Kabul Blast: काबुल हमले में मारे गए लोगों के सम्मान में आधा झुका रहेगा अमेरिकी ध्वज
वाशिंगटन, 27 अगस्त। गुरुवार को काबुल एयरपोर्ट के पास दो आत्मघाती हमलावरों और बंदूकधारियों की तरफ से भीड़ पर किए गए हमले में अब तक 60 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई और 200 से ज्यादा जख्मी हैं । पेंटागन ने बताया कि काबुल हवाई अड्डे के बाहर हुए हमले में 13 अमेरिकी सैनिक मारे गए और 18 अन्य घायल हो गए हैं तो वहीं न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक आतंकी संगठन ISIS के खुरासान ग्रुप ने काबुल हवाई अड्डे पर हुए घातक दोहरे हमले की जिम्मेदारी ली है।

तो वहीं व्हाइट हाउस की ओर से बयान जारी करके कहा गया है कि 'काबुल में आतंकवादी हमलों में मारे गए पीड़ितों के सम्मान में 30 अगस्त की शाम तक अमेरिकी ध्वज आधा झुका रहेगा।' व्हाइट हाउस ने ये भी कहा कि पिछले 24 घंटे में 13,400 लोगों को अफगानिस्तान से निकाला जा चुका है।
विस्फोट करने वालों को हम माफ नहीं करेंगे
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जबकि इससे पहले अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने इस हमले की निंदा करते हुए कहा है कि विस्फोट करने वालों को हम माफ नहीं करेंगे, हम भूलेंगे नहीं, इसकी कीमत उन्हें चुकानी होगी। उन्हें कहीं से भी ढूंढ़कर मारेंगे। हालांकि इसके साथ ही राष्ट्रपति बाइडेन ने ये भी कहा कि हमे तालिबान और ISIS के बीच के कनेक्शन के सबूत नहीं मिले हैं।

ये एक आतंकवादी कृत्य है: तालिबान
हालांकि कल देर रात तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने इस बारे में बयान जारी करके कहा कि ये एक आतंकवादी कृत्य है। हमने पहले ही इस हमले का शक जता दिया था। साथ ही अमेरिकी अधिकारियों को ISIS के इस संभावित हमले की जानकारी भी दे दी थी। उन्होंने आगे कहा कि तालिबान अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए प्रतिबद्ध है। साथ ही वो अफगानिस्तान को आतंकवादियों का ठिकाना नहीं बनने देगा।

भारत ने की निंदा
तो वहीं इंडिया ने भी इस हमले की घोर निंदा करते हुए कहा कि आतंकवाद के खिलाफ सबको एकजुट होने की जरूरत है। विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि भारत काबुल में हुए बम धमाकों की कड़ी निंदा करता है। हम इस आतंकवादी हमले के पीड़ितों के परिवारों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करते हैं।
क्या है ISIS-K यानी खोरासान ग्रुप?
आपको बता दें कि साल 2012 खोरासान इलाके में कुछ लड़ाकों ने ईरान, तुर्कमेनिस्तान, अफगानिस्तान के बार्डर पर एक संगठन बनाया था, जो कि आजादी के नाम पर हमले किया करता था और दो साल के अंदर ही आंतक का पर्याय बन गया। साल 2014 में ये संगठन ISIS केा साथ मिल गया और इसका नाम ISIS-K यानी खोरासान गुट पड़ गया, जो कि इस वक्त काफी खतरनाक संगठन में जाना जाता है, इसका साउथ एशिया में काफी बड़ा नेटवर्क है।












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