खालिस्तानी आतंकी पन्नून की हत्या की साजिश का मामला: गिरफ्तार निखिल गुप्ता पहुंचे सुप्रीम कोर्ट, किए खुलासे

Nikhil Gupta Row: अमेरिकी नागरिक बन चुके भारतीय मूल के खालिस्तानी आतंकवादी गुरपतवंत सिंह पन्नून की हत्या की कथित साजिश रचने में प्राग में गिरफ्तार किए गये निखिल गुप्ता ने सुप्रीम कोर्ट की शरण ली है और आरोप लगाया है, कि उन्हें गलत तरीके से गिरफ्तार किया गया है और उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण दायर की है।

निखिल गुप्ता के खिलाफ अमेरिका ने आरोप लगाया है, कि उन्होंने भारत सरकार में काम करने वाले एक अधिकारी के निर्देश पर अमेरिकी नागरिक गुरपतवंत सिंह पन्नून की हत्या की साजिश रची थी और इसके लिए उन्होंने एक अमेरिकी नागरिक को सुपारी दी थी, जो एक अंडरकवर अमेरिकी एजेंट था।

Nikhil Gupta Row

निखिल गुप्ता मामले में नया मोड़

अमेरिका ने दावा किया है, कि निखिल गुप्ता को चेक गणराज्य से गिरफ्तार किया गया, लेकिन निखिल गुप्ता के परिवार द्वारा दायर याचिका में अमेरिका द्वारा शुरू की गई प्रत्यर्पण कार्यवाही में भारत सरकार के हस्तक्षेप की मांग की गई है। कुछ रिपोर्टों में कहा गया है, कि मामले की सुनवाई शुक्रवार को होने की उम्मीद है।

सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में दावा किया गया है, कि निखिल गुप्ता को प्राग में अवैध रूप से हिरासत में लिया गया है और कानून का पालन करने वाले नागरिक के रूप में उन्हें डर है, कि उनकी जान को खतरा है।

एनडीटीवी की एक रिपोर्ट में याचिका का हवाला दिया गया है। याचिका में कहा गया है, कि "... (प्राग में गिरफ्तारी की) परिस्थितियों में अनियमितताएं थीं, कोई औपचारिक गिरफ्तारी वारंट प्रस्तुत नहीं किया गया था, और स्थानीय चेक अधिकारियों के बजाय, स्वयं-दावा किए गए अमेरिकी एजेंटों ने उनकी गिरफ्तारी को अंजाम दिया था।"

इसके अलावा, याचिका में निखिल गुप्ता के "मौलिक अधिकारों के गंभीर उल्लंघन" का भी दावा किया गया है, जिसमें "गोमांस और सूअर का जबरन सेवन" करवाना शामिल है, जो उन्हें अपमानजनक लगा, क्योंकि वह एक "कट्टर हिंदू और शाकाहारी" हैं।

निखिल गुप्ता, जिन्हें 'निक' के नाम से भी जाना जाता है, उनके बारे में अमेरिका का दावा है, कि चेक अधिकारियों ने जून में उन्हें गिरफ्तार किया था और प्रत्यर्पण का इंतजार कर रहे हैं।

नवंबर में न्यूयॉर्क के दक्षिणी जिले के अमेरिकी जिला न्यायालय में सुपरसीडिंग अभियोग में आरोपों का खुलासा किया गया था। हालांकि, अभियोजकों ने "लक्ष्य" का नाम नहीं बताया, लेकिन अमेरिकी अधिकारियों ने उसकी पहचान सिख अलगाववादी गुरपतवंत सिंह पन्नून के रूप में की है।

अमेरिकी अभियोग में क्या कहा गया है?

अमेरिकी अभियोग, जो पन्नू को "पीड़ित" के रूप में मान रहा है, उसमें CC-1 के रूप में एक भारतीय सरकारी कर्मचारी की भी पहचान की गई है, जिसने कथित तौर पर न्यूयर्क में रहने वाले "भारतीय मूल के एक अमेरिकी नागरिक" की हत्या की साजिश रचने के लिए गुप्ता सहित अन्य लोगों के साथ सहयोग किया था।

आरोप लगाया गया है, कि भारत में रहने वाला निखिल गुप्ता, सीसी-1 से जुड़ा है और अंतरराष्ट्रीय नशीले पदार्थों और हथियारों की तस्करी में शामिल रहा है।

संयुक्त राज्य अमेरिका और चेक गणराज्य के बीच द्विपक्षीय प्रत्यर्पण संधि के आधार पर, चेक अधिकारियों ने 30 जून को गुप्ता को गिरफ्तार किया और हिरासत में लिया। गुप्ता पर भाड़े के बदले हत्या और भाड़े के बदले हत्या की साजिश रचने का आरोप है, जिनमें से प्रत्येक में अधिकतम 10 साल जेल की सजा हो सकती है।

लेकिन, अब निखिल गुप्ता के परिवार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर भारत सरकार से हस्तक्षेप करने की मांग की है और अगर सुप्रीम कोर्ट इसकी इजाजत देता है, तो भारत सरकार को भी एक पक्ष बनना पड़ेगा।

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