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अरब देश लेबनान में ईसाईयों के विरोध के आगे झुके मुस्लिम PM, घड़ी की टाइमिंग बदलने का फैसला पलटा

लेबनान के सबसे बड़े मेरोनाइट चर्च ने सरकार के फैसले के विरोध में अपनी घड़ी के समय को एक घंटा आगे बढ़ाकर सेट करने का ऐलान किया था, जो मार्च महीने के आखिरी रविवार को किया जाता है।

lebanon daylight saving time

Image: Oneindia

लेबनान में समय बढ़ाने से जुड़े विवाद ने पूरे देश में अफरातफरी मचा दी जिसके बाद प्रधानमंत्री को अपना फैसला बदलना पड़ा। कार्यवाहक प्रधानमंत्री नजीब मिकाती ने मार्च महीने के आखिरी रविवार को घड़ी के एक घंटे बढ़ाने के नियम को बदलते हुए इसे 20 अप्रैल से लागू करने का एलान किया था। लेकिन इसका भारी विरोध शुरू हो गया। ईसाई संगठनों ने आरोप लगाया कि ऐसा मुस्लिमों को खुश करने के लिए किया गया है। इसके लंबे विवाद के बाद पीएम ने डे-लाइट सेविंग टाइम को बुधवार, 29 मार्च की आधी रात से लागू करने का ऐलान किया।

रमजान को देखते हुए बदला नियम

पीएम मिकाती ने बीते गुरुवार को डे-लाइट सेविंग टाइम के नियम में बदलाव किया था, ताकि मुसलमान रमजान के पवित्र महीने के दौरान पहले अपना उपवास तोड़ सकें। लेकिन ईसाई अधिकारियों सहित बाकी राजनीतिक दलों ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया। पीएम के बनाए नियम को धत्ता बताते हुए लेबनान के सबसे बड़े मेरोनाइट चर्च ने मार्च के आखिरी रविवार को ही अपनी घड़ी के समय को एक घंटा आगे बढ़ाकर सेट करने का ऐलान कर दिया।

पीएम ने बदला फैसला

चर्च और कैबिनेट के बीच तनाव और अलग-अलग टाइम होने के चलते पूरे देश में अफरातफरी मच गई। आधी घड़ियां अपने पुराने समय से चलने लगीं और आधी घड़ियां डे-लाइट सेविंग टाइम मानते हुए समय से घंटाभर आगे बढ़ गईं। समस्या बढ़ने के बाद पीएम नजीब ने सोमवार को घोषणा की कि घड़ियां अब बुधवार रात को आगे बढ़ेंगी। पीएम मिकाती, जो कि एक सुन्नी मुसलमान हैं, ने विवाद के बाद अपनी बात से पलटते हुए कहा कि उनका निर्णय रमजान के दौरान उपवास करने वालों को "राहत" देने के लिए नहीं था। उन्होंने कहा कि ये समस्या राष्ट्रपति पद के न रहने से हुई है।

लेबनान में राजनीतिक संकट

आपको बता दें कि लेबनान में संसद में प्रतिद्वंद्वी गठजोड़ के बीच लगातार गतिरोध के कारण पिछले साल से देश में कोई राष्ट्रपति नहीं है और केवल एक कार्यवाहक सरकार है। लेबनान में धार्मिक सत्ता-साझेदारी प्रणाली के तहत, प्रधानमंत्री का पद एक सुन्नी, राष्ट्रपति का पद एक ईसाई और संसद अध्यक्ष एक शिया के लिए आरक्षित है। हालांकि अलग-अलग दलों के बीच गतिरोध की वजह से लंबे वक्त से देश में राष्ट्रपति तक नहीं चुना जा सका है। लेबनान में कुल 18 धर्मों के लोग मिलकर सरकार चलाते हैं।

क्यों बदला जाता है टाइम

दरअसल कई भूमध्यसागरीय देश की तरह लेबनान में भी हर साल आखिरी रविवार को घड़ियों को आधिकारिक रूप से आगे-पीछे कर दिया जाता है। इसकी वजह सर्दियों में दिन का छोटा होना और गर्मियों में दिन का बड़ा होना है। समय का अधिक बेहतर तरीके से इस्तेमाल हो इसके लिए गर्मियों में घड़ी की सुई एक घंटे बढ़ा दी जाती है और सर्दियों में एक घंटे घटा दी जाती है। सर्दियों में जब दिन जल्दी ढलेगा तो काम जल्दी बंद हो जाएंगे, वहीं गर्मियों में इसका उल्टा होता है।

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