आर्मीनिया-अजरबैजान में फिर छिड़ सकती है जंग, भारत ने की उकसावे को रोकने की अपील
नई दिल्ली, 19 मई। यूरोप के दो देशों आर्मीनिया और अजरबैजान के बीच एक बार फिर से तनाव बढ़ रहा है। पिछले सप्ताह ही आर्मीनिया ने अजरबैजान के ऊपर उसकी सीमा के भीतर सेना भेजने का आरोप लगाया है। भारत भी लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और उसने दोनों पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील की है।

पिछले साल आर्मीनियाई फोर्स और अजरबैजान के बीच 6 सप्ताह तक संघर्ष हुआ था। बाद में रूस की सहमति से दोनों के बीच शांति बहाल हो सकी थी। लेकिन एक बार फिर अब दोनों देशों की बीच तनाव की खबरें आ रही हैं। आर्मीनिया ने अजरबैजान के ऊपर उसकी सीमा में तीन किलोमीटर अंदर घुसने का आरोप लगाया है।
अजरबैजान ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उसकी सेनाएं अपने क्षेत्र में हैं और केवल बॉर्डर की सुरक्षा सुनिश्चित कर रही हैं। आर्मीनिया ने कहा है कि अजरबैजान ने सीमा में घुस आए सैनिकों को वापस बुलाने का अपना वादा पूरा नहीं किया है।
भारत ने दिया बयान
दोनों पक्षों के बीच बढ़ते तनाव को लेकर भारत के विदेश मंत्रालय ने भी प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा है कि "हम आर्मीनिया-अजरबैजान सीमा पर स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। सैन्य बलों के माध्यम से सीमा पर घुसपैठ स्थिति को अस्थिर कर सकती है और नए सिरे से हिंसा पैदा कर सकती है। हम उल्लंघन करने वाले पक्ष से तत्काल बलों को वापस बुलाने और आगे किसी भी उकसावे को रोकने का आह्वान करते हैं।"
बयान में आगे कहा गया है कि भारत हमेशा से द्विपक्षीय विवादों का राजनीतिक और कूटनीतिक माध्यमों से शांतिपूर्वक तरीके से हल करने का समर्थन करता है। दक्षिमी काकाशस क्षेत्र में शांति और स्थिरता क्षेत्रीय सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।"
अमेरिका ने भी जताई चिंता
आर्मीनिया और अजरबैजान की स्थिति पर अमेरिका ने भी नजर बनाई रखी हुई है। व्हाइट हाउस के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलीवन ने सोमवार को दोनों नेताओं से अलग-अलग बात की थी। व्हाइट हाउस ने बयान जारी कर कहा है कि अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने दोनों देशों के नेताओं के साथ बातचीत में तनाव को लेकर चिंता जाहिर की है।












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