Rafale खरीदकर भारत ने बदल दी फ्रांस की किस्मत, दुनिया में खरीदने की लगी रेस, अमेरिकी F-35 को नहीं पूछ रहा कोई!
F-35 Vs Rafale: 'हवा का झोंका' राफेल बवंडर में तब्दील होता जा रहा है। 5वीं पीढ़ी के फाइटर जेट F-35 लाइटनिंग II को एक के बाद एक तगड़े झटके मिल रहे हैं और ऐसी रिपोर्ट है, कि संयुक्त अरब अमीरात के एफ-35 से मुंह मोड़ने के बाद एक और इस्लामिक देश एफ-35 नहीं खरीद पाएगा।
हालांकि, इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह ये है, कि मध्य पूर्व में किसी देश के साथ एफ-35 पांचवी पीढ़ी के लड़ाकू विमान की डील करके अमेरिका, अपने सबसे करीबी सहयोगी इजराइल को नाराज नहीं करना चाहता है। जिसका जबरदस्त फायदा राफेल लड़ाकू विमान को मिल रहा है।

फ्रांसीसी फाइटर जेट राफेल खरीदने में दिलचस्पी दिखाने वाला सबसे नया देश ओमान है, जो रणनीतिक रूप से अरब सागर के पास स्थित है। यमन की सीमा से सटा ओमान अपनी वायु शक्ति को मजबूत करने के लिए राफेल लड़ाकू विमान खरीदने की होड़ में है। रिपोर्टों से पता चलता है, कि अरब देश 18 से 24 फ्रांसीसी लड़ाकू विमान हासिल करना चाह रहा है। ओमान के मौजूदा बेड़े में मुख्य रूप से 24 एफ-16 और 12 यूरोफाइटर टाइफून शामिल हैं।
ओमान खरीद सकता है राफेल फाइटर जेट
राफेल की बहुमुखी प्रतिभा और एडवांस क्षमताएं इसे क्षेत्र में तेजी से बिगड़ते सुरक्षा संदर्भ में ओमान की वायु सेना के लिए एक आकर्षक विकल्प बनाती हैं।
'राफेल क्लब' दुनिया भर में, खासकर खाड़ी में तेजी से विस्तार कर रहा है। कतर और संयुक्त अरब अमीरात के फ्रांसीसी फाइटर जेट हासिल करने के बाद, ओमान ने राफेल के सबसे एडवांस F-4 वेरिएंट में रुचि दिखाई है। इस सौदे को लेकर बातचीत शुरू हो गई है, जबकि एक अन्य अरब देश मिस्र के बेड़े में भी राफेल पहले से ही शामिल है।
धनी खाड़ी देशों को पांचवीं पीढ़ी के F-35 लड़ाकू जेट बेचने की संयुक्त राज्य अमेरिका की उदासी ने डसॉल्ट एविएशन के लिए राफेल लड़ाकू जेट के साथ मिडिल ईस्ट में अपनी स्थिति मजबूत करने का "एक बड़ा मौका पैदा" कर दिया है। इजराइल ने मध्य पूर्वी देशों को F-35 की बिक्री का विरोध किया है, क्योंकि इससे क्षेत्र में सैन्य श्रेष्ठता बनाए रखने का उसका सुरक्षा सिद्धांत कमजोर हो जाएगा।
इजरायली सुरक्षा सिद्धांत ने लंबे समय से अपने पड़ोसियों पर सैन्य श्रेष्ठता को प्राथमिकता दी है। और इसके लिए वो या तो अमेरिका से उसके सबसे एडवांस हथियार खरीद लेता है, या अमेरिका को किसी खाड़ी देश को एडवांस हथियारों की बिक्री होने से रोक देता है।
इसका मतलब डसॉल्ट एविएशन को भारी फायदा हो रहा है। राफेल इस क्षेत्र में एक "हॉट केक" बन गया है क्योंकि कई देश इस लड़ाकू विमान को हासिल करने के लिए कतार में हैं। सऊदी अरब कथित तौर पर राफेल जेट हासिल करने पर भी विचार कर रहा है। फ्रांसीसी मीडिया का दावा है, कि दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा तेल उत्पादक सऊदी अरब, 100 फ्रांसीसी राफेस फाइटर जेट खरीदना चाहता है।
अरब देशों में राफेल खरीदने की लगी रेस
कतर, जिसके बेड़े में पहले से ही 36 राफेल हैं, वो अब अपने मौजूदा बेड़े को F-4 वेरिएंट में अपग्रेड करना चाह रहा है और 2025 तक 24 लड़ाकू जेट का अतिरिक्त ऑर्डर देने पर भी विचार कर रहा है। फ्रांसीसी रक्षा मंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू ने कतर की अपनी हालिया यात्रा के दौरान इसकी पुष्टि की है, जहां दोनों देशों के रक्षा नेताओं ने दुखन एयर बेस पर चर्चा की, जो कतर के 36 राफेल जेट की मेजबानी करता है।
फ्रांसीसी अखबार ला ट्रिब्यून के मुताबिक, खाड़ी देश अपने राफेल जेट को F4 मानक में अपग्रेड करना चाहता है, जो नवीनतम मानक है और हाल ही में फ्रांसीसी वायु सेना में जिसे शामिल किया गया है।
हालांकि, एक वक्त था जब इस राफेल फाइटर जेट के पास मिस्र और कतर से मिले मामूल ऑर्डर के अलावा कुछ नहीं था। राफेल, जिसके नाम का मतलब "हवा का झोंका" होता है, वो बेल्जियम, ब्राजील, कनाडा, फिनलैंड, कुवैत, सिंगापुर और स्विट्जरलैंड से कॉन्ट्रैक्ट जीतने में नाकाम रहा था। और राफेल के नहीं बिकने की सबसे बड़ी वजह इसकी ऊंची कीमत थी।
लेकिन, पिछले दस वर्षों में खेल बदल गया है और फ्रांसीसी नौसेना और वायु सेना के अलावा राफेल खरीदने वाले देशों में मिस्र, कतर, भारत, ग्रीस, इंडोनेशिया, क्रोएशिया और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के बाद सर्बिया भी शामिल हो गया है।
फ्रांस को इस बात की भी उम्मीद है, कि रूस से Su-35 जेट की खरीद रद्द करने के बाद मिस्र अपने राफेल बेड़े में इजाफा करेगा। फिलहाल, मिस्र के पास पहले से ही 54 राफेल लड़ाकू विमान हैं।
डसॉल्ट एविएशन के प्रवक्ता मैथ्यू डूरंड के हवाले से कहा गया है, कि "हमने सोचा कि हल्के और बहुउद्देश्यीय जेट को बेचना आसान होगा। लेकिन अब न केवल फ्रांसीसी लड़ाकू विमानों के मौजूदा उपयोगकर्ता अपने ऑर्डर बढ़ा रहे हैं, बल्कि हमारे पास ओमान, सऊदी अरब, सर्बिया, मलेशिया, इराक, कोलंबिया और बांग्लादेश जैसे कई संभावित ग्राहक भी हैं।"
दुनिया की चौथी सबसे बड़ी भारतीय वायु सेना (आईएएफ) ने 2012 में यूरोफाइटर टाइफून के स्थान पर राफेल को चुना था, जिसने फ्रांसीसी राफेल की किस्मत बदलकर रख दी। भारत से ऑर्डर मिलने के बाद राफेल के पास खरीददारों की लंबी लाइन लग गई। भारत के राफेल खरीदने के बाद यूएई ने 80 राफेल के लिए एक ऐतिहासिक सौदे पर हस्ताक्षर किए हैं।
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