पाकिस्तान: पेट्रेल के दाम 30 रुपये बढ़े, शहबाज शरीफ की चौतरफा आलोचना, क्या यह फैसला जरूरी था?
पाकिस्तान के व्यापार और उद्योग जगत के नेताओं ने देश में उत्पादन की लागत में वृद्धि के कारण पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 30 प्रति लीटर की वृद्धि के लिए शहबाज शरीफ सरकार की जमकर खिंचाई करनी शुरू कर दी है।
इस्लामाबाद, मई 27: पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के आक्रामक रवैये के बीच इस बात की काफी कम उम्मीद थी, कि शहबाज शरीफ की सरकार पेट्रोल की कीमत में 30 रुपये की अचानक बढ़ोतरी कर देगी। ये एक चौंकाने वाला और काफी ज्यादा कठोर फैसला है, जिसकी उम्मीद किसी को नहीं थी और जाहिर, शहबाज शरीफ की चौतरफा आलोचना की जा रही है। हालांकि, सरकार की तरफ से कहा गया है कि, लोगों के लिए एक राहत पैकेज का ऐलान किया जाएगा, लेकिन, सवाल ये उठते हैं, कि क्या सरकार का ये फैसला सही है? और क्या पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए ऐसे कड़े कदम उठाने की जरूरत नहीं थी?
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सरकार की चौतरफा आलोचना
पाकिस्तान के व्यापार और उद्योग जगत के नेताओं ने देश में उत्पादन की लागत में वृद्धि के कारण पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 30 प्रति लीटर की वृद्धि के लिए शहबाज शरीफ सरकार की जमकर खिंचाई करनी शुरू कर दी है। डॉन अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान के बिजनेसमेन ग्रुप (बीएमजी) के चेयरमैन जुबैर मोतीवाला ने पेट्रोलियम कीमतों में बढ़ोतरी के कारण उत्पादन लागत में 5-7 फीसदी की बढ़ोतरी की आशंका जताई है। उन्होंने कहा कि पेट्रोलियम की कीमतों में वृद्धि से माल की खुदरा कीमतों पर भारी असर पड़ेगा, जिससे आम आदमी का जीवन और अधिक दयनीय हो जाएगा और पाकिस्तान में हर एक सामान की कीमत में भारी इजाफा होगा। डॉन अखबार ने मोतीवाला के हवाले से कहा कि, ‘पेट्रोल और डीजल में 30 रुपये प्रति लीटर की उछाल लोगों और उद्योग जगत के लिए काफी मुश्किलें पैदा करेगा'। उन्होंने कहा कि, सरकार को कम से कम दो चरणों में पेट्रोलियम पदार्थों की कीमत में बढ़ोतरी करनी चाहिए थी।

‘पाकिस्तानी जनता पर बम गिरा’
पाकिस्तान जनता शहबाज शरीफ के इस फैसले का काफी कड़ा विरोध कर रही है और लोगों का कहना है कि, सरकार ने उनके ऊपर बम गिरा दिया है। वहीं, जुबैर मोतीवाला ने कहा कि, ‘सरकार को उपभोक्ताओं के साथ-साथ औद्योगिक क्षेत्र को सीधा झटका देने के बजाय चरणों में पेट्रोलियम की कीमतों में वृद्धि करनी चाहिए थी... मैं और अधिक कठिन दिनों की भविष्यवाणी करता हूं जब सरकार बिजली और गैस टैरिफ बढ़ाने जैसी अन्य आईएमएफ शर्तों को पूरा करेगी। सर्कुलर ऋण को कम करना और सब्सिडी को हटाएगी'। आपको बता दें कि, आईएमएफ की दूसरी शर्तों के मुताबिक, पाकिस्तान सरकार को बिजली की कीमतें बढ़ानी होगीं और किसानों को दी जाने वाली सब्सिडी खत्म करनी होगी। हालांकि, पेट्रोलियम पदार्थों की कीमत बढ़ने के बाद आईएमएफ के साथ कर्चमारी स्तरीय समझौते के समपन के रास्ते में आई एक बड़ी बाधा अब दूर हो जाएगी।

पाकिस्तानी जनता का क्या होगा?
पाकिस्तानी जनता का क्या होगा, ये सवाल पाकिस्तानी जनता के लिए काफी डराने वाला है, क्योंकि देश पहले से ही महंगाई की चक्की में पिस रहा है और अब 30 रुपये पेट्रोल की कीमत बढ़ने का मतलब है, महंगाई में बेतहाशा वृद्धि होना। शहबाज सरकार ने पेट्रोलियन पदार्थों की यह मूल्य वृद्धि दोहा में पाकिस्तान सरकार और आईएमएफ के बीच बातचीत के बाद की है। इन चर्चाओं का उद्देश्य पाकिस्तान के लिए अपने 6 अरब अमरीकी डॉलर के कार्यक्रमों की आईएमएफ की सातवीं समीक्षा के समापन पर नीतियों पर एक समझौता करना था, जो अप्रैल की शुरुआत से रुका हुआ है।

आईएमएफ की शर्तें पूरा करता पाकिस्तान
सत्ता से बेदखल होने से ठीक पहले इमरान खान ने आईएमएफ की शर्तों को तोड़ दिया था और उन्होंने बिजली पर भारी सब्सिडी दे दी थी, जिसके बाद आईएमएफ ने 6 अरब अमरीकी डालर के कार्यक्रम को पुनर्जीवित करने से इनकार कर दिया था और कहा था, कि, यदि पाकिस्तान वित्तीय रूप से अस्थिर ईंधन और बिजली सब्सिडी को हटाने में विफल रहता है, तो उसे कर्ज की आगे की किश्त नहीं दी जाएगी। वहीं, आईएमएफ मे शहबाज शरीफ की सरकार को वार्ता जारी रखने की सीमा हटाने के लिए दो दिन का समय दिया था। वहीं, इस फैसले के बाद हालांकि पाकिस्तान में महंगाई के ग्राफ में अचानक भारी उछाल आएगा, लेकिन अब पाकिस्तान को आईएमएफ से करीब 900 मिलियन डॉलर की रकम भी मिल सकेगी।

आईएमएफ लोन मिलने से क्या होगा?
डॉन अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, आईएमएफ का लोन मिलने से पाकिस्तान को फौरी तौर पर कई फायदे होंगे, जिसके तहत पाकिस्तान अपने कर्ज चुका सका है और आईएमएफ से कर्ज मिलने के बाद पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़ोतरी होगी और पाकिस्तानी मुद्रा की वैल्यू में सुधार होगा, जिससे एक्सचेंज रेट सही होगा। वहीं, पाकिस्तानी रुपये का वैल्यू अमेरिकी डॉलर के मुकाबले सुधरेगा, जो अभी 200 के स्तर को पार कर चुका है। वहीं, पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद पाकिस्तानी शेयर बाजार में खुलने के साथ ही 800 अंकों का उछाल देखा गया है। वहीं, बाजार में ये संदेश भी गया है कि, सरकार आने वाले दिनों में और सख्त फैसले लेने में सक्षम है। लेकिन, पाकिस्तान के आर्थिक विशेषज्ञ सरकार के इस फैसले पर अलग अलग राय रखते हैं।

‘राजकोषिय प्रबंधन को पहुंच रहा था नुकसान’
पाकिस्तान के वरिष्ठ बिजनेस जर्नलिस्ट मेहताब हैदर का मानना है कि पाकिस्तान के लिए सब्सिडी वापस लेना बहुत महत्वपूर्ण था क्योंकि इससे देश के वित्तीय प्रबंधन को नुकसान हो रहा था। जियो डॉट टीवी से बात करते हुए हैदर ने कहा कि आईएमएफ ने इस्लामाबाद को स्पष्ट रूप से बता दिया था, कि अगर सरकार सब्सिडी को हटाने में विफल रही तो वह पाकिस्तान के लिए अपने बहुत जरूरी कार्यक्रम को फिर से शुरू नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि, "अभी भी, सरकार ने आईएमएफ द्वारा निर्धारित शर्तों को सिर्फ आंशिक रूप से स्वीकार किया है। इसलिए, सरकार के लिए अंतर्राष्ट्रीय निकाय कार्यक्रम को पुनर्जीवित करना एक बड़ा टास्क होगा, क्योंकि इसके बिना, पाकिस्तान बहुत बड़े जोखिम में फंस जाएगा'। उन्होंने कहा कि, पाकिस्तानी विदेशी मुद्रा भंडार बुरी तरह से नीचे कर रहा है। हालांकि, उन्होंने कहा कि, ‘सरकार द्वारा अब तक दी जा रही सब्सिडी के कारण देश अमेरिकी डॉलर के मुकाबले पाकिस्तानी रुपये पर बढ़ते दबाव को देख रहा था'।

शहबाज सरकार का सही फैसला?
पाकिस्तान के प्रमुख आर्थिक विशेषज्ञ और बैंकर सैयद अली सज्जाद ने कहा कि आईएमएफ कार्यक्रम रूकने की वजह से पाकिस्तान एक ऐसी स्थिति में आ रहा था, जहां स्थिति तेजी से बिगड़ सकती थी और पेट्रोल की कीमत में बढ़ोतरी का सरकार का फैसला सही दिशा में उठाया गया एक कदम है। सज्जाद ने जियो टीवी को बताया कि, ‘यह आईएमएफ से सिर्फ 900 मिलियन डॉलर मिलने का सवाल नहीं है, बल्कि अगर एक बार आईएमएफ से अगर इसे मंजूरी मिलती है, तो अन्य ऋणदाता भी पाकिस्तान को ऋण प्रदान करेंगे। इस प्रकार, आईएमएफ के कार्यक्रम के पुनरुद्धार के लिए सब्सिडी को हटाना जरूरी था।" उन्होंने उम्मीद जताई कि सब्सिडी खत्म होने से चालू खाता स्थिरता की ओर बढ़ेगा। लेकिन, पाकिस्तान के लोगों का कहना है कि, पाकिस्तान की ऐसी स्थिति नेताओं और सरकारों की गलत नीतियों की वजह से हुई और उसका खामियाजा वो क्यों भुगते?












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