वेश्याओं की हत्याकर लाश के साथ करता था वहशीपन, 130 साल बाद हुआ सीरियल किलर का खुलासा
वेश्याओं की हत्याकर करने वाले सनी हत्यारा 130 साल बाद हुआ बेनकाब
लंदन। 130 साल पहले लंदन में वेश्याओं की सिलसिलेवार हत्याओं और उनकी लाशों को काटकर शरीर के अंग निकाल लेने के केस में पुलिस ने नया खुलासा किया है। पुलिस का कहना है कि 130 साल पुराने केस को उन्होंने सुलझा लिया है। मामले की जांच कर रही टीम का कहना है कि उन्होंने 'जैक द रिपर' को बेनकाब कर दिया है। सीरियल किलर ने 130 पहले प्रेस को भेजी चिट्ठी में खुद को जैक द रिपर कहा था।

1888 में हुई थी वेश्याओं हत्याएं
लंदन में 1888 से 1891 में एक के बाद एक कई वेश्याओं की हत्या हुई थी। इन सबमें जो एक जैसी बात सामने आई थी वो ये कि हत्या के बाद लाशों को काटकर उनके शरीर के अंग निकाले गए थे। हत्यारे ने हत्या के बाद वहशीपन की हद करते हुए वेश्याओं के दिल, किडनी और बच्चेदानी जैसे अंग निकाल लिए थे, तो प्राइवेट पार्ट को भी जख्मी किया था। लंदन में उस वक्त इस सीरियल किलर का काफी खौफ था, जो सिर्फ वेश्याओं को शिकार बनाता था। इस सीरियल किलर ने दस से ज्यादा महिलाओं की हत्या की थी। इसको कभी गिरफ्तार नहीं किया जा सका था।

डीएनए से किया खुलासा
जांच करने वाली टीम में वैज्ञानिक भी शामिल हैं। टीम का दावा है कि उन्होंने डीएनए मैच के आधार पर पिछले हफ्ते यह खुलासा किया है। 130 साल पहले सीरियल किलर का शिकार हुईं पांच पीड़ितों के पास से मिले शॉल से डीएनए लिया गया। हत्यारे के खिलाफ डीएनए टेस्ट के जरिए सबूत मिल गया है।

महिला के पास से मिला था शॉल
जांच टीम का कहना है कि 1888 में कैथरीन नाम की मृतक महिला के पास से एक सिल्क का शॉल मिला था, जिस पर खून और वीर्य के निशान थे। यूनिवर्सिटी ऑफ लीड्स और लीवरपूल जॉन मूर्स यूनिवर्सिटी के जारी लोहेलमेन की तरफ से पब्लिश किए गए रिसर्च पेपर्स में कहा गया है कि हत्यारे की पहचान आज तक एक रहस्य थी। अब हमारी रिसर्च के आधार पर सामने आया है कि हत्यारे के भूरे बाल और भूरी आंखें थीं और यह सबूत इकलौता ऐसा सबूत है, जो सीधे तौर पर हत्यारे से जुड़ा है।












Click it and Unblock the Notifications