भारत के बाद सबसे ज्यादा सिख सांसदों के देश में पीएम मोदी
नई दिल्ली(विवेक शुक्ला) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कनाडा पहुंच गए हैं, जहां भारत के बाद सबसे ज्यादा सिख सांसद हैं। इनमें से कुछ भारतीय मूल के हैं तो कुछ बारास्ता अफ्रीका से कनाडा में आकर बसे। कनाडा में भारत वंशियों की आबादी करीब 25 लाख है।

पर पहले बात जसबीर संधू की। वे कनाडा पार्लियामेंट में सिख ‘आर्मी' के अहम सदस्य हैं। वे नार्थ सरे से डेमोक्रेटिक पार्टी से सांसद हैं। वे देश की 41 वीं संसद के लिए 1996 में निवार्चित हुए थे। वे भी उन तमाम कनाडा में बसे भारत के लोगों में हैं जो बचपन में अपने परिवारों के साथ यहां पर बेहतर जिंदगी के ख्वाब लेकर आ गए थे।
संधू का भारत से संबंधों को मजबूत बनाने की वकालत करते हैं। उऩ्होंने टैक्सी चलाने से लेकर रेस्तरा में छोटी-मोटी नौकरियां भी की। मतलब साफ है कि इन लोगों ने सांसद बनने का सफर बहुत संघर्षों के बाद पूरा किया।
टिम उप्पल भी कनाडा में सिक्खी और भारत के झंडे गाढ़ रहे हैं। वे भी मंत्री हैं। उप्पल का संबंध भी कंजरवेटिव पार्टी से है। वे एडमेंटन से सांसद हैं। उनका जन्म भी कनाडा में ही हुआ। वे संसद की हेल्थ और हेरिटेज मामलों की स्थायी समितियों के भी सदस्य हैं। वे 1992 से 1997 तक एक रेडियो में प्रोड्यूसर थे।
खेल मंत्री भारतीय
बलजीत सिह गोशल हाउस आफ कामंस के मेंबर हैं। वे खेल मंत्री भी हैं। वे कनाडा में भारतीय और सिख समाज से जुड़े मसलों को लेकर हमेशा संवेदनशील रहते हैं। उन्होंने राजनीति करने से पहले बहुत से पापड़ बेले हैं। कई जगह नौकरी की। समाज सेवा भी करते रहे।
उनके बारे में कहा जाता है कि जब से वे कनाडा के खेल मंत्री बने हैं तब से देश में खेलों को लेकर सरकार बजट बढ़ा रही है। बल सन 1981 में कनाडा जाकर बसे थे। उनकी शिक्षा जालंधर के डीएवी कालेज से हुई। वे कंजरवेटिव पार्टी के ब्रेमिलिया सीट से सांसद हैं।
बल्ले -बल्ले गिल
परम गिल भी कनाडा संसद में हैं। वे ब्रेमटन से सांसद हैं। 39 साल के परम पंजाब के मोगा जिले के पुरनवाला से हैं। वहां पर ही उऩका जन्म हुआ। वे 14 साल की उम्र में कनाडा चले गए थे। परमजीत सिंह कंजरवेटिव पार्टी से हैं। उन्होंने पिछले 2011 के चुनावों में लिबरेल पार्टी की रूबी ढ़ल्ला को हराया था। कहने की जरूरत नहीं है की रूबी भी कनाडा की चोटी की भारतीय मूल की नेता है।
जिन्नी सिम्स का असली नाम जिन्नी जोगिन्दर सिम्स है। 61 साल के सिम्स कनाडा की संसद में न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी की नुमाइंदगी करते हैं। वे पंजाब के दोवाब क्षेत्र के गढ़ जालंधर से संबंध रखते हैं। वे 9 साल की उम्र में कनाडा आ गई थीं अपने परिवार के साथ। इस सीट पर उनसे पहले सुख धालीवाल सांसद थे।
जिंदगी नरेन्द्र कौर ग्रेवाल की
नरेन्द्र कौर ग्रेवाल की जिंदगी भी बड़ी ही दिलचस्प है। उसे नीना भी कहते हैं। उसका जन्म ओसाका,जापान में 1958 में हुआ। कनाडा में बसने से पहले वह अपने पति के साथ लाइबेरिया में रहती थी। वे पहली बार जून, 2004 में सांसद बनीं। वे और रूबी ढल्ला हाउस में कामंस के लिए निर्वाचित होने वाली पहली सिख सांसद थीं। नरेन्द्र कौर के पति गुरमंत ग्रेवाल भी सांसद रहे हैं।
वे विदेश और महिला मामलों की स्थायी कमेटी की सदस्य हैं। वे 2006,2008 और 2011 के फेडरेल चुनावों में जीतीं। पंजाबी भारतवंशियों मामलों के जानकार प्रताप सहगल ने बताया कि 60 और 70 के दशकों में पंजाब के दोआब क्षेत्र से बड़ी तादाद में लोग कनाडा गए बेहतर जिंदगी की तलाश में।
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