राष्ट्रपति बनना नहीं, बल्कि ये है आसिम मुनीर की अंतिम इच्छा, रिपोर्ट में PAK आर्मी चीफ का बड़ा खुलासा

भारत के पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में इन दिनों आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनीर (Asim Munir) को लेकर कयासबाजियां तेज हैं। माना जा रहा था कि वे भविष्य में राष्ट्रपति पद की दौड़ में उतर सकते हैं। हालांकि, ताजा रिपोर्ट्स कुछ और ही कह रही हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जनरल मुनीर ने इन अटकलों को खारिज करते हुए कहा है कि उनकी कोई राजनीतिक महत्वाकांक्षा नहीं है और वे सिर्फ देश के 'सेवक' बने रहना चाहते हैं।

डेली जंग (Daily Jang) अखबार के सीनियर एडिटर सुहैल वराइच (Suhail Warraich) ने शनिवार को एक आर्टिकल में लिखा कि मुनीर ने अमेरिका की यात्रा के बाद घर लौटते समय ब्रुसेल्स, बेल्जियम में उनसे यही बात कही थी। डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, मुनीर के कार्यालय की ओर से अभी तक कोई पुष्टि या खंडन नहीं आया है, हालांकि वह बेल्जियम में रुके थे।

Asim Munir

राष्ट्रपति बनना नहीं, शहादत है आसिम मुनीर की अंतिम ख्वाहिश
वराइच ने कहा कि मुनीर ने ब्रुसेल्स में एक छोटी सी सभा में मंच पर भी कहा था कि, 'ईश्वर ने मुझे देश का रक्षक बनाया है। मुझे इसके अलावा किसी और पद की इच्छा नहीं है।' मुनीर के हवाले से आगे कहा गया है, 'मैं एक सैनिक हूं और मेरी सबसे बड़ी इच्छा शहादत है।'

अफगानिस्तान को क्यों किया आगाह?
आर्टिकल में कहा गया है कि उन्होंने भारत को 'प्रॉक्सी' के इस्तेमाल से पाकिस्तान की शांति को अस्थिर करने के खिलाफ चेतावनी दी और अफगानिस्तान को 'तालिबान को पाकिस्तान में घुसाने' के खिलाफ आगाह किया। उन्होंने आगे कहा कि पाकिस्तान अमेरिका और चीन के बीच संतुलन बनाए रखेगा। उन्होंने कथित तौर पर जंग (The Jang) के एक कॉलमनिस्ट से कहा, 'हम एक दोस्त के लिए दूसरे दोस्त की बलि नहीं चढ़ाएंगे।'

तख़्तापलट, मार्शल लॉ लागू होने और कब्ज़े के इतिहास को देखते हुए, पाकिस्तान के सैन्य नेता अक्सर राजसी कानाफूसी और मीडिया की अटकलों का विषय होते हैं।

मुनीर की राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी की जगह लेने की कथित इच्छा तब से सुर्खियों में है जब से उन्हें फ़ील्ड मार्शल के पद पर पदोन्नत किया गया था और उन्होंने भारत के खिलाफ सफलताओं का फर्जी दावा किया था, जिसने मई में पहलगाम में एक आतंकवादी हमले के बाद ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ लंच मीटिंग
वह पाकिस्तान के इतिहास में इस पद को प्राप्त करने वाले केवल दूसरे अधिकारी हैं - पहले अयूब खान थे, जिन्होंने पाकिस्तान का शासन संभाला था। फील्ड मार्शल मुनीर की हालिया अमेरिका यात्राओं, जिनमें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ लंच मीटिंग भी शामिल थी। यहीं से अफवाहों को हवा मिली।

एएनआई के अनुसार, वारैच के शनिवार के कॉलम में लिखा था, 'बातचीत राजनीति से शुरू हुई और खासकर उन अफवाहों पर कि पाकिस्तान के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को बदलने की दिशा में काम चल रहा है। जनरल असीम मुनीर ने ब्रुसेल्स बैठक और मेरे साथ दो घंटे लंबी बैठक में स्पष्ट रूप से कहा कि बदलाव की अफवाहें पूरी तरह से झूठी हैं।'

पाकिस्तान के लिए एक 'रोडमैप' है
वारैच ने कहा कि मुनीर ने उन्हें यह भी बताया कि ये अफवाहें न तो नागरिक और न ही सैन्य एजेंसियों द्वारा फैलाई गई हैं। वारैच ने लिखा, 'उन्होंने कहा, 'दरअसल, इसके पीछे ऐसे तत्व हैं जो सरकार और अधिकारियों, दोनों का विरोध करते हैं और राजनीतिक अराजकता पैदा करना चाहते हैं।'

इन अफवाहों का पहले मंत्री मोहसिन नकवी और एक सैन्य प्रवक्ता ने कम से कम दो बार खंडन किया था।कॉलमनिस्ट ने आगे कहा कि मुनीर ने पाकिस्तान को बदलने के लिए एक महत्वाकांक्षी रोडमैप की बात की, खासकर खनिज क्षेत्र में इसकी अप्रयुक्त क्षमता के साथ।

डेली जंग को दिए इंटरव्यू में मुनीर ने कहा, 'पाकिस्तान के पास दुर्लभ पृथ्वी का खजाना है; इस खजाने से पाकिस्तान का कर्ज भी कम हो जाएगा और पाकिस्तान जल्द ही सबसे समृद्ध समाजों में गिना जाएगा।'

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