Nicolas Maduro Political Journey: ह्यूजो शावेज ने क्यों सौंपी अपनी विरासत मादुरो को? छिपे हैं गहरे राज़
Nicolas Maduro Political Journey: वेनेजुएला इस वक्त अभूतपूर्व संकट के दौर से गुजर रहा है। अमेरिका के हमले के बाद पूर्व राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार कर लिया गया है। उन्हें अमेरिका डिपोर्ट किया गया है। लातिन अमेरिकी देश की राजनीति में निकोलस मादुरो एक कद्दावर हस्ती रहे हैं। वह सिर्फ वेनेजुएला के राष्ट्रपति ही नहीं थे, बल्कि ह्यूजो शावेज की राजनीतिक विरासत के उत्तराधिकारी भी थे। शावेज ने अपने बाद देश की कमान मादुरो को ही क्यों सौंपी? इसके पीछे कई राजनीतिक, वैचारिक और व्यक्तिगत कारण थे।
दिसंबर 2012 में जब ह्यूगो शावेज कैंसर के इलाज के लिए क्यूबा रवाना हो रहे थे, तब उन्होंने मादुरो को अपनी विरासत सौंपी थी। देश को संबोधित करते हुए उन्होंने पार्टी में वर्चस्व और गुटबाजी की लड़ाइयों पर विराम लगाने का संदेश दिया था। अपने संबोधन में ह्यूजो शावेज ने साफ कहा था कि निकोलस मादुरो ही उनके उत्तराधिकारी होंगे।

ह्यूजो शावेज ने मादुरो को सौंपी थी विरासत
वेनेजुएला में इसे शावेज की "अंतिम राजनीतिक इच्छा" मानी गई। उन्होंने मादुरो के बैकग्राउंड और संघर्ष करने की क्षमता देखते हुए उन पर भरोसा जताया था। देश के नाम संबोधन में शावेज ने कहा था कि बोलिवेरियन क्रांति को आगे बढ़ाने और वेनेजुएला के सम्मान और अस्तित्व की लड़ाई को आगे ले जाने की क्षमता मादुरो में है।
Nicolas Maduro Political Journey: मादुरो को मिला वफादारी का इनाम
निकोलस मादुरो पर ह्यूजो शावेज आंख मूंदकर भरोसा करते थे। इसकी वजह थी कि 1990 के दशक से ही वह शावेज के साथ थे। 1992 में असफल तख्तापलट के बाद जब शावेज जेल में थे, तब भी मादुरो ने पाला नहीं बदला। इस दौर में मादुरो की पत्नी सिलिया फ्लोर्स शावेज की कानूनी टीम का हिस्सा थीं। इस लंबे और मुश्किल समय ने शावेज और मादुरो के बीच भरोसे का रिश्ता मजबूत किया।
Nicolas Maduro News: मजदूर यूनियन से राष्ट्रपति का सफर
निकोलस मादुरो पर शावेज का भरोसा सिर्फ वफादारी की वजह से नहीं बना था। उनकी जुझारू प्रवृत्ति और बैकग्राउंड का भी इसके पीछे बड़ा हाथ रहा है। मादुरो ने एक बस ड्राइवर से जिंदगी शुरू की और ट्रेड यूनियन नेता बने थे। यही पृष्ठभूमि शावेज की समाजवादी "बोलिवेरियन क्रांति" के मूल विचारों से मेल खाती थी। शावेज खुद को गरीबों और मजदूरों का नेता मानते थे। उन्हें लगता था कि मादुरो उनकी इस सोच को जमीन पर उतार सकते हैं।
Nicolas Maduro Career: विदेश नीति में अनुभव
मादुरो के वैश्विक नेताओं से संबंध को देखते हुए भी शावेज ने उन्हें तरजीह थी। राष्ट्रपति बनने से पहले मादुरो करीब छह साल तक वेनेजुएला के विदेश मंत्री रहे थे। इस दौरान उन्होंने क्यूबा, रूस और चीन जैसे देशों के साथ वेनेजुएला के व्यापारिक और रणनीतिक रिश्ते सुधारे थे। शावेज को भरोसा था कि मादुरो अंतर्राष्ट्रीय मंच पर अमेरिकी दादागीरी का जवाब दे सकेंगे और वेनेजुएला की नीतियों का बचाव कर पाएंगे।
Nicolas Maduro को आगे कर पार्टी को टूटने से बचाने की रणनीति
शावेज की पार्टी PSUV में कई ताकतवर नेता थे। उत्तराधिकार के मुद्दे पर आंतरिक टकराव भी थे। गुटबाजी की आशंका को देखते हुए शावेज ने मादुरो को आगे किया। वह एक ऐसा नेता थे जिसकी पहचान सेना और सिविल प्रशासन के बीच संतुलन बनानेवाले के तौर पर थी। साथ ही, वह कार्यकर्ताओं को एकजुट रखने में सक्षम थे।
शावेज की मृत्यु के बाद मादुरो को "शावेज का बेटा" कहकर प्रचारित किया गया। यह एक भावनात्मक अपील थी जिसके दम पर 2013 का राष्ट्रपति चुनाव जीतने में सफल रहे। हालांकि बाद के वर्षों में उनकी राजनीति विवादों में रही। उन पर भाई-भतीजावाद और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप भी लगे।












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