जकरबर्ग ने रोहिंग्याओं के खिलाफ हो रही हिंसा के लिए मांगी माफी, कहा- Facebook से नहीं बढ़ने देंगे हिंसा
वॉशिंगटन। डेटा लीक के बाद डैमेज कंट्रोल स्थिति में पहुंची दुनिया की सबसे बड़ी सोशल नेटवर्किंग साइट के सीईओ मार्क जकरबर्ग ने अमेरिकी सीनेट में मंगलवार को ना सिर्फ माफी मांगी, बल्कि भरोसा भी दिलाया कि भविष्य में इमानदारी भी बरतेंगे। फेसबुक इन दिनों डेटा लीक के साथ-साथ यह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म अपने मिसयूज के भी आरोपों को झेल रहा है। पिछले सप्ताह रोहिंग्या संकट पर म्यांमार के एक एक्टिविस्ट ने फेसबुक के सीईओ को ओपन लेटर लिखकर नाराजगी व्यक्त की थी, जिसके बाद जकरबर्ग ने उसका रिप्लाय कर माफी मांगी है। जकरबर्ग ने माफी नामे में लिखा कि म्यांमार में नफरत भरे बयानों से निपटने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं।

म्यांमार में सिविल सोसायटी ऑर्गनाइजेशन के एक्टिविस्ट ने मार्क जकरबर्ग को लेटर लिख कड़ी आलोचना करते हुए, उनके देश में बढ़ती नफरत और हिंसा के लिए फेसबुक को जिम्मेदार ठहराया था। इस लेटर के दूसरे दिन ही जकरबर्ग ने एक्टिविस्ट से माफी मांगते हुए, उसे भरोसा दिलाया कि फेसबुक म्यांमार में बढ़ते नफरत भरे बयानों को रोकने के लिए पूरी कोशिश कर रहा है। यूएन के जांचकर्ताओं ने भी रोहिंग्या मुसलमानों के खिलाफ हो रही हिंसा, एंटी मुस्लिम स्पीच और फेक न्यूज के लिए फेसबुक की सबसे बड़ी भूमिका बताई थी।
जकरबर्ग ने अपने ईमेल में लिखा कि फेसबुक ने बर्मी भाषा के दर्जनों समीक्षक इस नफरत भरी स्पीच पर निगाह रख रहे हैं। फेसबुक सीईओ ने कहा कि म्यांमार संबंधित मुद्दों पर नजर रखने के लिए कंपनी ने कई लोगों को हायर किया है, जिसमें एक प्रोडक्ट टीम भी शामिल है, जो वहां हिंसा को रोकने के लिए काम कर रही है।
सिविल सोसायटी ऑर्गनाइजेशन का आरोप है कि उनके देश को हिंसा और नफरत फैलाने में फेसबुक की सबसे बड़ी भूमिका है, जिसकी वजह से देश के कई शहरों में तनाव है। उन्होंने कहा कि फेसबुक का म्यांमार में जातीय हिंसा को रोकने में मदद करने के लिए कई वादों का इतिहास रहा है, लेकिन वह हमेशा नाकाम रहा है।












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