फादर्स डे पर पाकिस्तानी पत्रकार ने दिखाया बलूचिस्तान की बेटियों का दर्द, सेना की खोली पोल

बलूचिस्तान के मानवाधिकार कार्यकर्ता समीर बलोच ने ट्विटर पर एक वीडियो पोस्ट किया है, जिसमें उन्होंने बलूचिस्तान की उन बेटियों का दर्द दिखाने की कोशिश की है।

इस्लामाबाद, जून 20: पूरी दुनिया में फादर्स डे मनाया जा रहा है और लोग अपने अपने पिता को याद कर रहे हैं, उन्हें शुक्रिया कह रहे हैं, लेकिन बलूचिस्तान की उन बेटियों को अभी भी अपने पिता का इंतजार है, जिन्हें पाकिस्तानी सैनिकों ने जुल्म की बदौलत उनसे छीन लिया है। पाकिस्तान के एक पत्रकार ने बलूचिस्तान की उन बेटियों का दर्द दुनिया के सामने रखा है, जिन्हें पाकिस्तानी फौज ने गायब कर दिया। पाकिस्तान के वरिष्ठ पत्रकार हामिद मीर ने बलूचिस्तान के उन बेटियों के दर्द का वीडियो ट्विटर पर रिट्वीट किया है और परोक्ष तौर पर पाकिस्तानी सेना पर निशाना साधा है।

बलूचिस्तान की बेटियों का दर्द

बलूचिस्तान की बेटियों का दर्द

बलूचिस्तान के मानवाधिकार कार्यकर्ता समीर बलोच ने ट्विटर पर एक वीडियो पोस्ट किया है, जिसमें उन्होंने बलूचिस्तान की उन बेटियों का दर्द दिखाने की कोशिश की है, जो पिछले कई सालों से गायब हैं, और जिनके बारे में कोई खोज-खबर नहीं है। समीर बलूच ने जो वीडियो पोस्ट किया है उसमें बलूचिस्तान की कई छोटी छोटी बच्चियां दिख रही हैं, जो रो रही हैं। वहीं, वीडियो में कई महिलाओं को देखा जा रहा है, जिनके हाथ में गायब हो चुके परिवार के मर्द सदस्यों की तस्वीर है। उन्होंने वीडियो के साथ लिखा है कि पूरी दुनिया में फादर्स डे मनाया जा रहा है, लेकिन बलूचिस्तान की बेटियां अपने पिता की खोज में गलियों पर भटक रही हैं।

हामिद मीर ने साधा सेना पर निशाना

बलूचिस्तान के मानवाधिकार कार्यकर्ता समीर बलूच ने जो बलोच बेटियों का वीडियो पोस्ट किया है, उसे पाकिस्तान के वरिष्ठ पत्रकार हामिद मीर ने रिट्वीट किया है और परोक्ष तौर पर 'देशभक्तों' पर निशाना साधा है। हामिद मीर ने समीर बलूच ने वीडियो को रिट्वीट करते हुए लिखा है कि 'बलोचिस्तान के सैकड़ों बेटे और बेटियां आज किसी से भी हैप्पी फादर्स डे नहीं कह सकते हैं, क्योंकि उनके पिताओं को 'देशभक्तों' के द्वारा अपहरण किया जा चुका है। बिना किसी वारंट के उन्हें घर से उठा लिया गया और उन्हें कभी कोर्ट में पेश ही नहीं किया गया'। माना जा रहा है कि हामिद मीर ने पाकिस्तान की सेना पर सवाल उठाए हैं, क्योंकि बलूचिस्तान में पिछले कई सालों में हजारों बलोचिस्तान के युवाओं को पाकिस्तान की सेना गायब करवा चुकी है। बलूचिस्तान के मानवाधिकार कार्यकर्ता पूरी दुनिया से मदद मांगते हैं, लेकिन उनकी मदद के लिए कोई सामने नहीं आता है।

बलूचिस्तान में पाकिस्तान का दमन

बलूचिस्तान 1947 से पहले तक एक आजाद मुल्क था लेकिन 1947 में पाकिस्तान ने पूरे बलूचिस्तान पर कब्जा जमा लिया था और बलूचिस्तान के लोग लगातार आजादी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। पाकिस्तान की सेना ने बलूचिस्तान पर जुल्म और सितम की हर हद को पार कर दिया और हजारों बलूच नेताओं को मरवा दिया, उन्हें गायब करवा दिया। बलूचिस्तान की आजादी मांगने वाले सैकड़ों कार्यकर्ताओं को पाकिस्तान की सरकार और आर्मी ले बचने के लिए देश छोड़कर भागना पड़ा। अभी भी सैकड़ों बलूच कार्यकर्ता पाकिस्तान की जेलो में बंद हैं या फिर देश छोड़कर भागे हुए हैं।

प्राकृतिक संपदा की लूट

प्राकृतिक संपदा की लूट

बलूचिस्तान में प्राकृतिक गैस और खनिज का भंडार है और पाकिस्तान की सरकार इसीलिए बलूचिस्तान में लूट मचाए हुए हैं। पाकिस्तान की सरकार बलूचिस्तान से लूट मार करती है और बाकी पाकिस्तान की पेट भरती है। बलूचिस्तान के पास जो प्राकृतिक संसंधान हैं, उससे बलूचिस्तान को कोई फायदा नहीं मिलता है। पाकिस्तान ने बलूचिस्तान का भी सौदा चीन के हाथों कर रखा है। बलूचिस्तान से होकर ही सीपीईसी यानि चायना-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर गुजरता है, जो करीब 60 अरब डॉलर का है। बलूचिस्तान के अंदर पाकिस्तान को लेकर भारी नफरत है और पाकिस्तान की सेना दमन के जरिए नफरत को कुचलने की कोशिश करती है।

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