'एक मामूली तारा पास आकर सौरमंडल को कर सकता है तबाह', वैज्ञानिकों ने बताया कब होगा ऐसा?
नई दिल्ली: वैज्ञानिक हमारे सौरमंडल को सबसे आरामदायक और शांत मानते हैं। इसी वजह से पृथ्वी पर जीवन संभव हुआ। पहले सौरमंडल में ग्रहों की संख्या 9 मानी जाती थी, लेकिन रिसर्च के बाद पता चला कि प्लूटो बहुत ज्यादा बौना है। इस वजह से 2006 में इसे ग्रह की श्रेणी से हटाते हुए बौना ग्रह घोषित किया गया था। हाल ही में टोरंटो विश्वविद्यालय के दो शोधकर्ताओं ने सौरमंडल के बारे में विस्तार से रिसर्च की। जिसमें कई बड़ी बातें सामने आईं। (तस्वीरें-नासा से साभार)

सौरमंडल करता है आकाशगंगा की परिक्रमा
ब्रह्मांड में अनगिनत ग्रह और तारे हैं, जो अपने मूल ग्रह की परिक्रम करते रहते हैं। हमारा सौरमंडल भी आकाशगंगा के बाहरी इलाके में स्थित है और उसके केंद्र की परिक्रमा कर रहा है। इसे एक पूरी परिक्रमा करने में लगभग 22.5 से 25 करोड़ वर्ष लग जाते हैं। रिसर्चर्स के मुताबिक अगर भविष्य में कोई गुजरता हुआ तारा हमारे सौरमंडल के बहुत करीब आया, तो सब कुछ तहस-नहस हो जाएगा।

ऐसे करेगा प्रभावित
टोरंटो विश्वविद्यालय के दो शोधकर्ताओं गैरेट ब्राउन और हनो रीन ने इस संभावना का अध्ययन किया है। उन्होंने पाया है कि अगर किसी विदेशी तारे (सौरमंडल के बाहर का) का गुरुत्वाकर्षण कुछ ग्रहों की कक्षाओं को 0.1 प्रतिशत भी कम कर देता है, ये कहर बरपा सकता है। गुजरने वाला तारा सौरमंडल में ग्रहों पर अपना गुरुत्वाकर्षण खिंचाव डाल सकता है। इससे सभी ग्रहों की कक्षाएं बदल जाएंगी और वो एक-दूसरे से टकरा जाएंगे।

कब होती हैं घटनाएं?
रिसर्च में पता चला कि सूर्य और दूसरे तारे के बीच 23 अरब मील की दूरी चीजों को थोड़ा असहज कर सकती है। वैसे तो इंसानों के लिए ये दूरी बहुत ज्यादा लगती है, लेकिन जब हम ब्रह्मांड की बात करते हैं तो ये बहुत ही कम होती है। Proxima Centauri का तारा हमारे ग्रह से 24.8 ट्रिलियन मील दूर है। रिसचर्स के मुताबिक तारे के आने से सौरमंडल को नुकसान होगा, लेकिन ऐसी घटना अरबों-खरबों साल में होती हैं। ऐसे में भी टेंशन की कोई बात नहीं है।

एस्टेरॉयड से कितना खतरा?
दो-चार महीने में कोई ना कोई एस्टेरॉयड पृथ्वी की कक्षा के पास से गुजरता ही रहता है। एस्टेरॉयड ग्रहों की तुलना में काफी छोटे हैं। ये सौरमंडल को तबाह करने की क्षमता तो नहीं रखते, लेकिन इससे पृथ्वी जैसे ग्रह का नुकसान हो सकता है। कहते हैं कि करोड़ों साल पहले कोई बड़ा एस्टेरॉयड या उल्कापिंड पृथ्वी से टकराया था। जिस वजह से डायनासोर का विनाश हुआ। अब इंसानों के पास इनकी निगरानी के लिए हाईटेक उपकरण हैं। जिनसे पता चला कि कई सालों तक किसी एस्टेरॉयड से खतरा नहीं है।












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