दुनिया के सबसे बड़े लुटेरे, कीबोर्ड से लूटते हैं बैंक
27 मई, प्योंगयांग। परमाणु हथियारों से लैस उत्तर कोरिया अंतर्राष्ट्रीय साइबर युद्ध में अगली पंक्ति में जगह बना रहा है. जानकारों का कहना है कि उत्तर कोरिया अरबों डॉलर चुरा रहा है जो उसके परमाणु कार्यक्रम से भी ज्यादा स्पष्ट खतरा है.

विश्लेषकों का कहना है कि एक तरफ जहां सारी दुनिया का कूटनीतिक ध्यान उत्तर कोरिया की परमाणु महत्वाकांक्षाओं पर है, वो देश चुपके चुपके अपनी साइबर क्षमताओं को लगातार बढ़ा रहा है. समीक्षकों का कहना है कि हजारों प्रशिक्षण प्राप्त हैकरों की उसकी सेना उसके परमाणु कार्यक्रम जितनी ही खतरनाक साबित हो रही है. सियोल के इंस्टीट्यूट फॉर नेशनल सिक्योरिटी स्ट्रेटेजी के शोधकर्ता ओह इल-सेओक कहते हैं, "उत्तर कोरिया के परमाणु और सैन्य कार्यक्रम लंबी अवधि के खतरे हैं, लेकिन उसका साइबर खतरा करीब का और सजीव खतरा है."
प्योंगयांग की साइबर युद्ध की क्षमताएं सबसे पहले दुनिये की नजर में 2014 में आई जब उस पर सोनी पिक्चर्स एंटरटेनमेंट को हैक करने का आरोप लगा. माना जाता है कि ऐसा उसने देश के नेता किम जोंग उन का मजाक उड़ाने वाली फिल्म "द इंटरव्यू" का बदला लेने के लिए किया था. हमले के बाद सोनी की ऐसी कई फिल्में ऑनलाइन पोस्ट हो गई थीं जो अभी बाजार में आई भी नहीं थीं.
इसके अलावा बड़ी संख्या में कई गोपनीय कागजात भी ऑनलाइन प्रकाशित हो गए थे. तब से उत्तर कोरिया पर कई बड़े साइबर हमलों का आरोप लगा है, जिनमें बांग्लादेश केंद्रीय बैंक से 8.1 करोड़ डॉलर की चोरी और 2017 का वॉनाक्राई वैश्विक रैनसमवेयर हमला शामिल हैं. इस हमले में 150 देशों में करीब 3,00,000 कम्प्यूटरों पर असर पड़ा था. प्योंगयांग ने इन सभी मामलों में उसका हाथ होने से इनकार किया है और अमेरिका द्वारा लगाए गए वॉनाक्राई वाले आरोपों को "अनर्गल" बताया है.
क्या है ब्यूरो 121
उत्तर कोरिया के विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता का कहना था, "हमारा इन साइबर हमलों से कोई लेना देना नहीं है." लेकिन फरवरी में अमेरिका के विधि मंत्रालय ने उत्तर कोरिया के तीन लोगों को "कई विनाशकारी साइबर हमलों को करने के लिए रची गई एक व्यापक आपराधिक साजिश में भाग लेने" के आरोप लगाए. 2021 की अपनी वार्षिक खतरा मूल्यांकन रिपोर्ट में अमेरिका ने माना कि उत्तर कोरिया के पास अमेरिका में कहीं भी "संभवतः कुछ अति महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर नेटवर्कों में अस्थायी, सीमित गड़बड़ी करने की दक्षता है."
नेशनल इंटेलिजेंस सेवा के निदेशक के कार्यालय से जारी हुई रिपोर्ट में लिखा था कि प्योंगयांग का साइबर से "जासूसी, चोरी और हमलों" का खतरा बढ़ रहा है. रिपोर्ट ने उत्तर कोरिया पर आरोप लगाया कि उसने वित्तीय संस्थानों और क्रिप्टोकरेंसी के बाजारों से करोड़ों डॉलर चुराए हैं, "संभवतः सरकार की परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों जैसी प्राथमिकताओं के वित्त पोषण के लिए."
उत्तर कोरिया का साइबर कार्यक्रम कम से कम 1990 के दशक के मध्य में शुरू हुआ था, जब तत्कालीन नेता किम जोंग इल ने कहा था कि "भविष्य में सारे युद्ध कंप्यूटर युद्ध होंगे." आज प्योंगयांग के पास 6,000 लोगों की साइबर युद्ध का एक दस्ता है जिसे ब्यूरो 121 के नाम से जाना जाता है. 2020 में छपी अमेरिकी सेना की एक रिपोर्ट के मुताबिक यह दस्ता कई देशों से काम करता है, जिनमें बेलारूस, चीन, भारत, मलेशिया और रूस शामिल हैं.
बंदूकों की जगह कीबोर्ड से चोरी
साइबर सुरक्षा कंपनी क्राउडस्ट्राइक के स्कॉट जार्कोफ इस दस्ते को काफी असरदार मानते हैं. वो कहते हैं, "वो अत्यंत प्रभावशाली और समर्पित हैं और काफी उच्च श्रेणी के हमले करने में सक्षम हैं." 2007 में उत्तर कोरिया से बागी हो जाने वाले जांग से-यूल कहते हैं, "ब्यूरो 121 के सदस्यों को मिरिम विश्वविद्यालय जैसे विशेष संस्थानों में अलग अलग कोडिंग की भाषाओं और ऑपरेटिंग सिस्टमों का प्रशिक्षण दिया जाता है." इसे अब ऑटोमेशन विश्वविद्यालय के नाम से जाना जाता है और यह हर साल देश में सबसे ज्यादा अंक लाने वाले बच्चों में से सिर्फ 100 मेधावी छात्रों को दाखिला देती है.
स्टिम्सन केंद्र के शोधकर्ता मार्टिन विलियम्स कहते हैं कि साइबर युद्ध उत्तर कोरिया जैसे छोटे, गरीब देशों के लिए विशेष रूप से आकर्षक है क्योंकि ये देश "जहाजों, टैंकों और दूसरे आधुनिक हथियारों के मामले में दूसरे देशों से पिछड़ जाते हैं." विलियम्स के मुताबिक, "हैकिंग के लिए सिर्फ एक कंप्यूटर और इंटरनेट कनेक्शन चाहिए." सरकारों द्वारा समर्थित अधिकतर हैकिंग समूहों का इस्तेमाल जासूसी के लिए किया जाता है, लेकिन जानकार कहते हैं कि उत्तर कोरिया अपनी साइबर क्षमताओं का वित्तीय फायदों के लिए इस्तेमाल करने में अनूठा है.
फरवरी में अमेरिका में उत्तर कोरिया के तीनों नागरिकों पर वित्तीय संस्थानों और कंपनियों से कुल 1.3 अरब डॉलर से भी ज्यादा मूल्य का धन और क्रिप्टोकरेंसी चुराने का आरोप लगा था. सहायक अटॉर्नी जनरल जॉन डेमेर्स ने नार्थ कोरिया के इन साइबर सिपाहियों को "दुनिया के अग्रणी बैंक चोर" बताया था और कहा था कि वो "बंदूकों की जगह कीबोर्ड का इस्तेमाल कर रुपयों की थैलियों की जगह क्रिप्टोकरेंसी के डिजिटल वॉलेट चुरा रहे थे." सीके/एए (एएफपी)
Source: DW
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