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अमेरिका में तेजी से पांव पसार रहा है पाकिस्तान समर्थित खालिस्तानी ग्रुप, सरकार नहीं ले रही एक्शन- रिपोर्ट

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वॉशिंगटन, सितंबर 15: पाकिस्तान से मदद पाकर खालिस्तान समर्थिक ग्रुप अमेरिका में तेजी से अपने पांव पसार रहा है। रिपोर्ट है कि अमेरिका में कई खालिस्तान समर्थक संगठन खड़े हो चुके हैं और वो तेजी से अपना विस्तार करने में लगे हैं। इन संगठनों को पाकिस्तान से भरपूर मदद दी जाती है, जिससे वो भारत के खिलाफ प्रोपेगेंडा को अंजाम दे रहे हैं। लेकिन, सबसे हैरानी की बात ये है कि कई रिपोर्ट्स सामने आने के बाद भी अमेरिका की सरकार ऐसे संगठनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं कर रही है। (सभी तस्वीर फाइल)

अमेरिका में खालिस्तान

अमेरिका में खालिस्तान

अमेरिका की एक प्रमुख थिंक टैंक के अधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि खालिस्तान समर्थक संगठन काफी तेजी से अमेरिका में अपना विस्तार कर रहे हैं, लेकिन अमेरिका की सरकार इस खतरे को पूरी तरह से अनसुना कर रही है, जो काफी खतरनाक है। अमेरिकी थिंक टैंक ने अमेरिका में मौजूद ऐसे लोगों, उनके एक्शन, उनके संगठनों पर तत्काल सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि खालिस्तान समर्थकों को उन्हीं लोगों का समर्थन प्राप्त हो रहा है, जिन्होंने कश्मीर में अलगाववादियों का समर्थन किया था और उन्हें मदद पहुंचाई थी। यानि पाकिस्तान। हडसन यूनिवर्सिटी द्वारा प्रकाशित की गई एक रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान इन संगठनों को मदद पहुंचा रहा है और अमेरिका की धरती पर खालिस्तान और कश्मीर अलगाववादी समूह अपना विस्तार करने में लगे हुए हैं।

थिंक टैंक ने जताई गहरी चिंता

थिंक टैंक ने जताई गहरी चिंता

हडसन इंस्टीट्यूट थिंक-टैंक द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट में कहा गया है कि, "अमेरिकी सरकार भारत से चलने वाले अलगाववादी आंदोलनों को अनुमति नहीं दे सकती है, जिसमें आतंकवादी और आतंकवादी समूहों से संबंध रखने वाले लोग भी शामिल हैं, जो कानून का पालन करने वाले सिख समुदाय के बीच अनियंत्रित हो जाते हैं।" मंगलवार को इस रिपोर्ट को प्रकाशित किया गया है, जिसका शीर्षक "पाकिस्तान की अस्थिरता प्लेबुक: अमेरिका में खालिस्तानी सक्रियता" है। इस रिपोर्ट को दक्षिण एशिया के प्रमुख विशेषज्ञों हुसैन हक्कानी, क्रिस्टीन फेयर, अपर्णा पांडे, सैम वेस्ट्रॉप, सेठ ओल्डमिक्सन और माइकल रुबिन द्वारा संयुक्त तौर पर लिखा गया है।

रिपोर्ट में चिंता वाली कई बातें

रिपोर्ट में चिंता वाली कई बातें

अमेरिकी थिंक टैंक की रिपोर्ट में कहा गया है कि, ''इस्लामी चरमपंथी संगठनों की तरह ही कई खालिस्तान समर्थक ग्रप्स का निर्माण हो रहा है, लिहाजा ऐसे चमरपंथियों से सख्ती से निपटना चाहिए और उग्रवाद या 'शहादत' के लिए भर्ती या धन उगाहने की अनुमति अमेरिकी धरती पर नहीं दी जानी चाहिए, भले ही वे भारत में हिंसा नहीं कर रहे हों। अमेरिकी अधिकारियों को स्पष्ट रूप से शांतिपूर्ण खालिस्तान समर्थक सक्रियता को भारत के पंजाब राज्य में हिंसा की एक नई लहर का दूत नहीं बनने देना चाहिए। इस रिपोर्ट में अमेरिका से बिना किसी देरी के "खालिस्तान आंदोलन के गैरकानूनी विदेशी फंडिंग की संभावना" की जांच करने का आह्वान किया गया है। और चेतावनी देते हुए कहा है कि, जिस तरह से कश्मीर अमेरिकी परिषद (केएसी) के मामले में लापरवाही बरती गई, उस तरह की लापरवाही बिल्कुल भी नहीं बरतनी चाहिए।

क्या था कश्मीर अमेरिकी परिषद मामला

क्या था कश्मीर अमेरिकी परिषद मामला

आपको बता दें कि 2011 में एफबीआई की तरफ से कहा गया था कि केएसी और उसके संस्थापक सैयद गुलाम नबी फई ने कश्मीर को लेकर अमेरिका में कई सालों से लॉबिंग की, जिसे पाकिस्तान और पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई की तरफ से कम से कम 3.5 मिलियन डॉलर दिए गये। जिसकी बदौलत उसने कई सालों तक भारत विरोधी गतिविधियों को अंजाम दिया था। बाद में उसे चोरी करने और टैक्स में हेराफेरी करने के आरोप में जेल भेज दिया गया था। फई ने अपनी रिहाई के बाद फिर से अपनी गतिविधियों को शुरू कर दिया है, और सिखों के प्रदर्शनों और विरोधों में कई बार देखा गया है, जिसे 2019 में भारत द्वारा प्रतिबंधित कर दिया गया था। इसके संस्थापक नेता गुरपतवंत सिंह पन्नून को भारत ने 2020 में आतंकवादी घोषित कर दिया था।

अमेरिका नहीं कर रहा है कार्रवाई

अमेरिका नहीं कर रहा है कार्रवाई

भारत ने संयुक्त राज्य अमेरिका से उसके खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कहा है, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं मिलने से भारत को निराशा हाथ लगी है। वहीं, वर्तमान डिप्टी अटॉर्नी जनरल और जस्टिस डिपार्टमेंट में नंबर 2, लिसा मोनाको ने एक टीम का नेतृत्व किया था, जिन्होंने 2011 में सहायक अटॉर्नी जनरल के रूप में फाई पर मुकदमा चलाया था। वह इस प्रकार अमेरिका में केएसी जैसे समूहों को पाकिस्तान से मिलने वाली आर्थिक मदद के बारे में काफी अच्छे से जानती हैं। रिपोर्ट में सार्वजनिक रूप से उपलब्ध सामग्री और समाचार पत्रों में प्रकाशित रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए कहा गया है, कि फई ने बाद में केएसी को भंग कर दिया था और विश्व कश्मीरी जागरूकता मंच की स्थापना कर दी थी और पन्नून और उसका प्रतिबंधित संगठन भी पाकिस्तान से जुड़ा हुआ है।

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English summary
The pro-Pakistan Khalistani organization is spreading very fast in America and the US government is not taking action against such organizations.
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