Nepal Gen Z Protests: नेपाल में रह रहे भारतीयों के लिए सरकार का अलर्ट, जारी की खास एडवाइजरी
Nepal Gen Z Protests: नेपाल में हालात पूरी तरह से बिगड़ चुके हैं। प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। राष्ट्रपति भवन में आगजनी की गई है। लगातार खराब होती स्थिति के बीच भारत सरकार ने अपने नागरिकों के लिए बड़ा अलर्ट जारी किया है।
विदेश मंत्रालय (MEA) ने साफ कहा है कि फिलहाल नेपाल की यात्रा करने से बचें और जो लोग पहले से वहां मौजूद हैं, वे अलर्ट रहें। एडवाइजरी में कहा गया है कि भारतीय नागरिक अपने ठिकानों पर ही रहें, भीड़भाड़ वाले इलाकों या सड़कों पर निकलने से बचें और नेपाल सरकार के स्थानीय निर्देशों के साथ-साथ काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास की एडवाइजरी को भी फॉलो करें।

हेल्पलाइन नंबर जारी
किसी भी इमरजेंसी में भारतीय नागरिक काठमांडू स्थित दूतावास के हेल्पलाइन नंबर +977-9808602881 और +977-9810326134 (व्हाट्सऐप कॉल भी) पर संपर्क कर सकते हैं।
सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरे युवा
दरअसल, नेपाल में सरकार द्वारा प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बैन लगाए जाने के बाद हालात बिगड़ते चले गए। सोमवार (8 सितंबर, 2025) को हजारों युवा सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के लिए सड़कों पर उतर आए।
400 से ज्यादा लोग घायल हुए
शांतिपूर्ण प्रदर्शनों से शुरू हुआ यह विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गया, जिसमें कम से कम 19 लोग मारे गए और 400 से ज्यादा घायल हुए। प्रदर्शनकारियों द्वारा संसद परिसर में घुसने और नेताओं के घरों को निशाना बनाने के बाद अधिकारियों ने काठमांडू और अन्य शहरों में कर्फ्यू लगा दिया।
ओली के इस्तीफे की पुष्टि
नेपाल के प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली ने मंगलवार को इस्तीफा दे दिया क्योंकि काठमांडू और देश के अन्य हिस्सों में लगातार दूसरे दिन जेनरेशन जेड के नेतृत्व में विरोध प्रदर्शन तेज़ हो गए। ओली के सचिवालय ने उनके इस्तीफे की पुष्टि की।
विरोध प्रदर्शनों की शुरुआत कैसे हुई?
4 सितंबर को सरकार के फैसले के बाद नेपाल में विरोध तेज हो गया। सरकार ने फेसबुक, व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम, एक्स और यूट्यूब समेत 26 सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स को ब्लॉक कर दिया। वजह यह बताई गई कि ये प्लेटफ़ॉर्म स्थानीय स्तर पर पंजीकरण (registration), शिकायत निवारण अधिकारियों की नियुक्ति और चिह्नित कंटेंट को तय समय पर हटाने जैसे नियमों का पालन नहीं कर रहे थे।
संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने एक सार्वजनिक नोटिस जारी करते हुए कहा कि उसने नेपाल दूरसंचार प्राधिकरण को आदेश दिया है कि सभी गैर-पंजीकृत सोशल मीडिया साइटों को तब तक बंद रखा जाए, जब तक वे आधिकारिक तौर पर पंजीकृत नहीं हो जाते।
प्रदर्शनकारी कौन हैं और उनकी मांगें क्या हैं?
नेपाल में चल रहे विरोध प्रदर्शनों को 'जेन जेड प्रोटेस्ट' कहा जा रहा है, क्योंकि इसमें ज्यादातर 30 साल से कम उम्र के युवा शामिल हैं। कई प्रदर्शनकारी स्कूल और कॉलेज की यूनिफॉर्म में ही सड़कों पर उतरे। ये प्रदर्शन किसी राजनीतिक दल से सीधे जुड़े नहीं थे, बल्कि 2015 में बनी युवा-केंद्रित संस्था हामी नेपाल के जरिए समन्वित किए गए थे।
काठमांडू के मेयर बालेंद्र शाह, जोकि एक स्वतंत्र नेता हैं और सोशल मीडिया कैंपेन की वजह से चुनाव जीते थे, उन्होंने भी इन प्रदर्शनों का खुलकर समर्थन किया। सिर्फ सोशल मीडिया बैन ही नहीं, बल्कि प्रदर्शनकारियों ने भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और सरकार में जवाबदेही की कमी जैसे मुद्दों पर भी आवाज़ उठाई। वे अक्सर 'भाई-भतीजावाद' (Nepotism) शब्द का इस्तेमाल कर राजनीतिक नेताओं की आलोचना कर रहे थे।












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