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जानिए कितना खतरनाक है 'भसन चार द्वीप', जहां एक लाख रोहिंग्या को भेजना चाहता है बांग्लादेश

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नई दिल्ली। म्यांमार से भगाए गए और बांग्लादेश में शरणार्थी के रूप में पिछले कई वर्ष रह रहे रोहिंग्या मुस्लिमों को बांग्लादेशी सरकार ने बंगाल की खाड़ी में महज 15 साल पहले उभरे द्वीप भसन चार पर भेजने पर सवाल उठ रहे हैं। अब तक 1640 रोहिंग्या शरणार्थियों को भसन चार द्वीप पर भेज चुकी बांग्लादेशी सरकार की योजना है कि वह धीरे-धीरे करीब 1 लाख रोहिंग्या को वहां बसाएगी। समुद्र से महज 6 फीट ऊंचे इस टापूनुमा द्वीप पर बसाने की यह कवायद रोहिंग्या मुस्लिमों के लाखों जिंदगी के साथ खिलवाड़ करार दिया जा रहा है।

Rohiyga

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15 साल पहले बंगाल की खाड़ी में उभरा है भसन चार द्वीप

15 साल पहले बंगाल की खाड़ी में उभरा है भसन चार द्वीप

माना जाता है बंगाल की खाड़ी में उभरे भसन चार द्वीप इंसानों के रहने लायक बिल्कुल नहीं है, जो कभी भी सामान्य चक्रवाती तूफानों की भेट चढ़ सकता है। ऐसे में बांग्लादेशी सरकार द्वारा रोहिग्या मुस्लिमों को वहां बसाने के फैसले पर प्रश्न उठना लाजिमी है। यह ऐसा द्वीप है जहां साल भर पहले कोई नहीं रहता था। यही कारण है कि मानवाधिकार कार्यकर्ता भी बांग्लादेशी सरकार के फैसले पर आश्चर्य जता रहे हैं।

एमनेस्टी इंटरनेशल ने निर्जन द्वीप पर भेजने के फैसले पर सवाल उठाए हैं

एमनेस्टी इंटरनेशल ने निर्जन द्वीप पर भेजने के फैसले पर सवाल उठाए हैं

एमनेस्टी इंटरनेशनल के दक्षिण एशियाई कैंपेनर साद हम्मादी ने रोहिंग्या मुस्लिमों को लगभग निर्जन द्वीप पर बांग्लादेश सरकार के भेजने के फैसले पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी जगह पर रोहिंग्या शरणार्थियों को भेजना उनके मानवाधिकारों पर चिंता पैदा करता है। उन्होंने बताया कि भसन चार द्वीप, एक ऐसा टापू है, जहां पर पत्रकारों या मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को भी जाने के लिए इजाजत लेनी पड़ती है, लेकन बिना मर्जी के वहां अब रोहिंग्या को भेजा जा रहा है।

कई सालों से बांग्लादेश के कॉक्स बाजार में रह रहे थे रोहिंग्या शरणार्थी

कई सालों से बांग्लादेश के कॉक्स बाजार में रह रहे थे रोहिंग्या शरणार्थी

गौरतलब है म्यांमार छोड़कर भागे रोहिंग्या मुस्लिम बतौर शरणार्थी बांग्लादेश के कॉक्स बाजार में पिछले कई सालों से रह रहे थे। चूंकि 2017 के बाद वहां रोहिंग्या मुस्लिमों की आबादी बढ़ने लगी, जिससे तटीय शहर कॉक्स बाजार में सीमित संसाधनों को लेकर हिंसा बढ़ने लगी। सरकार का तर्क है कि रोहिग्या शरणार्थियों को भसन चार द्वीप पर भेजने का फैसला आबादी में सही बंटवारे के लिए किया गया है, क्योंकि आबादी बढ़ने से कॉक्स बाजार के आसपास के जंगली जानवरों का खतरा भी बढ़ने लगा था।

 शरणार्थियों को भसन चार द्वीप पर भेजने के लिए सब्जबाग दिखाए गए

शरणार्थियों को भसन चार द्वीप पर भेजने के लिए सब्जबाग दिखाए गए

रिपोर्ट के मुताबिक बांग्लादेश सरकार द्वारा रोहिंग्या शरणार्थियों को भसन चार द्वीप पर भेजने के लिए उन्हें कई सब्जबाग दिखाए गए हैं, उन्हें बड़े घरों की सुविधाएं देने का वादा किया गया है, जबकि सच्चाई यह है कि 15 पहले समुद्र से निकलकर वजूद में आया यह टापू इंसानों के रहने लायक ही नहीं हैं। यह बात इसलिए भी गंभीर हो जाती हैं, क्योंकि बांग्लादेश करीब एक लाख रोहिंग्या शरणार्थियों को वहां बसाने की योजना है।

द्वीप में इंसानों की रहने लायक सुविधाएं विकसित की गई हैंः बांग्लादेश

द्वीप में इंसानों की रहने लायक सुविधाएं विकसित की गई हैंः बांग्लादेश

बांग्लादेशी के विदेश मंत्रालय ने हालांकि दावा किया है कि भसन चार द्वीप में इंसानों की रहने लायक सुविधाएं विकसित की गई हैं। विदेश मंत्रालय के मुताबिक भसन चार द्वीप पर इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किए जा चुके हैं, जो समुद्री आपदाओं का सामना कर सकते हैं और वहां पहले से छोटे-छोटे बैरकों मे कई शरणार्थी रहे हैं। बांग्लादेशी सरकार की दलीलों पर रिफ्यूजी इंटरनेशनल ने भी मुखालफत की है। ऐसे द्वीप शरणार्थियों को बसाने की योजना पर सवाल उठाते हुए कहा हैं कि वहां अक्सर समुद्री तूफान उठते रहते हैं।

मानवाधिकार कार्यकर्ता विदेश मंत्रालय के सचिव को पत्र लिख चुके हैं

मानवाधिकार कार्यकर्ता विदेश मंत्रालय के सचिव को पत्र लिख चुके हैं

उल्लेखनीय है पिछले महीने कई मानवाधिकार संगठनों ने बांग्लादेशी सरकार के रोहिंग्या शरणार्थियों के भसन चार द्वीप पर बसाने को लेकर बांग्लादेश विदेश मंत्रालय के सचिव को पत्र लिख चुके हैं। उस पत्र को सार्वजनिक करते हुए मानवाधिकार संगठनों ने बताया कि उन्होंने भसन चार द्वीप जाने की मंत्रालय से इजाजत मांगी थी, लेकिन उन्हें जाने की इजाजत नहीं दी गई थी। कहा जाता है कि खुद रोहिंग्या भी ऐसे द्वीप पर जाना नहीं चाहते हैं, जहां हर पल मौत का खतरा हो।

बांग्लादेशी सरकार ने भसन चार द्वीप पर एक छोटा शहर बनाया गया है

बांग्लादेशी सरकार ने भसन चार द्वीप पर एक छोटा शहर बनाया गया है

रिपोर्ट कहती है कि बांग्लादेशी सरकार ने भसन चार द्वीप पर एक छोटा शहर बनाया गया है, जिसमें बाजार, स्कूल और मस्जिद भी हैं, जिसको बसाने के लिए बांग्लादेशी सरकार द्वारा कथित तौर पर 270 मिलियन डॉलर खर्च किए गए हैं। सरकार के मुताबिक भसन चार द्वीप पर लगभग एक लाख की आबादी आराम से रह सकती है, जहां करीब 120 सेल्टर होम बनाए गए हैं और हर सेल्टर होम में 800 से 1000 लोग रह सकते हैं।

फिलहाल, भसन चार द्वीप पर 1640 रोहिंग्या पहुंचाए गए हैं

फिलहाल, भसन चार द्वीप पर 1640 रोहिंग्या पहुंचाए गए हैं

बताया जाता है कि लाल रंग की छतों ढंके भसन चार द्वीप बिल्कुल निर्जन द्वीप की तरह सूनसान इलाका है, जहां इंसान तो क्या जानवर भी नहीं रूकना पसंद करेंगे। यही कारण है कि शरणार्थियों को छोड़कर अब तक वहां कोई नहीं बसा है, लेकिन बांग्लादेश सरकार रोहिंग्या शरणार्थियों को वहां बसाने की योजना तैयार की है। फिलहाल, भसन चार द्वीप पर 1640 रोहिंग्या पहुंचाए गए हैं, जिनकी संख्या एक लाख तक पहुंचाने की योजना है।

कॉक्स बाजार से करीब लगभग 60 किलोमीटर दूर भसन चार द्वीप

कॉक्स बाजार से करीब लगभग 60 किलोमीटर दूर भसन चार द्वीप

बांग्लादेश के तटीय शहर कॉक्स बाजार से करीब लगभग 60 किलोमीटर दूर भसन चार द्वीप के बारे में सबसे खतरनाक बात यह है कि यहां कभी भी विनाशकारी तूफान आ सकता है और तूफानी चक्रवात पूरे के पूरे द्वीप को अपने समा सकता है, क्योंकि द्वीप की समुद्र से ऊंचाई महज 6 फीट ही है। बावजूद इसके रोहिंग्या शरणार्थियों को वहां बसाने पर अमादा है। बांग्लादेश का कहना है कि कॉक्स बाजार रोहिंग्या के लिए सुरक्षित नहीं है, इसलिए उन्हें द्वीप पर भेजा जा रहा है।

2012 में म्यांमार में बढ़ते अपराध के लिए भगाए गए रोहिंग्या मुस्लिम

2012 में म्यांमार में बढ़ते अपराध के लिए भगाए गए रोहिंग्या मुस्लिम

वर्ष 2012 में रोहिंग्या मुस्लिम म्यांमार में बढ़ते अपराधों में शामिल होने के आरोप में भगाए गए थे। हालांकि म्यांमार सरकार का कहना है कि सेना ने सिर्फ चरमपंथी रोहिंग्या के खिलाफ कार्रवाई की है। सच्चाई जो भी हो, लेकिन म्यांमार से भागकर भारी संख्या में रोहिंग्या मुस्लिम ने बांग्लादेश में शरण लिया। कुछ रोहिंग्या शरणार्थी के तौर पर भारत और मलेशिया में भी रह रहे हैं। दुनिया के सबसे सताए हुए शरणार्थियों में शामिल रोहिंग्या को भसन चार द्वीप पर बसाने का फैसला अब उनकी वजूद पर भी असर डाल सकता है।

English summary
Questions have been raised over the sending of Rohingya Muslims who have been banished from Myanmar and have been living as refugees in Bangladesh for the past several years on the island of Bhasan Char, which emerged in the Bay of Bengal just 15 years ago. The Bangladeshi government, which has so far sent 1640 Rohingya refugees to Bhasan Char Island, plans to gradually settle around 1 lakh Rohingya. This exercise to settle on this island just 6 feet high from the sea is being played with millions of lives of Rohingya Muslims.
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