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Mars Mission:फरवरी में मंगल ग्रह पर 'ट्रैफिक जाम', इन तीन देशों के पहुंच रहे हैं अंतरिक्ष यान

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मंगल मिशन: अगले कुछ हफ्तों तक तीन देशों की सांसें थमने वाली हैं। क्योंकि, इसी महीने तीन देशों का मंगल मिशन 'लाल ग्रह' की कक्षा में प्रवेश कर रहा है। ये तीन देश हैं- संयुक्त अरब अमीरात, चीन और अमेरिका। इन तीनों देशों ने पिछले साल जुलाई में अलग-अलग मिशन पृथ्वी के सबसे नजदीकी ग्रह की ओर रवाना किया था। इनमें से यूएई का मंगल यान मंगलवार को ही लाल ग्रह की कक्षा में पहुंचने वाला है और उसके कुछ ही दिनों बाद चीन का मिशन भी पहुंचने वाला है।

यूएई का मंगल मिशन: होप

यूएई का मंगल मिशन: होप

संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के मंगल मिशन का नाम है 'होप', जिसे 20 जुलाई, 2020 को जापान के तनेगाशिमा स्पेस सेंटर से लॉन्च किया गया था। 'होप' जैसा कि ना से ही स्पष्ट है कि इससे यूएई को काफी उम्मीदें हैं। 'होप' अरब देशों का इस तरह का पहला स्पेस मिशन है। इसका लक्ष्य वैज्ञानिकों के लिए मंगल के वातावरण की पुख्ता जानकारी उपलब्ध कराना है। 9 फरवरी, 2021 यानी मंगलवार को ही 'होप' मंगल ग्रह की कक्षा में प्रवेश करने जा रहा है। यह प्रक्रिया पूरी तरह से स्वचालित होगी। हालांकि, इस मिशन से जुड़े प्रवक्ता ने इस प्रक्रिया को मिशन का सबसे खतरनाक ऑपरेशन बताया है। वैज्ञानिक उम्मीद जता रहे हैं कि सारी प्रक्रिया सही-सलामत पूरी हो जाए।

चीन का मंगल मिशन: तियानवेन-1

चीन का मंगल मिशन: तियानवेन-1

मंगल की कक्षा में प्रवेश करने वाले दूसरा मिशन चीन का तियानवेन-1 है। चाइनीज में तियानवेन का अर्थ है- स्वर्ग से सवाल। यह उसका भी पहला स्वतंत्र मंगल अभियान है। इसे यूएई के तीन दिन बाद यानी 23 जुलाई ,2020 को हैइनान प्रांत के वेंचैंग स्पेस लॉन्च सेंटर से भेजा गया था। तियानवेन-1 के भी इसी हफ्ते मंगल की कक्षा में पहुंचने की उम्मीद है। चीन का मंगल मिशन भी लाल ग्रह के वातावरण का पता लगाएगा। लेकिन, इस मिशन का मुख्य हिस्सा मई में पूरा होना है, जब इसके रोवर को मंगल के दक्षिणी हिस्से या यूटोपिया प्लैनिटिया की सतह पर सॉफ्ट-लैंड कराने की योजना है। चीन का यह मिशन चीन के भविष्य की योजना पर आधारित है, जिससे कि वह मंगल से उसकी चट्टान और मिट्टी धरती पर ला सके।

अमेरिका का मंगल मिशन: परसेवरेंस

अमेरिका का मंगल मिशन: परसेवरेंस

तीनों मिशन में अमेरिका के मंगल अभियान 'परसेवरेंस' में अनुभव और आत्मविश्वास की चासनी भी चढ़ी हुई है। यह सबसे नया अभियान है, जो अपने साथ धरती का पहला मंगल हेलीकॉप्टर-इंजेन्यूटी भी ले गया है। खास बात ये है कि दूसरे ग्रह के लिए बना पहले हेलीकॉप्टर का नाम भारती मूल की छात्रा वनीजा रुपानी ने ही रखा है। इस मिशन का लक्ष्य भविष्य में दूसरे ग्रह पर मानव को उतारने की संभावनाएं तलाशना है। हालांकि, कितना भी अनुभव हो और आत्मविश्वास भी हो, लेकिन अमेरिकी मार्स मिशन को लेकर नासा के वैज्ञानिक भी यूएई और चीन के वैज्ञानिकों से कम तनाव में नहीं हैं। इसके रोवर को 18 फरवरी को मंगल के जेजीरो क्रैटर नाम की जगह पर उतरने की संभावना है। 'परसेवरेंस' 20,000 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से मंगल के वायुमंडल में नीचे उतरना शुरू होगा और इसकी रफ्तार को पैराशूट की मदद से 3.2 किलोमीटर की रफ्तार तक कम किया जाएगा। फिर रोवर को एक बड़े स्काई क्रेन की मदद से धीरे से 6 पहियों पर मंगल की सतह पर उतारा जाएगा। वैसे 'नासा' मंगल पर कई रोवर उतार चुका है, लेकिन उसके वैज्ञानिक फिर भी कहते हैं कि 'मंगल पर उतरना कठिन है।'

इसे भी पढ़े- जिसका डर था वही हुआ: WHO की जांच टीम ने चीन को बताया बेदाग, वुहान में नहीं मिले सबूत

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English summary
In February, three spacecraft from the UAE, China and the US will enter Mars orbit and a Mars mission will land on the surface of the Red Planet
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