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पर्याप्त मात्रा में टेस्टिंग न होने की वजह से भारत में कम दर्ज हो रहे हैं कोरोना के मामले- डब्ल्यूएचओ

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नई दिल्ली, 18 मई। भारत में सोमवार को कोरोना वायरस के मामलों में गिरावट दर्ज की गई लेकिन दैनिक मौतों का संख्या अभी भी 4 हजार के पार बनी हुई है। वहीं, विशेषज्ञों ने ग्रामीण क्षेत्रों में (जहां वायरस तेजी से फैल रहा है) टेस्ट की कमी के कारण इस डेटा को अविश्वसनीय बताया है। हाल की के महीनों में भारत में किसी भी देश से ज्यादा कोरोना के मामले सामने आए, बीते कुछ महीनों में भारत में प्रतिदिन 4 लाख से ज्यादा कोरोना के मामले दर्ज किए गए। वहीं, बीते कुछ दिनों में भारत में कोरोना के मामलों की संख्या में दर्ज हुई गिरावट को लेकर विशेषज्ञों ने कहा कि मामलों में आई कमी को देखते हुए यह निश्चित तौर पर नहीं कहा जा सकता है कि भारत में कोरोना पीक पर पहुंच गया है।

WHO

विशेषज्ञों ने कोरोना वायरस के B.1.617 वैरिएंट से देश विदेश में तेजी से बढ़ते मामलों पर भी चिंता जताई। विश्व स्वास्थ्य संगठन की मुख्य वैज्ञानिक सौम्या स्वामीनाथन ने भारत में कोरोना के मामलों की संख्या में आई कमी को लेकर कहा, 'देश के अभी भी कई हिस्से ऐसे हैं जिन्होंने कोरोना की पीक का अनुभव नहीं किया है और वहां अभी भी कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं।'

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उन्होंने आगे कहा कि भारत में कोरोना के मालमों में कमी भले ही आई हो लेकिन वहां पॉजिटिविटी रेज काफी हाई बना हुआ है जो कि खतरे का संकेत है। सौम्या स्वामीनाथन ने आगे कहा कि कई राज्यों में टेस्टिंग पर्याप्त मात्रा में नहीं हो रही है और जब हम हाई पॉजिटिविटी देखते हैं तो यह साफ है कि हम पर्याप्त मात्रा में टेस्ट नहीं कर रहे हैं और इसलिए सरकार द्वारा जारी आंकड़ों से यह नहीं कहा जा सकता कि भारत में कोरोना के मामलों में कमी आई है।

वहीं, स्वास्थ्य मंत्रालय सोमवार को जारी किए गए डेटा के अनुसार पिछले 24 घंटे में भारत में कोरोना के 2,81,386 नए मामले सामने आए। आंकड़ों की मानें तो 21 अप्रैल के बाद पहली बार कोरोना के दैनिक मामले 3 लाख से नीचे आए हैं। हालांकि कोरोना से होने वाली दैनिक मौतों का आंकड़ा अभी भी 4 हजार से ऊपर बना हुआ है। भारत में कोरोना की वर्तमान स्थिति को देखते हुए कुछ ही दिनों में कोरोना वायरस के मामले 2.5 करोड़ के पार पहुंच जाएंगे।

भारत में कोरोना के केसों में कमी केवल एक भ्रम

भारत में कोरोना महामारी की पहली लहर के बाद जब सितंबर में कोरोना पीक पर था, तो कोरोना की यह पीक शहरी क्षेत्रों पर केंद्रीत थी, जहां परीक्षण तेजी से शुरू किया गया था। जबकि फरवरी में शुरू हुई कोरेना की दूसरी लहर गांवों और कस्बों में फैल रही है जहां देश की कुल आबादी के तीन-चौथाई लोग रहते हैं और इन इलाकों में कोरोना टेस्ट बहुत पेचीदा हैं।

संयुक्त राज्य अमेरिका में मेयो क्लिनिक में मेडिसिन के प्रोफेसर एस विन्सेंट राजकुमार ने ट्विटर पर कहा, 'भारत में कोरोना वायरस के मामलों में कमी केवल एक भ्रम है।'

उन्होंने आगे कहा कि पहली बात तो यह है कि भारत में कोरोना टेस्ट पर्याप्त मात्रा में नहीं किए जा रहे हैं और दूसरा यह की शहरी क्षेत्रों में मिल रहे कोरोना के केसों को गिना जा रहा है ग्रामीण इलाकों में जो केस मिल रहे हैं उनकी गिनती ही नहीं हो रही है।

भारत में आए चक्रवाती तूफान के कारण तटीय इलाकों में टेस्टिंग प्रभावित हुई है। गुजरात में भी तूफान के कारण टेस्टिंग और टीकाकरण प्रभावित हुआ है जहां दो मई के बाद कोरोना के मामले 30% बढ़ गए हैं।

हालांकि कुछ इलाकों में लगे लॉकडाउन ने कोरोना के मामलों में कमी लाने में मदद की है।

English summary
Lack of adequate amount of testing is the only reason for reduction of corona cases in India - WHO
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