नेपाल में 500 सालों से नहीं आया बड़ा भूकंप, अब हिली धरती तो भारत तक मचेगी तबाही, वैज्ञानिकों ने दी नई टेंशन

नेपाल के जाजरकोट में शुक्रवार रात 6.4 तीव्रता वाले भूकंप से कम से कम 157 लोगों की मौत हो गई है और 150 से अधिक घायल हुए हैं। भूकंप के बाद हुई तबाही का मंजर का देख लोग अभी भी दहशत में हैं।

अचानक आए भूकंप से जाजरकोट जिले के गांवों में अधिकांश घर या तो ढह गए या गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गए, जबकि कस्बों में कुछ कंक्रीट के घर भी क्षतिग्रस्त हो गए। भूकंप के बाद वैज्ञानिकों ने चेतावनी जारी कहते हुए कहा है कि अभी और भयावह भूकंप दस्तक दे सकता है।

Nepal face threat of bigger earthquake

वैज्ञानिकों का कहना है कि आने वाले भूकंप की तीव्रता आठ या उससे अधिक हो सकती है। ऐसे वक्त में डर की वजह से लोग अभी भी अपने घरों के भीतर जाने से डर रहे हैं और कड़ाके की ठंड में रातें सड़कों पर गुजार रहे हैं।

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    चिउरी गांव में अधिकांश घर ढह गये

    जाजरकोट के चिउरी गांव में भूकंप से अधिकांश घर ढह गए। रात गुजारने के लिए ग्रामीणों को जो कुछ भी उन्हें मिला, उन्होंने उसका उपयोग किया। लोगों ने खुद को गर्म रखने के लिए प्लास्टिक की चादरों और पुराने कपड़ों का उपयोग किया। अधिकांश लोग मलबे के नीचे से अपना सामान निकालने में असमर्थ हैं।

    स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, चिउरी में मारे गए अधिकांश लोग मलबे में दब गए। इस पहाड़ी इलाके में अधिकांश घर आमतौर पर चट्टानों और लकड़ियों को जमा करके बनाए जाते हैं लेकिन ये भूकंप की तीव्रता के कारण ढह गए।

    पर्वतीय नेपाल में भूकंप आम हैं। PDNA की रिपोर्ट के मुताबिक नेपाल दुनिया का 11वां सबसे अधिक भूकंप झेलने वाला देश है। इससे पहले 2015 में नेपाल में बड़ा भूकंप आया था जब 7.8 तीव्रता के भूकंप में लगभग 9,000 लोग मारे गए थे। हालांकि नेपाल में इससे भी बड़ा भूकंप आने का खतरा बना हुआ है।

    520 सालों से नहीं आया बड़ा भूकंप

    नेपाल के राष्ट्रीय भूकंप निगरानी एवं अनुसंधान केंद्र के वरिष्ठ भूकंपविज्ञानी भरत कोइराला ने बताया कि पश्चिमी नेपाल में भूकंप का सबसे ज्यादा खतरा है। उन्होंने कहा कि पिछले 520 वर्षों से पश्चिमी नेपाल में कोई बड़ा भूकंप नहीं आया है, इसलिए बहुत सारी एनर्जी जमा हो गई है भूकंप ही उस एनर्जी को मुक्त करने का एकमात्र तरीका है। उनका मानना है कि नेपाल में आने वाले भूकंप की तीव्रता आठ या उससे अधिक हो सकती है।

    नेपाल के राष्ट्रीय भूकंप निगरानी और अनुसंधान केंद्र के वरिष्ठ प्रभागीय भूकंप विज्ञानी लोकविजय अधिकारी का दावा है कि भूकंप आने में जितना अधिक समय लगेगा, उतनी अधिक भूकंपीय ताकत जमा होगी। जितने समय तक बड़ा भूकंप न आएगा, उतना ही उसके आने की आशंका अधिक होगी।

    नेपाल में भू विज्ञानी डॉ. विशालनाथ उप्रेती का मानना है कि नेपाली क्षेत्र में जमा हुई भूकंपीय शक्ति की वजह से 1505 में नेपाल में आए भीषण भूकंप से भी अधिक शक्तिशाली भूकंप आने का खतरा बना हुआ है।

    उन्होंने कहा कि तब नेपाल में कितना बड़ा भूकंप आया होगा इसकी जानकारी हमारे पास नहीं है मगर ऐसा अनुमान लगाया जाता है कि उस वक्त 8.5 से 8.7 तीव्रता का भूकंप आया होगा। तब जमीन 20 मीटर तक खिसक गई थी।

    उन्होंने कहा कि इसी भूकंप से दिल्ली की कुतुब मीनार से लेकर ल्हासा तक तबाही मच गई थी। उप्रेती ने कहा कि जहां 500 सालों से कोई बड़ा भूकंप नहीं आया हो वहां 4,5 या 6 तीव्रता वाले भूकंप आने का मतलब किसी समंदर से कुछ बूंद पानी निकाल लेने जैसा है।

    उप्रेती ने कहा कि कोशी से लेकर सिक्किम-दार्जिलिंग तक 1,300 साल से कोई बड़ा भूकंप नहीं आया है। हिमालय में वह जगह जहां उस साल कोई भूकंप नहीं आता, बहुत खतरनाक हो जाती है।

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