कच्चे तेल में गिरावट, तो क्या हम वैश्विक मंदी की तरफ बढ़ रहे हैं!
वैश्विक मंंदी की आशंकाओं के बीच तेल के दामों में गिरावट दर्ज की गई है। जानकारी के मुताबिक,नार्वे ने तेल के उत्पादन में भारी कटौती की है।
न्यूयॉर्क, 5 जुलाई : संभावित वैश्विक मंदी के कारण मंगलवार को कच्चे तेल (Crude oil) की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। जानकारी के मुताबिक, संभावित वैश्विक मंदी को लेकर बढ़ती चिंताओं, आशंकाओं के बीच ईंधन की मांग में कमी से आपूर्ति में व्यवधान की आशंका थी। जानकारी के मुताबिक, नार्वे ने तेल के उत्पादन में भारी कटौती की है। जानकारी के मुताबिक, ब्रेंट क्रूड डॉलर 1.49 या 1.3 फीसदी गिरकर 112.01 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया।

क्या कच्चे तेल में भारी गिरावट आएगी
बता दें कि, कच्चे तेल की कीमत की चर्चा चारों तरफ हो रही है। कच्चे तेल (Crude Oil Price) के भाव को लेकर दो तरह की बातें कही जा रही है। कुछ जानकारों का कहना है कि अगर ग्लोबल इकोनॉमी मंदी की तरफ आगे बढ़ती है तो आने वाले समय समय कच्चे तेल के भाव में गिरावट आएगी। दूसरी तरफ, कुछ जानकारों का ये भी कहना है कि रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों के कारण क्रूड ऑयल की डिमांड पूरी नहीं हो पा रही है। ऐसे में कच्चे तेल में तेजी जारी रहेगी।
वैश्विक मंदी का खतरा
बता दें कि, नार्वे में हड़ताल के कारण तेल और गैस उत्पादन बाधित होने की आशंका के कारण आपूर्ति की तंगी की चिंताओं को लेकर मंगलवार सुबह एशिया में तेल में तेजी रही। रॉयटर्स के अनुसार, मंगलवार को नॉर्वेजियन अपतटीय श्रमिकों ने एक हड़ताल शुरू की जिससे तेल और गैस उत्पादन कम हो जाएगा। हड़ताल से तेल और गैस के उत्पादन में प्रति दिन 89 हजार बैरल तेल के बराबर कमी होने की उम्मीद है। रॉयटर्स के अनुसार, नॉर्वे के उत्पादन का लगभग 6.5% हिस्सा बुधवार से तेल उत्पादन में प्रति दिन 1 लाख 30 हजार बैरल की कटौती करेगा।
वैश्विक मंदी की आशंका के बीच तेल के दाम
यूएस वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड शुक्रवार के बंद से 15 सेंट या 0.1 फीसदी गिरकर 108.28 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। संयुक्त राज्य अमेरिका में स्वतंत्रता दिवस के सार्वजनिक अवकाश के कारण सोमवार को डब्ल्यूटीआई के लिए कोई समझौता नहीं हो सका। एसपीआई एसेट मैनेजमेंट के स्टीफन इनेस ने इस विषय पर कहा, "तेल अभी भी अपनी मौजूदा मंदी की बीमारी से बाहर निकलने के लिए संघर्ष कर रहा है क्योंकि बाजार मुद्रास्फीति से आर्थिक निराशा की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने आगे कहा कि, गैस और ईंधन की कीमतों में ताजा उछाल ने मंदी की चिंता को और अधिक बढ़ा दिया है।
क्या है दक्षिण कोरिया का हाल
दक्षिण कोरिया में, जून में मुद्रास्फीति लगभग 24 साल के उच्च स्तर पर पहुंच गई, जिससे धीमी आर्थिक वृद्धि और तेल की मांग की चिंता बढ़ गई। आंकड़ों से पता चलता है कि यूरो क्षेत्र में कारोबार की वृद्धि पिछले महीने और धीमी हो गई। आगे की ओर देखने वाले संकेतक बताते हैं कि इस तिमाही में इस क्षेत्र में गिरावट आ सकती है। हालांकि, आपूर्ति की चिंता अभी भी बनी हुई है।
वहीं,दुनिया के शीर्ष तेल निर्यातक सऊदी अरब ने तंग आपूर्ति और मजबूत मांग के बीच एशियाई खरीदारों के लिए अगस्त में कच्चे तेल की कीमतों को रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा दिया। सक्सो बैंक में कमोडिटी स्ट्रैटेजी के प्रमुख ओले हैनसेन ने कहा, "हमें संदेह है कि दूसरी तिमाही के दौरान ऊर्जा बाजार में सुधार अल्पकालिक हो सकता है।
क्या रहेगी स्थिति?
रॉयटर्स की रिपोर्ट में सिटी ग्रुप के हवाले से कहा गया है कि वर्तमान परिस्थिति के आधार पर लग रहा है कि साल 2022 और 2023 में रसियन ऑयल एक्सपोर्ट मजबूत स्थिति में होगी। आने वाले दिनों में कच्चे तेल की मांग में कमी आने की संभावना जताई गई है जिसके कारण इन्वेन्ट्री बहुत ज्यादा बढ़ जाएगा जिसके कारण कीमत पर दबाव बढ़ेगा।
क्रूड ऑयल का औसत भाव कितना रहेगा?
सिटी का अनुमान है कि सितंबर तिमाही तक इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड ऑयल का औसत भाव घटकर 99 डॉलर प्रति बैरल रह जाएगा. दिसंबर तिमाही में यह घटकर 85 डॉलर पर आ जाएगा। साल 2022 के लिए ब्रेंट क्रूड ऑयल का ऐवरेज रेट 98 डॉलर रखा गया है. साल 2023 में तेल का औसत भाव घटाकर 75 डॉलर कर दिया गया है।












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