पड़ोसी देश में सेना और विद्रोहियों के बीच जंग, एयरस्ट्राइक के बाद भारत में उमड़ी शरणार्थियों की बाढ़
Myanmar News: समाचार एजेंसी एएनआई ने रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के हवाले से कहा है, कि म्यांमार में सोमवार को एक बार फिर से सेना के एयरस्ट्राइक के बाद भारी संख्या में लोग भागकर भारत पहुंच गये हैं। म्यांमार में सेना ने उस वक्त कार्रवाई की है, जब कुछ जातीय अल्पसंख्यक विद्रोही गुटों ने सेना की चौकियों रपर हमला कर दिया था।
रिपोर्ट में दावा किया गया है, कि सेना की एयरस्ट्राइक के बाद हजारों की संख्या में लोग भागकर भारत पहुंचे हैं, क्योंकि दो नये मोर्चों पर लड़ाई शुरू हो गई है।

म्यांमार में अशांति साल 2021 के फरवरी महीने से ही फैली हुई है, जब म्यांमार की सेना जुंटा ने लोकतांत्रिक चुनी हुई सरकार को शासन से बर्खास्त कर दिया था और खुद शासन पर कब्जा कर लिया था। सेना ने देश के तमाम छोटे और बड़े नेताओं को गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया और उसके बाद से ही लोकतंत्र समर्थकों और सेना के बीच लड़ाई शुरू हो गई। पिछले ढाई सालों से चल रही इस लड़ाई में तीन हजार से ज्यादा लोग मारे गये हैं।
वहीं, म्यांमार में स्थिति इसलिए भी खराब हो गई है, क्योंकि सेना के खिलाफ दर्जनों विद्रोही गुट बन चुके हैं और अक्टूबर महीने में तीन जातीय अल्पसंख्यक गुटों ने एक साथ मिलकर कुछ शहरों में सेना पर हमला किया था और सेना की तीन चौकियों पर कब्जा कर लिया था।
ये विद्रोही गुट अब अलग अलग राज्यों की मांग कर करने लगे हैं, जिससे म्यांमार के टूटने का खतरा बढ़ रहा है।

म्यांमार में सेना बनाम विद्रोही गुट
पिछले हफ्ते, सैन्य-स्थापित राष्ट्रपति ने कहा था, कि विद्रोह पर अप्रभावी प्रतिक्रिया के कारण म्यांमार के "टूटने" का खतरा है। सैन्य जनरलों का कहना है, कि वे "आतंकवादियों" से लड़ रहे हैं।
जबकि, अराकान आर्मी (एए) के प्रवक्ता खिन थू खा ने कहा, कि तीन सहयोगी विद्रोही समूहों में से एक, अराकान आर्मी (एए), जो पश्चिमी म्यांमार में राखीन राज्य में स्वायत्तता के लिए लड़ रही है, उसने राथेदौंग और मिनब्या क्षेत्रों में पदों पर कब्जा कर लिया है।
रॉयटर्स ने खिन थू खा के हवाले से कहा है, कि "हमने कुछ चौकियों पर कब्जा कर लिया है और कुछ अन्य जगहों पर लड़ाई जारी है।" रथेडौंग के एक निवासी ने कहा, कि सोमवार को सुबह गोलियों की आवाज सुनी गई, जिसके बाद घंटों तक तोपखाने से बमबारी की गई, जिसमें सेना को क्षेत्र के प्रवेश द्वारों को अवरुद्ध करते और प्रशासनिक भवनों की सुरक्षा मजबूत करते देखा गया।
रिपोर्ट में कहा गया है, कि "म्यांमार से करीब 5,000 लोग लड़ाई से बचने के लिए भारत के मिजोरम राज्य में दाखिल हुए हैं।" रॉयटर्स ने म्यांमार सीमा पर एक जिले के उपायुक्त जेम्स लालरिंचन के हवाले से ये रिपोर्ट दी है।
दूसरी ओर, चिन राज्य, जो वर्षों से काफी हद तक शांतिपूर्ण था, वहां भी 2021 के तख्तापलट के बाद भयंकर लड़ाई देखी गई और हजारों निवासियों ने सैन्य प्रशासन के खिलाफ हथियार उठा लिए हैं।

चीन और जुंटा के लिए झटका
रिपोर्ट के मुताबिक, म्यांमार में छिड़ी ये नई लड़ाई म्यांमार की सेना के लिए एक और झटका होगी, क्योंकि सेना के खिलाफ अब विद्रोह काफी तेजी से बढ़ती जा रही है। हजारों आम नागरिकों ने हाथों में हथियार ले लिए हैं और वो सेना के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं।
इन आम नागरिकों को सेना आतंकवादी घोषित कर रही है और गांवों पर एयरस्ट्राइक किए जा रहे हैं।
म्यांमार के पूर्वोत्तर में शान राज्य में 27 अक्टूबर को शुरू किए गए कॉर्डिनेट एंटी-जुंटा आक्रामक हमले में चीन के साथ सीमा के पास कई कस्बों और 100 से ज्यादा सैन्य चौकियों को जब्त कर लिया गया है।
रिपोर्ट में कहा गया है, कि शान राज्य के पश्चिम में मध्य म्यांमार के सागांग क्षेत्र में शहरी केंद्रों पर हमले भी हुए हैं, जबकि दक्षिण में पड़ोसी काया राज्य में संघर्ष के कारण शनिवार को एक लड़ाकू विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया।
विद्रोहियों ने दावा किया है, कि उन्होंने विमान को मार गिराया, जबकि सेना ने कहा, कि तकनीकी खराबी की वजह से विमान हादसा हुआ है।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, क्राइसिस ग्रुप थिंक टैंक के वरिष्ठ म्यांमार सलाहकार रिचर्ड हॉर्सी ने कहा, कि सेना को रखाइन राज्य में लड़ने का अनुभव है, लेकिन सेना की कई क्षेत्रों में कमजोरियां उजागर हुई हैं, इसीलिए उन्हें संघर्ष करना पड़ सकता है।
उन्होंने कहा, "अगर लड़ाई जारी रहती है, तो यह शासन के लिए एक महत्वपूर्ण नया मोर्चा खोल देगा, जो पहले से ही बहुत ज्यादा फैला हुआ है।" होर्सी ने कहा, "शासन के लिए सभी मोर्चों पर अपने प्रयासों पर ध्यान केंद्रित करना कठिन होगा।"
आपको बता दें, कि म्यांमार की सेना को चीन का समर्थन प्राप्त है और तख्तापलट के पीछे चीन का हाथ है, ताकि वो सेना के साथ मिलकर म्यांमार में अपना सैन्य अड्डा बना सके। म्यांमार की लोकतांत्रिक सरकार भारत के साथ रिश्ते रखती है, और इसीलिए चुनी हुई सरकार चीन की आंखों में खटक रही थी।












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