अब जान बचाने के लिए होगा इमोजी का इस्तेमाल?

इमोजी
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अगर आप किसी मुसीबत में फंसे हों तो क्या किसी को इमोजी भेजेंगे? संभव है कि आपका जवाब 'ना' हो.

लेकिन शोधकर्ताओं को लगता है कि भूकंप जैसी आपात स्थिति में- जहां एक-एक सेकंड कीमती होता है, इमोजी का इस्तेमाल करके बदलाव लाया जा सकता है.

वैज्ञानिकों का एक अंतरराष्ट्रीय समूह भूकंप के लिए इमोजी को यूनिकोड सेट में जोड़ने की तैयारी कर रहा है. यह यूनिकोड सेट दुनियाभर में डिजिटल डिवाइस पर उपलब्ध आइकन का मानक समूह है.

लेकिन क्या मुसीबत की स्थिति में इमोजी के इस्तेमाल से कोई बदलाव आएगा?

इमोजी-क्वेक

इमोजी-क्वेक कैंपेन के संस्थापक और साउथैम्पटन यूनिवर्सिटी के भूकंप विज्ञानी डॉक्टर स्टीफ़न हिक्स कहते हैं, "इससे शायद दुनिया की एक-तिहाई से भी ज़्यादा आबादी को कुछ (भूकंप संबंधी) ख़तरों से अवगत करवाया जा सकता है."

"वास्तव में हम अलग-अलग क्षेत्र के लोगों से उनकी भाषा में संवाद करना चाहते हैं और इमोजी इसका एक बेहतरीन विकल्प है."

https://twitter.com/DisastrousComms/status/1004538119205425152

कैंपेन का मुख्य लक्ष्य है कि वो यूनिकोड में शामिल किए जाने के लिए भूकंप का एक उचित इमोजी डिज़ाइन मुहैया करवाये.

डॉक्टल सारा मैकब्रिज यूनाइटेड स्टेट्स जियोलॉजिकल सर्वे के साथ कम्युनिकेटर स्पेशलिस्ट हैं और इसमें उनका भी योगदान है.

बीबीसी से बातचीत में उन्होंने कहा, "इमोजी, लिखने की सीमा से परे हो सकता है. जिन्हें किसी ख़ास भाषा को पढ़ने में मुश्किल होती है, इसकी मदद से उन्हें किसी महत्वपूर्ण जानकारी पर संवाद करने में आसानी होगी. ये ख़तरे में फंसे लोगों के बीच तेज़ी से संवाद करने में भी मदद करते हैं."

डॉक्टर हिक्स कहते हैं, "भूकंप के साथ एक समस्या ये है कि ये एक बहुत ही आकस्मिक प्रक्रिया है. ये ज्वालामुखी या आंधी-तूफ़ान की तरह नहीं होता, जिसका अनुमान लगाया जा सके."

कई अन्य मौसम और जलवायु से संबंधित घटनाओं में जहां पहले से चेतावनी दी जा सकती है, वहीं भूकंप अचानक आते हैं और आगे बढ़ते हैं.

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डॉक्टर हिक्स बताते हैं, "हो सकता है आपके पास ख़ुद को बचाने के लिए कुछ ही सेकेंड का समय हो. ऐसे में ये इमोजी कई मामलों में जान बचा सकते हैं. अगर आप अलर्ट के रूप में टेक्स्ट मैसेज भेजते हैं, तो वहां आप ज्यादा शब्द लिखना पसंद नहीं करते."

भाषा के रूप में आपात स्थिति में इमोजी के इस्तेमाल पर कोई ख़ास अध्ययन नहीं हुआ है.

हालांकि लिखित जानकारी से पिक्टोग्राफ (एक तरह का चिह्न जो किसी भावना/घटना आदि का प्रतीक हो) और अन्य विज़ुअल माध्यम ने तेज़ी से पहुंचने और समझने में आसान होने का रिकॉर्ड तोड़ा है. इसीलिए हवाई जहाज़ की सीट के पीछे सुरक्षा कार्ड में नियमों को संकेतों की भाषा में समझाया जाता है.

इमोजी
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हालांकि वॉर्निंग सिस्टम में इमोजी फिलहाल केवल छोटी सी भूमिका निभा रहे हैं, लेकिन ये भूकंप वैज्ञानिक को ये समझने में मदद कर सकते हैं कि कब और कहां भूकंप आया.

फिलहाल, कई लोग "क्या मुझे अभी भूकंप जैसा लगा?" का संस्करण अपनी भाषा में ट्वीट कर रहे हैं.

लेकिन दुनियाभर में अब धीरे-धीरे अर्थक्वेक इमोजी का उपयोग किया जा रहा है.

डॉक्टर हिक्स ने बीबीसी को बताया, "ट्वीट्स जियोटैग (भौगोलिक स्थिति के साथ तस्वीर का होना) हो सकते हैं. हम भूकंप की तरंगों से पहले सोशल मीडिया के ज़रिये इसका पता लगा सकते हैं. हम जानते हैं कि अभी भूकंप आया है, तो हम जानते हैं कि उस पर प्रतिक्रिया कैसे देनी है."

इमर्जी से क्या होगा?

आपात स्थिति में इमोजी का संभावित उपयोग भूकंप के अलावा भी काफ़ी बढ़ सकता है.

सैन फ्रांसिस्को में एक डिज़ाइनर और वास्तुकार सारा डीन कहती हैं, "एक सार्वभौमिक भाषा के रूप में उनके पास ये कीमती चीज है."

वे आगे कहती हैं कि सोशल मीडिया पर आपातकाल में रिस्पॉन्स टूल के रूप में भाषा एक बहुत ही बड़ी बाधा होती है. और ये उस अंतर को कम करेगा.

डीन और अन्य डिज़ाइनरों की टीम ने इमर्जी की शुरुआत की है, जिसमें इमोजी का एक पूरा सेट जलवायु और पर्यावरण की घटनाओं के लिए समर्पित किया गया है.

यूनिकोड वर्तमान में इमर्जी के बाढ़ और भूकंप वाले डिज़ाइन पर विचार कर रही है.

डीन ने बताया, "लोग हर समय आपातकाल पर बात करने के लिए इमोजी का उपयोग कर रहे हैं. लेकिन हमारे पास जलवायु आपदा से जुड़े इमोजी नहीं है, वे उन्हें अन्य इमोजी के साथ मिला रहे हैं."

ट्विटर यूज़र्स कैलिफोर्निया के जंगल में लगी आग के बारे में जानकारी साझा करने के लिए आग और पेड़ की इमोजी को एक साथ जोड़ कर इस्तेमाल कर रहे हैं.

https://twitter.com/FireChiefT/status/993690519816421376

डीन का कहना है मुश्किल वक़्त में कई बार समझ नहीं आता कि लोग अलग-अलग इमोजी को मिलाकर क्या कहना चाहते हैं.

बतौर डीन, सोशल मीडिया पर लोगों के पास संकट की स्थिति में जानकारी साझा करने के लिए संसाधन की कमी है.

उन्होंने बीबीसी को बताया, "ये वैश्विक मुद्दे हैं और हमें इन पर वैश्विक संवाद की जरूरत पड़ेगी."

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