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Nepal में फिर उठी राजशाही की मांग, पूर्व गृह मंत्री कमल थापा गिरफ्तार, सड़कों पर उतरे हजारों प्रदर्शनकारी

Nepal Protest: नेपाल में एक बार फिर से राजशाही की बहाली और देश को हिंदू राष्ट्र घोषित करने की मांग को लेकर राजनीतिक उबाल देखने को मिला। रविवार, 1 जून को राजधानी काठमांडू में हजारों की संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

नेपाल गणराज्य दिवस के दिन से ही ये प्रदर्शन चल रहा है। इस दौरान नेपाल के पूर्व उपप्रधानमंत्री और पूर्व गृह मंत्री कमल थापा समेत लगभग छह अन्य लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया।

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काठमांडू घाटी पुलिस ने पुष्टि की है कि थापा और अन्य प्रदर्शनकारियों को प्रतिबंधित क्षेत्र में घुसने के प्रयास में हिरासत में लिया गया।

गणराज्य दिवस पर बढ़ी सियासी हलचल

गौरतलब है कि 28 मई, 2008 को नेपाल में संघीय लोकतांत्रिक गणराज्य प्रणाली की स्थापना की गई थी। इस साल नेपाल में 18वां गणराज्य दिवस मनाया गया, लेकिन इस मौके पर देश में दो धड़ों के बीच राजनीतिक तनाव और टकराव की स्थिति बनी रही। राजशाही की मांग करने वाले गुटों ने 29 मई से शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं जिसका नेतृत्व कमल थापा कर रहे थे।

राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी (RPP) और RPP नेपाल सहित कई राजशाही समर्थक संगठनों ने आंदोलन के चौथे दिन राजधानी के नारायण चौर क्षेत्र में बड़ा प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में करीब 1,200 प्रदर्शनकारियों ने भाग लिया। सभी प्रदर्शनकारी पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह की तस्वीरें हाथ में लिए हुए थे और वर्तमान लोकतांत्रिक व्यवस्था के विरोध में नारे लगा रहे थे।

कमल थापा को जबरन उठाकर ले गई पुलिस

प्रदर्शनकारियों ने जब प्रधानमंत्री के आधिकारिक आवास बलुवाटर की ओर मार्च करने की कोशिश की, तब पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की। इस दौरान झड़प हो गई। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए बल का प्रयोग किया और सुरक्षा घेरा तोड़ने की कोशिश करने वाले लोगों को गिरफ्तार किया गया। आरपीपी अध्यक्ष राजेंद्र लिंगडेन इस प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे थे।

प्रदर्शन के दौरान कमल थापा को पुलिसकर्मी जबरन उठा कर गाड़ी में बैठाते हुए नजर आए। यह दृश्य कैमरों में कैद हो गया और सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। थापा को नारायणहिती महल संग्रहालय क्षेत्र, जो कि प्रतिबंधित क्षेत्र में आता है, में प्रवेश करने की कोशिश करने के चलते गिरफ्तार किया गया।

राजधानी काठमांडू में संभावित झड़पों को देखते हुए रत्नापार्क और भृकुटी मंडप क्षेत्रों में करीब 6,000 सुरक्षा बलों को तैनात किया गया। पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने इन संवेदनशील क्षेत्रों में चौकसी बढ़ा दी ताकि किसी भी प्रकार की हिंसा को टाला जा सके। वहीं गणतंत्र दिवस के उपलक्ष्य में भृकुटी मंडप में परंपरागत परिधानों में सांस्कृतिक झांकी भी प्रस्तुत की गई।

राजशाही प्रदर्शनकारियों की चेतावनी

राजशाही समर्थक प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि जब तक नेपाल में राजशाही को बहाल नहीं किया जाता और देश को हिंदू राष्ट्र घोषित नहीं किया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। उनका कहना है कि मौजूदा लोकतांत्रिक गणराज्य व्यवस्था ने जनता को सिर्फ भ्रमित किया है और नेपाल की सांस्कृतिक पहचान को खत्म किया है।

नेपाल की राजधानी में उठी यह सियासी सरगर्मी संकेत देती है कि राजशाही समर्थकों की संख्या अब भी कम नहीं है और वे मौजूदा व्यवस्था से असंतुष्ट हैं। हालांकि, सरकार और सुरक्षा एजेंसियां स्थिति को नियंत्रित करने के प्रयास में लगी हैं, लेकिन आने वाले दिनों में यह आंदोलन कितना व्यापक रूप ले सकता है, यह देखना दिलचस्प होगा।

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