Sushila Karki Love Story: कॉलेज में इस कांग्रेसी नेता पर दिल हार बैठीं नेपाल की अंतरिम PM, भारत से गहरा नाता
Sushila Karki Love Story: नेपाल की सियासत में जेन-जेड क्रांति ने ऐसा तूफान मचा दिया है कि काठमांडू की सड़कें खून से लाल हो गईं। सोशल मीडिया बैन और भ्रष्टाचार के खिलाफ युवाओं की बगावत ने 9 सितंबर 2025 को प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को इस्तीफा देने पर मजबूर कर दिया।
राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) के 21 सांसदों और 4 मंत्रियों के इस्तीफे ने सरकार को धराशायी कर दिया। 19 मौतें, 300 से ज्यादा घायल, और कर्फ्यू के बीच अब एक नाम उभर रहा है - सुशीला कार्की, नेपाल की पूर्व मुख्य न्यायाधीश, जिन्हें शुक्रवार (12 सितंबर) को राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल ने पहली महिला कार्यकारी प्रमुख नियुक्त किया। लेकिन इस सियासी हलचल के बीच सुशीला की निजी जिंदगी और उनकी रोमांटिक लव स्टोरी ने सबका ध्यान खींच लिया है। आइए, जानते हैं कैसे भारत की गलियों में शुरू हुई उनकी प्रेम कहानी, जिसने उन्हें एक कांग्रेसी नेता के दिल के करीब ला दिया...

बनारस में शुरू हुआ प्यार का सफर
सुशीला कार्की और दुर्गा प्रसाद सुवेदी की लव स्टोरी किसी बॉलीवुड फिल्म से कम नहीं। 1970 के दशक में बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) में पढ़ाई के दौरान इन दोनों की मुलाकात हुई। सुशीला पॉलिटिकल साइंस में मास्टर्स कर रही थीं, और दुर्गा उस वक्त नेपाली कांग्रेस के जोशीले युवा नेता थे। BHU के कैंपस में विचारों का मेल हुआ, और धीरे-धीरे दिल भी एक-दूसरे के करीब आ गए। सुशीला को दुर्गा का आदर्शवाद और ईमानदारी भा गया, जबकि दुर्गा उनकी सादगी और साहस के कायल हो गए।
'सिंदूर और हार लेकर आईं थी सुशीला'
दुर्गा ने एक इंटरव्यू में मजेदार किस्सा सुनाया, 'मुझे आज भी हैरानी होती है कि सुशीला ने मुझसे शादी क्यों की? मेरे पास तो न नाम था, न दाम! वो खुद शादी के लिए सिंदूर और हार लेकर आई थीं।' वहीं, सुशीला ने कहा, 'अगर मैंने दुर्गा से शादी न की होती, तो शायद मैं नेपाल की पहली महिला CJ नहीं बन पाती। उनकी ईमानदारी और सपोर्ट ने मुझे हमेशा प्रेरित किया।'
Who Is Durga Prasad Subedi: कौन हैं दुर्गा प्रसाद सुवेदी?
70 साल की उम्र में भी दुर्गा सुवेदी को नेपाल में 'हाईजैकर' के तौर पर ज्यादा जाना जाता है, न कि सुशीला कार्की के पति के रूप में। 1973 में, महज 27 साल की उम्र में, दुर्गा ने नेपाली कांग्रेस के लोकतंत्र समर्थक आंदोलन को फंड करने के लिए रॉयल नेपाल एयरलाइंस के एक विमान को हाईजैक कर लिया था। उन्होंने विमान को बिहार के फोर्ब्सगंज में उतारा और 30 लाख रुपये की भारतीय मुद्रा लूटी, जो आज की कीमत में करीब 30 करोड़ के बराबर है। इस घटना के बाद दुर्गा गुमनामी में चले गए और एक सादगी भरा जीवन चुना।
जेल में जाती थीं दुर्गा से मिलने सुशीला
दुर्गा का जन्म धनकुटा के एक साधारण किसान परिवार में हुआ था। बचपन में अमीरी-गरीबी की खाई ने उन्हें समाजवादी विचारों की ओर खींचा। अपनी मां के निधन के बाद वो बिराटनगर चले गए, जहां पढ़ाई के साथ-साथ नौकरी भी की। यहीं उनकी मुलाकात सुशीला से हुई, जब वो एक स्कूल में पढ़ाते थे और सुशीला वहां छात्रा थीं। बाद में सुशीला भी लोकतंत्र के आंदोलन में शामिल हुईं और जेल में बंद दुर्गा से मिलने जाया करती थीं। 1990 में नेपाल में लोकतंत्र की बहाली के बाद दोनों ने शादी कर ली।
सुशीला कार्की: नेपाल की 'लेडी जस्टिस'
7 जून 1952 को भारत का विराटनगर (बैराठ) में जन्मीं सुशीला सात भाई-बहनों में सबसे बड़ी थीं। उनके पिता चाहते थे कि वो डॉक्टर बनें, लेकिन सुशीला ने कानून का रास्ता चुना। 1975 में BHU से पॉलिटिकल साइंस में मास्टर्स करने के बाद, उन्होंने 1978 में त्रिभुवन यूनिवर्सिटी से लॉ की डिग्री हासिल की। 1979 में विराटनगर में वकालत शुरू की और 2016 में नेपाल की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश बनीं।
सुशीला की गिनती नेपाल के सबसे साहसी और निष्पक्ष जजों में होती है। उन्होंने कई हाई-प्रोफाइल केस में बड़े नेताओं और मंत्रियों के खिलाफ फैसले सुनाए। 2017 में उन पर महाभियोग का प्रस्ताव लाया गया, लेकिन जनता के दबाव और सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद इसे वापस ले लिया गया।
BHU का खास कनेक्शन
सुशीला का भारत से गहरा नाता है। BHU में पढ़ाई के दौरान न सिर्फ उन्हें उनका जीवनसाथी मिला, बल्कि उन्होंने वहां नृत्य भी सीखा, जो उनकी जिंदगी का एक खास हिस्सा रहा। जुलाई में उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा, 'BHU की यादें मेरे लिए हमेशा खास रहेंगी। वहां मैंने न सिर्फ डिग्री हासिल की, बल्कि जिंदगी के कई रंग देखे।
क्या कहती है उनकी लव स्टोरी?
सुशीला और दुर्गा की कहानी सादगी, ईमानदारी और आपसी सम्मान की मिसाल है। एक तरफ सुशीला, जो भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी बेबाकी के लिए जानी जाती हैं, और दूसरी तरफ दुर्गा, जो सादगी भरे जीवन में विश्वास रखते हैं। दुर्गा का कहना है, 'हमें एक-दूसरे की पहचान की जरूरत नहीं। हम सिर्फ अपनी अंतरात्मा की सुनते हैं।'
आज जब सुशीला कार्की नेपाल की अंतरिम सरकार की कमान संभालने की दहलीज पर खड़ी हैं, उनकी ये प्रेम कहानी दुनिया को बता रही है कि सच्चा प्यार और आदर्शों का मेल कितना शक्तिशाली हो सकता है। क्या सुशीला नेपाल को इस संकट से निकाल पाएंगी? और क्या उनकी लव स्टोरी युवाओं के लिए प्रेरणा बनेगी? कमेंट बॉक्स में बताएं अपनी राय...
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