एक्सप्रेस ट्रिब्यून को बताया कि, विशेषज्ञों ने पीएम शहबाज शरीफ से तेल की कीमतों में वृद्धि करने का आग्रह किया है, ताकि अप्रैल 2022 के केवल एक महीने में लगभग 60 अरब रुपये तक जमा होने वाले और आने वाले वक्त में तेल की कीमत में अचानक बेतहाशा वृद्धि से बचा जाए, लेकिन शहबाज शरीफ ने ऐसा नहीं किया।

क्या करेंगे शहबाज शरीफ?
प्रधानमंत्री बनते ही शहबाज शरीफ को पाकिस्तान सरकार के अधिकारी ने आगाह किया था, कि अगर तेल की कीमतों में वृद्धि की गई, तो कोई विरोध नहीं होगा। लेकिन, अगर डीजल की किल्लत देश में शुरू हो जाएगी, तो फिर पाकिस्तानी बाजार उसे बर्दाश्त करने के काबिल नहीं है और पूरे देश में प्रदर्शन शुरू हो जाएंगे। दिलचस्प बात यह थी, कि तेल उद्योग के कीमतों में अंतर के दावों को निपटाने के लिए सरकार की ओर से कोई मंजूरी नहीं मिली थी। इसके अलावा, पीएम शहबाज ने तेल उद्योग की गंभीर स्थिति के बावजूद तेल की कीमतें बढ़ाने से इनकार कर दिया था। इस पृष्ठभूमि के खिलाफ, पाकिस्तान सरकार ने तेल रिफाइनरियों को डीजल की कमी के संकट से निपटने के लिए स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा देने का निर्देश दिया है। लेकिन, ऐसा करना रिफाइनरियों के लिए संभव नहीं है, लिहाजा पाकिस्तान पर ब्लैकऑउट का खतरा मंडरा रहा है।












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