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रिपोर्ट: म्यांमार में सुरक्षाबलों ने 25 ग्रामीणों की हत्या की

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नेपीडाॅ, 05 जुलाई। स्थानीय मीडिया और चश्मदीदों की रविवार की रिपोर्ट के मुताबिक म्यांमार के सुरक्षा बलों ने इस सप्ताह की शुरुआत में ग्रामीणों पर गोलियां चलाईं, जिसमें कम से कम 25 लोग मारे गए हैं.

शुक्रवार को सगाइंग क्षेत्र के केंद्रीय शहर डेपायिन में हिंसा हुई है. मीडिया आउटलेट थान ल्विन खेत न्यूज के मुताबिक शुक्रवार को डेपायिन के पास स्थित छह गांवों में 150 सैनिक पहुंचे और, आरोप है कि उन्होंने गांववालों पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी.

Provided by Deutsche Welle

एक अनाम डेपायिन निवासी ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया, "खेतों में और रेलमार्गों पर लोग मारे जा रहे थे. उन्होंने (सैनिकों ने) हर उस चीज को गोली मार दी जो हिलती दिखी."

कैसे हुई हिंसा?

सेना के खिलाफ सशस्त्र विपक्षी समूह पीपल्स डिफेंस फोर्स (पीडीएफ) की मौजूदगी के कारण सैनिकों ने कथित तौर पर इस क्षेत्र को निशाना बनाया है. कई महीनों से पीडीएफ सैन्य जुंटा के खिलाफ मोर्चा खोले हुए है.

पीडीएफ के स्थानीय युवा सदस्यों ने क्षेत्र में सेना की घुसपैठ के खिलाफ लड़ने के लिए देसी हथियारों का इस्तेमाल किया. ग्रामीणों ने तलवारों और घर में बनी राइफलों का इस्तेमाल किया, लेकिन सेना की क्षमता के आगे वे टिक नहीं पाए.

स्थानीय निवासियों का कहना है कि लड़ाई के बाद कम से कम 25 शव पाए गए हैं.

म्यांमार की सेना ने अभी तक इन झड़पों पर कोई टिप्पणी नहीं की है. एक सरकारी अखबार ने दावा किया कि "सशस्त्र आतंकवादियों" ने क्षेत्र में गश्त कर रहे सैनिकों पर घात लगाकर हमला किया.

म्यांमार में राजनीतिक संकट

म्यांमार की सेना ने 1 फरवरी को सैन्य तख्तापलट कर दिया था और स्टेट काउंसलर आंग सान सू ची और उनके सत्तारूढ़ एनएलडी के अन्य सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया था. विद्रोह से पहले, सेना ने सू ची की पार्टी पर पिछले साल के चुनाव में धांधली का आरोप लगाया था.

सू ची पर इस समय अपने अंगरक्षकों के लिए अवैध रूप से वॉकी-टॉकी आयात करने और कोरोना महामारी के नियमों का उल्लंघन करने का मुकदमा चल रहा है.

सैन्य जुंटा के तख्तापलट के बाद जनता विरोध में सड़कों पर उतर आई थी. इसके जवाब में सेना ने अपनी ताकत का इस्तेमाल किया जिसकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निंदा हुई. संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक तख्तापलट ने दो लाख 30 हजार से अधिक लोगों को लड़ाई के कारण अपने घर छोड़ने पर मजबूर किया है.

द असिस्टेंट एसोसिएशन फॉर पॉलिटिकल प्रिजनर्स का दावा है कि तख्तापलट के बाद के महीनों में 890 से अधिक लोग मारे गए हैं और हजारों को जुंटा द्वारा गिरफ्तार किया गया है.

पिछले सप्ताह अधिकारियों ने कहा था कि म्यांमार की सरकार ने लगभग 2,300 कैदियों की रिहाई शुरू कर दी है. रिहाई पाने वाले कैदियों में 1 फरवरी 2021 को म्यांमार में हुए सैन्य तख्तापलट का विरोध करने वाले लोग और इस पर रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकार शामिल हैं.

एए/वीके (रॉयटर्स, डीपीए)

Source: DW

English summary
myanmar security forces kill 25 villagers reports
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